Latest Updates
-
Gangaur Vrat 2026: 20 या 21 मार्च, किस दिन रखा जाएगा गणगौर व्रत? नोट करें तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त -
घर में लाल चीटियों का दिखना शुभ है या अशुभ? जानें शकुन शास्त्र के ये 5 बड़े संकेत -
गर्दन का कालापन दूर करने के लिए रामबाण हैं ये 5 देसी नुस्खे, आज ही आजमाएं -
आपके 'नन्हे कान्हा' और 'प्यारी राधा' के लिए रंगों जैसे खूबसूरत और ट्रेंडी नाम, अर्थ सहित -
15 या 16 मार्च कब है पापमोचिनी एकादशी? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पारण का समय -
Women's Day 2026: चांद पर कदम, जमीन पर आज भी असुरक्षित है स्त्री; जानें कैसे बदलेगी नारी की किस्मत -
Women’s Day 2026: बचपन के हादसे ने बदली किस्मत, अपनी मेहनत के दम पर मिताली बनीं Supermodel -
Happy Women's Day 2026: महिला दिवस पर 'मां' जैसा प्यार देने वाली बुआ, मौसी और मामी को भेजें ये खास संदेश -
Rang Panchami 2026 Wishes: रंगों की फुहार हो…रंग पंचमी पर प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Women's Day 2026 Wishes for Mother: मेरी पहली 'सुपरवुमन' मेरी मां के नाम खास संदेश, जिसने दुनिया दिखाई
महाराष्ट्र की दीक्षा ने कर दिखाया कमाल, नासा ने फेलोशिप के लिए चुना
महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर में रहने वाली 14 साल की लड़की दीक्षा शिंदे ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसे बड़े-बड़े धुरंधरों के लिए भी करना बेहद मुश्किल होता है। औरंगाबाद की बेटी दीक्षा ने अपनी प्रतिभा से अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा को भी प्रभावित कर दिया है और इसलिए उसका चयन नासा के एमएसआई फैलोशिप वर्चुअल पैनल पर पैनलिस्ट के रूप में किया गया है। तो चलिए जानते हैं दीक्षा ने कैसे हासिल की इतनी कम उम्र में यह सफलता-

बार-बार प्रयासों से मिली सफलता
कहते हैं कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती और यह कथन दीक्षा के लिए एकदम सटीक बैठते हैं। 10वीं कक्षा की छात्र दीक्षा शिंदे ने स्टीफन हॉकिंग की कुछ किताबें पढ़ी थीं और इन किताबों को पढ़ने के बाद दीक्षा ने सितंबर 2020 में भगवान के अस्तित्व पर सवाल शीर्षक से एक निबंध सबमिट किया था, लेकिन इसे खारिज कर दिया गया था। हालांकि, उसने अक्टूबर 2020 में कुछ बदलावों के साथ निबंध को फिर से सबमिट किया। हालांकि, इसे दूसरी बार भी

खारिज कर दिया गया।
ब्लैक होल पर भेजा निबंध
दो बार रिजेक्शन मिलने के बाद भी दीक्षा निराश नहीं हुई। हालांकि, इस बार उन्होंने अपने विषय में कुछ बदलाव किया और दिसंबर 2020 में ब्लैक होल पर एक शोध लेख भेजने का फैसला किया, जिसे नासा ना केवल पसंद किया, बल्कि उसे स्वीकार किया। उनका शोध पत्र 'वी लिव इन ब्लैक होल?' इस साल मई में इंटरनेशनल जर्नल ऑफ साइंटिफिक एंड इंजीनियरिंग रिसर्च द्वारा स्वीकार किया गया था। इसके अलावा, दीक्षा ने इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल सर्च कोलेबोरेशन द्वारा आयोजित एक शोध प्रतियोगिता भी जीती।

जून में हुआ सलेक्शन
इस साल जून में दीक्षा शिंदे को नासा के 2021 एमएसआई फैलोशिप वर्चुअल पैनल के लिए पैनलिस्ट के रूप में चुना गया था। बता दें कि दीक्षा के काम में शोधकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों की समीक्षा करना होगा। साथ ही वह प्रस्तावित रिसर्च एरिया और छात्रों के अकादमिक अनुशासन के बीच संबंध को भी समझकर उसका वर्णन करेंगी।

मिलेगा भुगतान
दीक्षा शिंदे के अनुसार, वह हर दूसरे दिन शोध चर्चा में शामिल होती हैं। वह अल्टनेट दिनों में 1 बजे से 4 बजे के बीच काम करेगी। उसे पैनलिस्ट की नौकरी के लिए भुगतान किया जाएगा। इतना ही नहीं, दीक्षा शिंदे अक्टूबर में एक सम्मेलन में भाग लेंगी और नासा उसका सारा खर्च वहन करेगी।
माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं
जहां एक ओर दीक्षा की इस उपलब्धि की चारों ओर जमकर तारीफ हो रही है। वहीं दूसरी ओर, उनके माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं है। बता दें कि उनके पिता, कृष्णा शिंदे, एक स्कूल में प्रधानाध्यापक हैं और उनकी मां रंजना शिंदे ट्यूशन कक्षाएं लेती हैं।



Click it and Unblock the Notifications











