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Vaishakh Amavasya 2023:अमावस की रात होती है निशाचरी, भूलकर भी श्मशान और सुनसान रास्तों से ना गुजरें
आज वैशाख अमावस्या है। हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। अमावस्या के दिन लोगों को अपने पितरों को प्रसन्न करने के लिए दान व अन्य कई तरह के उपाय करने को बोला जाता है।
वहीं इस रात को कई मान्यताओं के आधार पर निशाचरी भी कहते हैं। कहते है कि कुछ ऐसी खास तिथियां होती हैं जिनका पृथ्वी और मानव जीवन पर काफी प्रभाव पड़ता है और उन्ही तिथियों में से एक है अमावस की तिथि।

अमावस की रात को लेकर लोगों में डर बैठा होता है
आपको बता दें कि माह में पड़ने वाले 2 दिन सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं- पूर्णिमा और अमावस्या। जितना इन तिथियों को शुभ माना जाता है उतना ही इन 2 दिनों में यानि पूर्णिमा और अमावस्या के प्रति डर भी बना रहता है। इसके पीछे कई सारे कारण कार्य करते हैं। आप ने अक्सर फिल्मों में भी देखा होगा कि अमावस की रात को लेकर लोगों में डर बैठा होता है, कुछ ना कुछ अनहोनी अमावस की रात को दिखाई जाती है। साल में 12 पूर्णिमा और 12 अमावस्या होती हैं।

निशाचर हो जाते हैं सक्रिय
कहते हैं कि अमावस्या के दिन भूत-प्रेत, पिशाच, निशाचर जीव-जंतु,पितृ, दैत्य, शैतान की ताकत अधिक सक्रिय हो जाती है, और ये फ्री हो जाते हैं। इसलिए इस दिन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। लोगों को श्मशान के आस-पास से नही गुजरना चाहिए। ज्योतिषविदों के अनुसार,अमावस्या की रात को कभी भी श्मशान या उसके आस-पास से नहीं गुजरना चाहिए, साथ ही सूनसान रास्तों पर भी नहीं गुजरना चाहिए। बुरी ताकतें आज के दिन काफी पावरफुल होती हैं।

नकारात्मकता हावी हो जाती है
ज्योतिष शास्त्र में चन्द्रमा को मन का देवता कहते हैं। अमावस की रात चन्द्रमा दिखाई नहीं देता, जो लोग अति भावुक होते हैं, उन पर इसका बहुत प्रभाव पड़ता है। लड़कियों के बारें में कहा जाता है कि वो काफी भावुक होती है, इस दिन का उन पर काफी प्रभाव पड़ता है, वहीं नकरात्मक विचार वाले लोगों पर भी इसका काफी गहरा असर हो जाता है। नकारात्मकता और हावी हो जाती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। बोल्डस्काई हिंदी इस बारे में किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं करता है। इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है।)



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