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Varalakshmi Vrat Katha: वरलक्ष्मी व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, धन से जुड़ी बाधाएं होंगी दूर
Varalakshmi Vrat Katha 2026: हिंदू धर्म में सावन का अंतिम शुक्रवार बहुत ही खास होता है क्योंकि इस दिन वरलक्ष्मी व्रत रखा जाता है। यह व्रत देवी लक्ष्मी के 'वर' (वरदान देने वाले) रूप को समर्पित होता है। दक्षिण भारत में वरलक्ष्मी व्रत आज यानी 21 अगस्त को रखा जा रहा है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और घर में खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं और विधि-विधान के साथ मां वरलक्ष्मी का पूजन करती हैं। इस दिन पूजा के साथ-साथ व्रत कथा का पाठ करना भी जरूरी होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वरलक्ष्मी व्रत कथा का पाठ करने से साधक की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है। आइए, जानते हैं वरलक्ष्मी व्रत की कथा।

वरलक्ष्मी व्रत कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, बहुत समय पहले मगध राज्य में कुंडी नाम का एक नगर हुआ करता था। इसी नगर में चारुमति नाम की एक ब्राह्मण महिला अपने परिवार के साथ रहती थी। वह मां लक्ष्मी की बहुत बड़ी भक्त थी और नियमित रूप से उनकी पूजा करती थी।
कहा जाता है कि एक रात मां लक्ष्मी चारुमति से प्रसन्न होकर उसके सपने में आईं। माता ने उसे वरलक्ष्मी व्रत करने के लिए कहा और बताया कि इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने से मन की इच्छाएं पूरी होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।
अगली सुबह चारुमति ने मां लक्ष्मी के बताए अनुसार वरलक्ष्मी व्रत करने का निर्णय लिया। उसने अपने साथ नगर की अन्य महिलाओं को भी पूजा में शामिल किया। सभी महिलाओं ने पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ मां लक्ष्मी की पूजा की।
पूजा पूरी होने के बाद सभी महिलाएं कलश की परिक्रमा करने लगीं। मान्यता है कि जैसे ही उन्होंने परिक्रमा शुरू की, उनके शरीर पर सोने के आभूषण दिखाई देने लगे। उनके घर भी धन-संपत्ति से भर गए। इतना ही नहीं, उनके घरों में घोड़े, हाथी और गाय जैसे पशु भी आ गए।
इसी कारण वरलक्ष्मी व्रत को सुख, समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करने वाला माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, बाद में भगवान शिव ने यही कथा माता पार्वती को सुनाई थी। माता पार्वती ने भी इस व्रत को श्रद्धा से किया था।



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