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Moon Fact: सबसे पहले भारत ने की थी चांद पर पानी की खोज, Moon से जुड़े ये हैं 10 रोचक फैक्ट्स
Moon Fact : चांद पर पहुंचने के लिए दुनियाभर के देशों में रेस लगी हुई है। हाल ही में हमने चंद्रयान-3 (Chandrayaan 3) की नजरों से चांद की झलक देखी। बीते 14 जुलाई 2023 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से चंद्रयान-3 (Chandrayaan 3) को रवाना किया गया और अब सभी को चंद्रयान-3 की सफल लैंडिग का इंतजार है। लैंडिंग के बाद रोवर लैंप से बाहर निकलेगा और 14 दिनों तक प्रयोग करेगा। चांद पर सफल लैंडिग के बाद भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाए। इससे पहले अमेरिका, सोवियत संघ और चीन के मिशन ही चांद पर सफलतापूर्वक उतरे हैं।
चंद्रमा सौरमंडल का 5वां सबसे विशाल प्राकृतिक उपग्रह है, जो पृथ्वी के सबसे नजदीक है। आइए जानते हैं चंद्रमा से जुड़े ऐसे ही 10 तथ्य जो आपको हैरान कर देंगे।

चांद पर हो जाता है वजन कम
इंसान चंद्रमा पर 20वीं सदी में ही कदम रख चुका है। इसमें भारत का नाम भी शामिल है। वैज्ञानिक अध्ययन में यह सिद्ध हुआ है कि चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति पृथ्वी से कम होती है। सामान्य तौर पर चंद्रमा पर किसी व्यक्ति का वजन 16.5 फीसद कम होता है।
चांद की मिट्टी का रंग नहीं है सफेद
चांद की मिट्टी भले ही सफेद कलर की दिखाई दे, लेकिन चांद की मिट्टी का रंग सफेद नहीं है। ये डार्क ग्रे कलर का है और इसका रंग वाइट, ब्लैक और थोड़ा बहुत ऑरेंज का मिक्स है। बताया जाता है कि यहां की भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से ऐसा है। चांद पर मिट्टी की जगह कुछ चूर्ण जैसा पदार्थ है और वो वहां की जमीन को ढकता है और उसे लूनर रेजोलिथ कहते हैं। वहीं, चांद सिर्फ सूर्य की रोशनी की वजह से चमकता है और ऐसा नहीं है कि इसकी मिट्टी में चमकने जैसा कुछ हो।
चांद और पृथ्वी की दूरी
चांद एवं पृथ्वी के बीच की दूरी लगभग1,38,900 मील (3,84,000 किलोमीटर) तक है। एवं चंद्रमा 2300 मील/घंटे (3700 किलोमीटर/घंटे) की औसत गति से पृथ्वी के चक्कर लगता है। चांद की रोशनी धरती पर 1.3 सेकेंड में पहुंच जाती है। चांद और धरती के बीच की दूरी और प्रकाश की गति के आधार पर यह माना जाता है। धरती से सूर्य की दूरी 14.96 करोड़ किमी है। इसलिए सूर्य की रोशनी को धरती तक आने में 8 मिनट 16.6 सेकंड का समय लगता है।
चांद पर पानी की खोज भारत ने की थी
चांद पर पानी भारत की खोज है। भारत से पहले भी कई वैज्ञानिको का मानना था कि चांद पर पानी होगा परन्तु किसी ने खोजा नहीं था। भारत ने वर्ष 2008 में चंद्रयान मिशन में चांद पर बर्फ़ के रूप में पानी की खोज की जिसकी बाद में NASA ने भी इस बात की पुष्टि की थी।

ग्रह नहीं उपग्रह है चंद्रमा
चंद्रमा ग्रह नहीं बल्कि उपग्रह है, जोकि धरती के चारों ओर चक्कर लगाता है. इतना ही नहीं चंद्रमा धरती का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है। यह सौरमंडल का 5वां विशाल प्राकृतिक उपग्रह है। विज्ञान के अनुसार, करीब 4.5 अरब साल पहले पृथ्वी और थीया (मार्स के आकार का तत्व) के बीच हुए भीषण टकराव के बाद शेष मलबे से बना था।
क्यों दिन में भी नजर आता है चांद
कई बार चांद दिन में नजर आता है। आखिर यह खगोलीय घटना कैसे घटती है। चांद दिन में सूर्य का प्रकाश कम होने की वजह से नजर आता है। इसके बावजूद सूर्य के प्रकाश के परावर्तित होने की वजह से चांद दिन में दिखता है। चांद दिन में ज्यादातर सूरज के उदय और अस्त होने के समय दिखाई देता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, वायुमंडल में गैस के कुछ कण घूमते हैं। इन कणों में नाइट्रोजन और ऑक्सीजन की रोशनी होती है। इनसे छोटी तरंगें भी निकलती हैं, जो नीले और बैंगनी रंग की होती है। यह एक अलग दिशा में प्रकाश को अवशोषित और फिर से उत्सर्जित करती है। ऐसे में आसमान का रंग नीला हो जाता है। इससे सूर्य का प्रकाश कम हो जाता है और दिन में चांद दिखाई देता है।
एक दिन हमेशा के लिए छिप जाएगा चांद
वर्तमान में केवल अमावस्या के दिन चंद्रमा की रोशनी दिखाई नहीं देती। लेकिन एक दिन ऐसा आएगा जब चांद पूरी तरह से छिप जाएगा इसका कारण यह है कि, चंद्रमा हर साल धरती से 3.78 सेंटमीटर दूर होता जा रहा है। ऐसे में एक निश्चित दूरी होने पर चंद्रमा को धरती की परिक्रमा करने में 28 दिन के बजाय 47 दिन का समय लगेगा। आशंका यह भी है कि, अगर चांद ऐसे ही धरती से दूर होता जाएगा तो धरती की गुरुत्वाकर्षण शक्ति और कक्षा से दूर अंतरिक्ष में ही कहीं खो भी सकता है. अगर ऐसा हुआ तो धरती पर दिन केवल 6 घंटे का होगा और अधिक समय अंधेरा ही रहेगा।



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