Latest Updates
-
बारिश के मौसम में तेजी से बढ़ रहा है वायरल फीवर का खतरा, जानिए लक्षण और बचाव के उपाय -
Friendship Day Wishes For Best Friend: इन संदेशों के जरिए बेस्ट फ्रेंड को दें फ्रेंडशिप डे की बधाई -
Happy Friendship Day 2026 Wishes: तेरी मेरी यारी...इन संदेशों के साथ दोस्तों को दें फ्रेंडशिप डे की शुभकामनाएं -
आगरा की अवनी गुप्ता ने Miss Supranational 2026 में बढ़ाया भारत का मान, कॉर्पोरेट जॉब छोड़ बनाई टॉप 12 में जगह -
सावन में भूलकर भी न करें इन चीजों का सेवन, एक्सपर्ट से जानें सावन में क्या खाएं और क्या नहीं -
Sawan Somwar Vrat 2026: क्या पीरियड्स में सावन सोमवार का व्रत रखा जा सकता है? जानें क्या कहते हैं शास्त्र -
World Lung Cancer Day 2026: स्मोकिंग न करने वालों को भी हो सकता है लंग कैंसर, जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव -
August 2026 Vrat Tyohar: सावन शिवरात्रि से लेकर रक्षाबंधन तक, देखें अगस्त में आने वाले व्रत-त्योहारों की लिस्ट -
कर्नाटक में 18-25 साल के 7 हजार से ज्यादा छात्र HIV पॉजिटिव, अब सभी कॉलेजों में टेस्टिंग होगी अनिवार्य -
Sawan 2026: सावन में शिवलिंग की पूजा के दौरान भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, नाराज हो सकते हैं भगवान शिव
वैशाख अमावस्या को क्यों कहते हैं सतुवाई अमावस्या? जानें सत्तू और पितरों का वो रहस्य जो कम लोग जानते हैं
Vaishakh Amavasya- Satuwai Amavasya 2026: आज 17 अप्रैल 2026, दिन शुक्रवार को वैशाख अमावस्या है जिसे कई जगहों पर सतुवाई अमावस्या भी कहा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख माह की अमावस्या का विशेष आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक साधारण से दिखने वाले सत्तू का इस पवित्र तिथि से क्या संबंध है? दरअसल, बैसाख की तपती गर्मी में जब सूर्य देव अपने चरम पर होते हैं, तब सत्तू न केवल शरीर को शीतलता प्रदान करता है, बल्कि शास्त्रों में इसे पितरों का प्रिय भोजन भी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन सत्तू का दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पूर्वजों की आत्मा को तृप्ति प्राप्त होती है। आइए जानते हैं आखिर क्यों सत्तू के बिना अधूरी मानी जाती है वैशाख अमावस्या और क्या है इसके पीछे की पौराणिक कथा और इस दिन के अचुक उपाय जो पितृ दोष से दिलाएंगे मुक्ति।

सत्तू का पितरों से क्या है कनेक्शन
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख मास की भीषण गर्मी से केवल जीवित मनुष्य ही नहीं, बल्कि पितृ लोक में निवास करने वाले पूर्वज भी व्याकुल रहते हैं। शास्त्रों में वर्णित है कि सतुवाई अमावस्या पर जब कोई वंशज सत्तू और शीतल जल का दान करता है, तो उसका पुण्य सीधे पितरों को मिलता है। सत्तू को 'अक्षय' फल देने वाला माना गया है, जिसका अर्थ है कि इस दिन किया गया दान कभी समाप्त नहीं होता और वह सात पीढ़ियों तक सौभाग्य लेकर आता है।
सतुवाई अमावस्या की पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार एक प्रतापी राजा ने भारी अकाल और गर्मी के समय ऋषियों से पूछा कि पितरों और देवताओं को तृप्त करने का सबसे सरल माध्यम क्या है? तब एक परम ज्ञानी ऋषि ने बताया कि वैशाख मास की अमावस्या के दिन 'सत्तू' का दान करना अत्यंत पुण्यदायी है। ऋषि ने समझाया कि सत्तू न केवल पेट की जठराग्नि को शांत करता है, बल्कि इसे 'अक्षय पात्र' का प्रतीक माना गया है।
कथा के अनुसार, सत्तू को भूनकर बनाया जाता है, जो संघर्ष और शुद्धि का प्रतीक है। जब इसे जल और गुड़ के साथ मिलाकर दान किया जाता है, तो यह पितृ लोक में अमृत के समान प्राप्त होता है। इसी कारण से इस दिन सत्तू का भोग लगाने और दान करने की परंपरा शुरू हुई।
सत्तू दान का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व
क्या कहता है धार्मिक पक्ष: सत्तू को 'अनाज का अर्क' माना गया है। इसे अर्पित करने से भगवान विष्णु और पितृ प्रसन्न होते हैं। वैसाख अमावस्या पर गर्मी चरम पर होती है इस दिन पितरों को शीतलता प्रदान करने के लिए सत्तू दान करना शुभ माना जाता है।
क्या कहता है वैज्ञानिक पक्ष
वैशाख माह (अप्रैल) में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप होता है। सत्तू की तासीर अत्यंत शीतल (Cooling) होती है। यह शरीर को तुरंत हाइड्रेट करता है, लू से बचाता है और पाचन तंत्र को ठंडा रखता है। इसमें फाइबर और प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होता है, जो गर्मी में होने वाली कमजोरी को दूर कर शरीर को ऊर्जा देता है। इसलिए इसे 'देसी हॉर्लिक्स' भी कहा जाता है।
पितृ दोष से मुक्ति के लिए जानें कैसे करें सत्तू का दान?
यदि आपकी कुंडली में पितृ दोष है या परिवार में प्रगति रुकी हुई है, तो सतुवाई अमावस्या पर दान की यह विधि अपनाएं-
सत्तू का घड़ा: मिट्टी के एक नए पात्र में जल भरें और उसके ऊपर एक कटोरी सत्तू, गुड़ और एक दक्षिणा रखें।
संकल्प: हाथ में जल लेकर अपने पितरों का स्मरण करें और उनसे भूल-चूक की क्षमा मांगें।
किसे दान दें: यह कलश और सत्तू किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को दान करें। मान्यता है कि जल से भरे पात्र पर रखा सत्तू पितरों की प्यास और भूख दोनों शांत करता है।
चिड़ियों और मछलियों की सेवा: थोड़े से सत्तू में घी और चीनी मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। इन्हें मछलियों को खिलाएं या सूखी जगह पर चींटियों और चिड़ियों के लिए डाल दें। ऐसा माना जाता है कि अमावस्या पर अनाज का अंश जीव-जंतुओं के पेट में जाने से राहु-केतु और शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। इससे रुका हुआ धन वापस आने के योग बनते हैं और बिगड़े हुए काम बनने लगते हैं।



Click it and Unblock the Notifications