Latest Updates
-
पेरिस में बना फ्रांस का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर, 1970 के संकल्प से 2026 तक ऐसे पूरा हुआ सफर -
International Literacy Day 2026: क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस? जानें इतिहास, महत्व और थीम -
International Literacy Day 2026: साक्षरता दिवस पर ये संदेश भेज सबको करें जागरूक, बताएं पढ़ने-लिखने का महत्व -
Aja Ekadashi Vrat Katha: अजा एकादशी पर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य -
Aja Ekadashi 2026: नारायण की कृपा...इन संदेशों के साथ अपने प्रियजनों को भेजें अजा एकादशी की शुभकामनाएं -
National Nutrition Week: प्रेग्नेंसी में जरूरी है सही न्यूट्रिशन, जानें गर्भावस्था में क्या खाएं-क्या न खाएं -
Aja Ekadashi 2026: कब है अजा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और पारण समय -
Teacher's Day 2026: 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? जानिए क्या है इसका इतिहास और महत्व -
Teacher's Day 2026 Sanskrit Wishes: इन संस्कृत श्लोकोंं के जरिए गुरुजनों को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं -
Teacher’s Day 2026 Wishes: गुरु का ज्ञान...इन संदेशों के साथ अपने टीचर्स को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं
Tija Pora Wishes: करू-भात खाकर रखा जाता है तीजा व्रत, इस तिहार पर भेजें सबको ये बधाई संदेश
Tija Pora Festival in Chhattisgarh: हरतालिका तीज का पर्व पूरे उत्तर और मध्य भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। यह सुहागन महिलाओं द्वारा रखा जाने वाला निर्जला व्रत होता है जिससे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
छत्तीसगढ़ राज्य में भी यह त्यौहार तीजा पोरा के तौर पर मनाया जाता है। 14 सितम्बर को पोरा त्यौहार मनाया गया और महिलाओं ने तरह तरह के पकवान बनाएं। 18 सितम्बर को राज्यभर की महिलाएं निर्जला व्रत रखेंगी। जानते हैं छत्तीसगढ़ी तिहार तीजा पोरा के बारे में विस्तार से और पेश हैं छत्तीसगढ़ी भाषा में कुछ बधाई सन्देश -

तीजा तिहार की तिथि
तीजा त्यौहार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष महिलायें 18 सितम्बर को यह व्रत रखेंगी। वे 17 सितंबर की रात को भोजन ग्रहण करेंगी, 18 को पूरे दिन निर्जला व्रत रखेंगी और फिर 19 की सुबह सूर्योदय के बाद स्नान करके, नये वस्त्र धारण करके, गणेश पूजन के बाद व्रत का पारण करेंगी। 18 सितंबर को व्रत के दिन वे सोलह श्रृंगार करती हैं, भगवान शिव और माता गौरी का पूजन और कथा सुनती हैं।
खाया जाता है करू भात
व्रत रखने से एक रात पहले राज्य में करू भात खाने का प्रचलन है। एक दूसरे के घर जाकर करू भात खाती हैं। करू भात यानी करेले की सब्ज़ी और चावल 17 तारीख को खाने के बाद महिलायें 18 को व्रत का पालन करेंगी। साथ ही तीजा के अवसर पर छत्तीसगढ़ की महिलायें अपने मायके जाती हैं।
हर सुहागिन जाती है अपने मायके
सभी विवाहित बेटियां अपने माता पिता के घर आती हैं, उनके लिए तरह तरह के स्थानीय पकवान जैसे ठेठरी, खुर्मी, बड़ा, अइढ़सा आदि बनाये जाते हैं। अपने गांव वापस जाकर महिलायें बचपन की यादों को भी ताज़ा करती हैं और उन सहेलियों से भी मुलाकात कर पाती हैं जिनसे शादी के बाद मिलना मुश्किल हो जाता है। तीजा का यह त्यौहार महिलाओं के मिलन और खुशियों का पर्व हो जाता है।

तीजा के दिन पारंपरिक लोक गीत भी गाए जाते हैं। साथ ही बच्चे मिट्टी से बने बैलों से खेलते हैं। घरों को रंग बिरंगे तोरण और फूलों से सजाया जाता है। गांव घर की छटा इस दिन देखने वाली होती है।
तीजा के कुछ बधाई सन्देश
1.
चंदन की खुशबू, बादलों की फुहार
मुबारक हो आप मन ला तीजा के तिहार!
2.
शिव जी की होवे कृपा,
मां पार्वती के मिले आशीर्वाद,
सब्बो संगवारी मन मिल के मनाएं तीजा तिहार!
तीजा पोरा के गाड़ा गाड़ा बधाई!

3.
नंदिया-बइला चलाबो
तीजा-पोरा तिहार मनाबो!
जम्मो तिजहारिन मन ला तीजा तिहार के अब्बड़ बधई।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
