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Vishwakarma Jayanti 2024 Kab Hai: जानें कब होगी विश्वकर्मा पूजा, इस विधि से पाएं आशीर्वाद
Vishwakarma Jayanti 2024 Kab Hai: सम्पूर्ण ब्रम्हांड में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार माना जाता था। पौराणिक कथा के मुताबिक उन्हें ब्रम्हांड का इंजीनियर कहा जाता है। सनातन धर्म में भगवान विश्वकर्मा का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ माह की त्रयोदशी तिथि के दिन विश्वकर्मा जयंती मनाई जाती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार जब सभी देवी देवताओं के द्वारा सृष्टि के निर्माण के लिए कार्य हो रहा था तो भगवान विश्वकर्मा को शिल्पकारी का जिम्मा सोपा गया था। इसलिए भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का प्रथम इंजीनियर के रूप में पूजा जाता है। विश्वकर्मा जयन्ती के दिन भक्त विश्वकर्मा भगवान की पूजा के साथ साथ अपने काम करने के औज़ारऔर उपकरणों की भी पूजा की जाती है। भगवान विश्वकर्मा ने ही श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी, उनका सुदर्शन चक्र और महादेव के त्रिशूल का शिल्प किया था। जानते हैं इस वर्ष की विश्वकर्मा जयंती की तिथि, महत्व और पूजा विधि के बारे में विस्तार से -

विश्वकर्मा जयंती 2024 कब है (Vishwakarma Jayanti 2024)
सनातन धर्म में प्रत्येक वर्ष माघ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन विधि विधान से विश्वकर्मा जयंती मनाई जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष माघ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 21 फरवरी यानि बुधवार को प्रारंभ होकर 22 फरवरी दिन गुरुवार को समाप्त होगी। उदया तिथि को मानते हुए 22 फरवरी के दिन विश्वकर्मा जयंती मनाई जाएगी।
विश्वकर्मा जयंती का महत्व
विश्वकर्मा जयंती के दिन विभिन्न कारीगर जैसे बढ़ई, वास्तुकार, मूर्तिकार, मैकेनिक, कृषक, तथा कारखानो आदि में काम करने वाले श्रमिक विशेष पूजा करते हैं। इस शुभ दिन वे भगवान विश्वकर्मा से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें व्यवसाय में कुशलता और सफलता प्रदान करें। इस दिन शिल्पकारों और मज़दूरों द्वारा शिल्प भगवान की अर्चना से कार्य में प्रगति भी हासिल होती है।

विश्वकर्मा जयंती पूजा विधि
इस शुभ दिन जल्दी उठकर स्वच्छ वस्त्रों को धारण करें। अपने काम करने के औजारों, उपकरणों और मशीनों को भी अच्छे से साफ़ करके चमकाएं। इसके बाद पूजा स्थल को अच्छे से साफ़ करके गंगाजल का छिड़काव करें। पूजाघर में चौकी की स्थापना करके उसपर पीला या लाल वस्त्र बिछाएं और विश्वकर्मा भगवान की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करें। उनके सामने एक जल से भरे कलश की भी स्थापना करें।भगवान् को फूलों की माला चढ़ाएं, अक्षत व ताज़े फूल अर्पित करें। इसके पश्चात सभी औजारों और उपकरणों को भगवान विश्वकर्मा के समक्ष रखकर उनपर रक्षा सूत्र बांधें और उनपर तिलक लगा दें। सभी पर फूल अर्पित करें। भगवान को फल और मिठाई का भोग लगाएं। भगवान विश्वकर्मा की आरती करें, उनसे अपने काम की सफलता के लिए प्रार्थना करें। भगवान का ध्यान लगायें और "ॐ विश्वकर्मणे नमः" मंत्र का जाप करें।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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