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Vat Savitri Vrat Niyam: ऐसे करें वट सावित्री की पूजा ताकि सुहाग दीर्घायु हो और मिले संतान प्राप्ति का आशीर्वाद
भद्र देश के राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री का जब विवाह हुआ तो नारद मुनी ने ये बताया की सावित्री के पति सत्यवान अल्पायु हैं और ज्यादा दिन जिंदा नहीं रहेंगे।
फिर भी सावित्री ने सत्यवान से विवाह किया और जिस दिन यमराज सत्यवान के प्राण हर के ले जाने लगे तो अपनी बुद्धिमता और विनयशीलता से सावित्री ने यमराज को प्रभावित कर अपने पति के प्राण वापस ले लिए।

लेकिन इस कथा में जो सबसे महत्वपूर्ण बात है वो ये है कि ये सारी घटना एक वट वृक्ष के नीचे हुई। ऐसा कहते हैं कि वट वृक्ष में देवताओं का वास होता है और ये वृक्ष प्राणदायी होता है। तभी से वट सावित्री की पूजा की जाती है। जो महिला वट सावित्री की पूजा करती है उसके पति की उम्र लम्बी होती है और संतान प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त होती है।
2023 में वट सावित्री पूजा की तिथि और मुहूर्त
हर वर्ष ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को वट सावित्री पूजा की जाती है। इस वर्ष 2023 में अमावस्या तिथि की 18 मई को रात 09 बजकर 42 मिनट से लेकर 19 मई को रात 09 बजकर 22 मिनट तक रहेगी। लेकिन उदयातिथि के अनुसार, वट सावित्री की पूजा और व्रत 19 मई को करना ही श्रेयस्कर होगा।
वट सावित्री पूजा कैसे करें:
सुबह उठकर स्नानादि से निवृत होकर घर के मंदिर में पूजा करें और सत्यवान और सावित्री को ध्यान में रखते हुए निर्जला व्रत का संकल्प लें।
इस दिन विवाहित महिलाएं सोलह श्रृंगार करें।
24 बरगद फल और 24 पूरियां अपने आँचल में रखकर बरगद वृक्ष की पूजा के लिए जायें। 12 पुरियां और 12 फलों को वट वृक्ष पर चढ़ा दें।
फिर फूल-पत्ती, अक्षत, धुप, नैवेद्य और दीप जलाएं। अब फल और मिठाई अर्पित करें और धूप जलाकर वृक्ष की पूजा करें।
वट वृक्ष के नीचे सत्यवान सावित्री की मूर्ति को स्थापित करे और उसकी विधि विधान पूजा करें।
अब वट वृक्ष में कच्चे सूत को लपटते हुए 12, 21, 51, 108 जितनी बार संभव हो उतनी परिक्रमा करें एवं हर परिक्रमा पर एक भीगा हुआ चना चढ़ाते जाएं और परिक्रमा पूरी होने के बाद सत्यवान व सावित्री की कथा सुनें।
इसके बाद हाथ में भिगोया हुआ चना लेकर वट सावित्री की कथा सुनें।
फिर इस भीगे चने के साथ वस्त्र और कुछ पैसा रख कर इसे अपनी सास को दें और उनका आशीर्वाद लें।
फिर व्रत रखें और दूसरे दिन सुबह स्नान करके पारण करें।
इस दिन किसी गरीब सुहागन को सुहाग का सामान दान करना बहुत फलदायी माना जाता है।
इस दिन बरगद का पेड़ लगाने से देवता गण प्रसन्न होते हैं।
बरगद की जड़ का छोटा सा टुकड़ा पीले कपडे में लपेट कर घर के पूजा स्थल या जहां धन रखते हैं वहां रखने से शुभ होता है।

वट सावित्री व्रत पूजा मंत्र
इस दिन पूजन से पहले 108 बार महामृत्युजंय मंत्र का जप करें। इसके बाद 108 बार यम मंत्र का जाप करें।
यम मंत्र: ॐ सूर्यपुत्राय विद्महे, महाकालाय धीमहि। तन्नो यम: प्रचोदयात्।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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