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महाशिवरात्रि : इस वजह से की जाती है इस दिन भगवान शिव के लिंग की पूजा, रोचक तथ्य
महाशिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। इस दिन शिव की आराधना की जाती है। भगवान शिव की पूजा करने से सारे कष्ट दूर हो जाते है, साथ ही सारी मनोकामना पूरी हो जाती है। भगवान शिव को देवों का देव कहा जाता है। इन्हें महादेव भी कहा जाता है। कहते है कि भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों की सारी परेशानी दूर हो जाती हैं। वहीं ये भी कहा जाता है कि अपनी भक्ति से भगवान शिव के आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है। इसिलए महदेव को बोलेनाथ बोला जाता है।
भगवना शिव आदि और अंत के देवता हैं। इनका ना तो कोई स्वरुप है और ना ही आकार है उनके लिंग को उनका निराकार माना जाता है, जबकि उनके साकार रुप को भगवान शंकर मानकर पूजा जाता है, चलिए जानते है कि भगवान शिव के लिंग की पूजा क्यों की जाती है।

क्यों कि जाती है लिंग की पूजा
सारे देवताओं में केवल भगवान शिव ही निराकार रुप में पूजे जाते हैं। निराकार रुप में उनके लिंग की पूजा की जाती है। शिवलिंग ब्रह्मांड की आकृति है। वहीं शिवलिंग भगवान शिव और मां पार्वती का आदि- अनादि रुप है। कहा जाता है कि उनके लिंग के रुप में पूरे ब्रह्मांड की पूजा हो जाती है, क्योंकि भगवान शिव समत जगत के मूल कारण हैं। इसलिए उनकी मूर्ति और लिंग दोनों की पूजा की जाती हैं।
लिंग पूजा का वेदों में मिलता है उल्लेख
लिंग शब्द का प्रयोग वेदों में सूक्ष्म शरीर के लिए आता है। ये सूक्ष्म तत्व 17 तत्वों से मिलकर बना होता है। पांच ज्ञानेन्द्रियां, पांच वायु, मन और बुद्धि शामिल है। वायु पुराण के अनुसार प्रलयकाल में सृष्टि जिसमें लीन हो जाती है और फिर जिससे सृष्टि फिर से प्रकट होती है उसे लिंग कहते है।
शिव पुराण के अनुसार
शिव पुराण में बताया गया है कि शिव संसार की उत्पत्ति का कारण है। शिव पुराण में मिले तथ्य के अनुसार भगवान शिव ही पूर्ण रुप से पुरुष और निराकार हैं। उनके इस प्रतीकात्मक रुप में शिव लिंग की पूजा की जाती है। लिंग में ही समत संसार की शक्ति है।
पौराणिक कथा के अनुसार
वहीं समुद्र मंथन के समय भगवान शिव ने भयंकर विष पी लिया था जिसके बाद उन्हें नीलकण्ठ कहा गया। समुद्र मंथन में ग्रहण किए गए विष की वजह से उनके शरीर का दाह काफी बढ़ गया था, तब से शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा शुरु हुई और आज भी ये पंरपरा चल रही है।



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