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World IVF Day: पहली बार में आईवीएफ को बनाना है सफल, तो अपनाएं डॉक्टर के बताए ये 6 टिप्स
Tips To Make Ivf Successful: माता-पिता बनना हर दंपति के लिए एक खूबसूरत सपना होता है। लेकिन कई कपल्स के लिए यह सफर आसान नहीं होता। आज के समय में महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों में भी बांझपन (इन्फर्टिलिटी) की समस्या बढ़ रही है। भारत में लाखों दंपति ऐसे हैं, जिन्हें प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण करने में परेशानी होती है। कंसीव करने में परेशानी का सामना कर रहे कपल्स के लिए आईवीएफ तकनीक वरदान साबित हो सकती है। आईवीएफ के प्रति लोगों के बीच जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल 25 जुलाई को विश्व आईवीएफ दिवस (World IVF Day) मनाया जाता है। आइए, इस खास मौके पर जानते हैं आईवीएफ प्रक्रिया को सफल बनाने के टिप्स -

आईवीएफ क्या है?
आईवीएफ यानी इन विर्टाे फर्टिलाइजेशन एक ऐसी तकनीक है, जिसकी मदद से संतान सुख से वंचित महिलाओं काे मां बनने का सुख प्राप्त हाेता है। जो महिलाऐं प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण करने में समर्थ नहीं हैं, वे आईवीएफ ट्रीटमेंट की मदद से प्रेग्नेंट हो सकती हैं। आईवीएफ प्रोसेस में महिला के शरीर से अंडों को बाहर निकाला जाता है। फिर इन्हें लैब में शुक्राणु से मिलाकर एम्ब्रयो बनाए जाते हैं। इसके बाद डॉक्टर एम्ब्रयो को महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर करते हैं। इसके बाद अंडों का फर्टिलाइजेशन शुरू होता है। इस तरह एक महिला गर्भधारण कर पाती है।
आईवीएफ को लेकर अब भी हैं कई गलतफहमियां
मिलान फर्टिलिटी एंड बर्थिंग हॉस्पिटल्स की डायरेक्टर अंजलि अजयकुमार का कहना है कि हालांकि अब पहले की तुलना में लोग आईवीएफ के बारे में ज्यादा जानते हैं, लेकिन आज भी कई परिवारों में इस विषय पर खुलकर बात नहीं की जाती। कई लोग इसे शर्म या सामाजिक दबाव से जोड़कर देखते हैं। यही वजह है कि कई दंपति समय पर इलाज नहीं करा पाते और मानसिक तनाव का सामना करते हैं। ऐसे में, सबसे ज्यादा जरूरत इस बात की है कि आईवीएफ और फर्टिलिटी ट्रीटमेंट को सामान्य चिकित्सा की तरह देखा जाए, न कि किसी छिपाने वाली बात की तरह। फर्टिलिटी का इलाज सिर्फ दवाइयों और मेडिकल प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसा सफर है, जिसमें मरीज को मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक सहयोग की भी जरूरत होती है। डॉक्टरों को इलाज के साथ-साथ मरीज की परेशानियों, डर और उम्मीदों को भी समझना चाहिए। जब मरीज को सही जानकारी और भरोसा मिलता है, तो इलाज का अनुभव बेहतर बनता है।
महिलाओं और पुरुषों, दोनों की जांच जरूरी
अंजलि अजयकुमार के मुताबिक, अक्सर समाज में बांझपन के लिए महिलाओं को जिम्मेदार ठहराया जाता है, जबकि ऐसा बिल्कुल सही नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, कई मामलों में पुरुषों से जुड़ी समस्याएं भी इसकी वजह होती हैं। इसलिए जरूरी है कि फर्टिलिटी से जुड़ी जांच और इलाज में महिलाओं और पुरुषों दोनों को समान महत्व दिया जाए।
प्रजनन स्वास्थ्य पर खुलकर बात करना है जरूरी
प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाना समय की जरूरत है। लोगों को कम उम्र से ही इसकी सही जानकारी मिलनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी समस्या होने पर वे बिना झिझक डॉक्टर से सलाह ले सकें। जब समाज में इस विषय पर खुलकर बातचीत होगी, तभी इससे जुड़ा डर और गलत धारणाएं खत्म होंगी।

आईवीएफ को सफल कैसे बनाएं?
डॉ. स्मृति आनंद, फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट, नोवा IVF फर्टिलिटी, अमृतसर, पंजाब के मुताबिक, आईवीएफ प्रोसेस के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखकर कपल्स सफलता दर को बढ़ा सकते हैं -
सही फर्टिलिटी क्लीनिक चुनें
अनुभवी डॉक्टर, प्रमाणित लैब, और अच्छा सफलता रिकॉर्ड देखकर ही अपना फर्टिलिटी क्लीनिक चुनें।
संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं
अपने आहार में फलों, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करें। अपने वजन को नियंत्रित करें और सही बीएमआई बनाए रखें। हल्की कसरत जैसे योग या चलना फायदेमंद होता है।
तनाव से दूर रहें
मेडिटेशन, डीप ब्रीदिंग या काउंसलिंग से तनाव को कम करें।
पर्याप्त नींद लें
रोजाना 7-8 घंटे की नींद हार्मोन संतुलन में मदद करती है।
समय पर दवा लें
डॉक्टर द्वारा बताई गई सभी दवाओं और इंजेक्शन को समय पर जरूर लें। एम्ब्रयो ट्रांसफर के बाद किसी भी दवा को शुरू या बंद करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
धूम्रपान और शराब से परहेज करें
आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान शराब, धूम्रपान, नशे की चीजें और बहुत ज्यादा कैफीन से बचें। इससे आपकी फर्टिलिटी पर बुरा असर पड़ सकता है कुछ मामलों में मिसकैरेज भी हो सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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