Latest Updates
-
फ्रीज के ऊपर भूलकर भी न रखें ये 5 चीजें, वरना घर में आ सकता है कर्ज और बदकिस्मती -
Akshay Tritiya 2026: 19 या 20 अप्रैल, कब है अक्षय तृतीया? जानें सोना-चांदी खरीदने का महामुहूर्त -
इस राज्य में प्रेग्नेंट महिलाओं के साथ पतियों का भी होगा 'HIV' टेस्ट, इस गंभीर बीमारी की भी होगी जांच -
आपकी जीभ देगी Fatty Liver के संकेत? एक्सपर्ट से जानें पहली स्टेज के 5 शुरुआती लक्षण -
Brinjal Benefits: छोटे, लंबे या सफेद बैंगन; जानें आपकी सेहत के लिए कौन सा है सबसे बेस्ट? -
Babu Jagjivan Ram Jayanti: राजनीति के 'चाणक्य' थे बाबू जगजीवन राम, जयंती पर पढ़ें उनके अनमोल विचार और संदेश -
Happy Easter Wishes Jesus: प्रभु यीशु के पुनर्जन्म की मनाएं खुशियां, अपनों को भेजें ईस्टर संडे के संदेश -
Aaj Ka Rashifal 5 April 2026: मकर और कुंभ राशि वालों को मिलेगा सरप्राइज, सिंह राशि वाले रहें सावधान -
Samudrik Shastra: दांतों के बीच का गैप शुभ होता है या अशुभ? जानें क्या कहता है सामुद्रिक शास्त्र -
रास्ते में अर्थी दिखना शुभ होता है या अशुभ? जानें शवयात्रा दिखने पर क्या करना चाहिए
Som Pradosh Vrat Katha 2026: इस कथा के बिना अधूरा है सोम प्रदोष व्रत, यहां पढ़ें आरती और मंत्र
Som Pradosh Vrat Katha 2026 In Hindi: हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक मास की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। जब यह व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तो इसे 'सोम प्रदोष' कहा जाता है। साल 2026 में 16 मार्च को पड़ने वाला यह व्रत अत्यंत मंगलकारी है। माना जाता है कि प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में स्वयं महादेव शिव लिंग में साक्षात प्रकट होते हैं और माता पार्वती के साथ नृत्य करते हैं। इस समय की गई पूजा और व्रत कथा का श्रवण मात्र से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।
शिव भक्त प्रदोष व्रत रखते हैं और भोले नाथ को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा करते हैं। मगर प्रदोष व्रत बिना कथा और आरती के पूर्ण नहीं होता है। अगर आप भी सोम प्रदोष व्रत रख रहे हैं तो आइए जानते हैं सोम प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा, पूजा विधि और मंत्र।

सोम प्रदोष व्रत पूजा विधि (Puja Vidhi)
पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 06:30 से रात 08:54
प्रातः काल: स्नान के बाद स्वच्छ सफेद वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
संध्या पूजन: सूर्यास्त से 45 मिनट पहले फिर से स्नान करें या हाथ-पैर धोकर शुद्ध हो जाएं।
शिव अभिषेक: शिवलिंग पर गंगाजल, गाय का कच्चा दूध, दही, शहद और घी अर्पित करें।
श्रृंगार: महादेव को सफेद चंदन का तिलक लगाएं। अक्षत, बेलपत्र, धतूरा, भांग और सफेद फूल (मदार या चांदनी) चढ़ाएं।
दीप दान: शुद्ध घी का दीपक जलाएं और अगरबत्ती/धूप अर्पित करें।
कथा श्रवण: सोम प्रदोष व्रत कथा का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
भोग: महादेव को सफेद रंग की मिठाई या खीर का भोग लगाएं।
सोम प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा (Som Pradosh Vrat Katha)
प्राचीन काल में एक विधवा ब्राह्मणी अपने पुत्र के साथ भिक्षा मांगकर जीवन निर्वाह करती थी। एक दिन भिक्षा मांगकर लौटते समय उसे एक बालक मिला, जो घायल अवस्था में था। वह विदर्भ देश का राजकुमार था, जिसके पिता को शत्रुओं ने मार दिया था। ब्राह्मणी ने उस बालक को अपनाया और अपने साथ घर ले आई।
वह ब्राह्मणी प्रदोष व्रत बड़े श्रद्धा से करती थी। एक दिन दोनों बालक वन में घूम रहे थे, तभी राजकुमार को गंधर्व कन्या 'अंशुमती' मिली। अंशुमती राजकुमार पर मोहित हो गई और उसने अपने माता-पिता से उसे मिलवाया। भगवान शिव की कृपा और प्रदोष व्रत के पुण्य से राजकुमार ने अंशुमती से विवाह किया और गंधर्वों की सेना की मदद से अपने खोए हुए राज्य को वापस प्राप्त कर लिया।
जब राजकुमार राजा बना, तो उसने उस ब्राह्मणी के पुत्र को अपना मंत्री बनाया। ब्राह्मणी के व्रत के प्रताप से ही उन दोनों बालकों के दुख दूर हुए। तभी से यह मान्यता है कि जो भी भक्त सोम प्रदोष का व्रत करता है, उसे धन, वैभव और राजकीय सुख की प्राप्ति होती है।
भगवान शिव के प्रभावशाली मंत्र (Shiv Mantras)
पंचाक्षरी मंत्र: ॐ नमः शिवाय
महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
शिव गायत्री मंत्र: ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
भगवान शिव की आरती (Shiva Aarti)
जय शिव ओंकारा, भज जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...
अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता।
जगकर्ता जगभर्ता जगपालनकर्ता ॥ ॐ जय शिव...
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठि दर्शन पावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...
त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...



Click it and Unblock the Notifications











