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Scientific Reason: तुलसी को घर के आंगन में ही क्यों रखा जाता है? जानिए इसके पीछे की पौराणिक और वैज्ञानिक वजह
why is tulsi plant kept outside : तुलसी मात्र एक पौधा नही, बल्कि हिंदू धर्म में इस पौधे को पूजनीय, पवित्र व देवी का स्थान दिया गया है। माना जाता है कि जिस घर में तुलसी की पूजा होती है। वहां सदा सकारात्मकता वास करती है।
हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को पूजा जाता है और घर की महिलाएं इसकी पूजा-अर्चना से दिन की शुरुआत करती हैं। इस लिए हर घर के आंगन में आपको तुलसी का पौधा जरुर लगा हुआ दिखेगा। लेकिन आपने कभी सोचा है कि तुलसी का पौधा इतना पूज्नीय होने के बावजूद भी इसे घर के अंदर नहीं बाहर आंगन में लगाया जाता है। दर असल तुलसी के पौधे को आंगन में लगाने के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक तर्क है।

धार्मिक महत्व
मान्यतानुसार तुलसी के कारण घर में दैत्यशक्ति और नकारात्मक चीजें प्रवेश नहीं कर पाती हैं, यही कारण है कि तुलसी को प्रवेश द्वार या आंगन या बाहर रखा जाता है। जिससे घर पर आने वाली बालाएं किसी भी दिशा से प्रवेश ना कर पाएं। माना जाता है कि जिन घरों में रोजाना तुलसी की पूजा होती है वहां कभी यमदूत प्रवेश नहीं करते। इसके साथ ही घर की सुख-समृद्धि बनी रहती है।

ये भी है एक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी भगवन विष्णु को अतिप्रिय है। ऐसा माना जाता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा होता है, उस घर में भगवान विष्णु का वास होता है। इसके साथ ऐसा माना जाता है कि जिस घर में तुलसी के पौधे की पूजा की जाती है, उस घर में माँ लक्ष्मी हमेशा वास करती है।
वैज्ञानिक कारण
तुलसी का पौधा आंगन में लगाने से अलग तरह की सकारात्मकता आती है यह एक वैज्ञानिक परंपरा है। तुलसी में सकारात्मक ऊर्जा होती है, जो हमेशा आशा का संचार करती है। आयुर्वेद में तुलसी को एक औषधीय पौधा माना गया है। घर में तुलसी का पौधा लगाने से आस-पास का वातावरण शुद्ध होता है और बीमारियां दूर रहती है।
तुलसी के नियमित सेवन से शरीर में ऊर्जा का प्रवाह नियंत्रित होता है और व्यक्ति की उम्र बढ़ती है। तुलसी के पौधे में एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल व एंटीबायोटिक गुण होते हैं जो संक्रमण से लड़ने में शरीर को सक्षम बनाते हैं। तुलसी का पौधा घर में होने से घर का वातारण शुद्ध होता है। संक्रामक रोगों से निपटने के लिए तुलसी कारगर है।
रामचरितमानस में भी बताई गई है तुलसी की महिमा
तुलसीकृत रामचरितमानस के दोहा 'रामायुध अंकित गृह सोभा बरनि न जाई, नव तुलसिका बृंद तहं देखि हरष कपिराई।।' चौपाई के माध्यम से भगवान के भक्त की पहचान बताई गई है। जब हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुंचे तो उन्होंने रावण के छोटे भाई विभीषण के घर के बाहर भगवान राम के आयुध यानी अस्त्रों, माता तुलसी के पौधे आदि को देखकर ही उन्हें प्रभु का भक्त माना। जिसके बाद स्वयं दर्शन देकर उन्हें प्रभु श्रीराम की महिमा बताई।



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