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देखिये दुर्गा पूजा की बेहतरीन तस्वीरे
नवरात्री का त्योहार नौ दिनों के लिये चलता है। इन दिनों तीन देवियों, पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ स्वरूपों की पूजा होती है। दुर्गापूजा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है जो कि पूरे भारतवर्ष में बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जाता है। संयोग से दुर्गा पूजा पर्व की ऐतिहासिकता बंगाल से ही जुड़ी है। आज पूरा देश इसे धूमधाम से मनाता है। अगर आपने बंगाल की दुर्गापूजा देखा हो तो यह काफी लाजवाब होता है। बंगाल का यह सबसे बडा़ त्योहार माना जाता है। सुबह-सुबह आप यहां दुर्गा पंडाल में महिलाओं को लाल पाड़ की साड़ी पहने पूजा करते हुए देख सकते हैं।
बंगाल में दुर्गा पूजा को दुर्गोत्सव, दुगो पूजो, अकालबोधन, महा पूजो आदि नाम से जाना जाता है। नाम भले ही चाहे कुछ भी हो लेकिन इस त्योहार का मजा एक समान होता है। यहां पर दुगा पूजा मनाने का सिलसिला महीनों पहले शुरु हो जाता है। यहां के कलाकार दुर्गा जी की मूर्तियों को गणेश चतुर्थी के समाप्त हो जाने पर शुरु करते हैं। कोलकाता में अकेले ही 2000 से अधिक पंडाल लगते हैं तथा सड़के टिमटिमाती हई लाइटों और झालरों से भर जाती हैं। इन पंडालों में दुर्गा जी कि मनमोहक और विशाल मूर्तियां स्थापित की जाती हैं, जिसे देखने के लिये लोग दूर-दूर से आते हैं। हर पांडाल व मूर्ति की अपनी विशेषता है।
नवमी के दिन सुबह एक छोटी लड़की को साड़ी पहना कर सजाकर उसकी पूजा की जाती है जिसे ‘कुमारी पूजा' कहते हैं। दुर्गा पूजा सिर्फ़ मूर्ती की पूजा नहीं, बल्कि स्त्री की ताक़त, सामर्थ्य और उसके स्वाभिमान की एक सार्वजनिक 'पूजा' है। जैसा की दुर्गा पूजा की शुरुआत हो चुकी है, तो हमने सोचा की क्यों ना आपको दुर्गा मां की सुंदर और अद्भुत मूर्तियों के दर्शन करवा दें।

चांदी से सजी मां
मां दुर्गा को सोल्हा साज में सजाया गया है। इनकी यह मूर्ती सचमुच में बहुत ही अदभुत लग रही है।

चमकीली लाल सुंदरी
एक पूजा पंडाल में मां दुर्गा को पोतेर ठाकुर के रूप में दशार्या गया है। इसके अलावा गणेश, सरसवती और लक्षमी, कार्तिक की अन्य मूर्तियां भी हैं।

बंगाली अवतार
इस मूर्ती में मां दुर्गा ने बंगाली साड़ी जो कि लाल और सफेद बार्डर में है, पहन रखी है। लंबे बाल, क्रोध से भरी हुई आंखे और 10 हथियार लिये हुए माता जी महिसासुर का वध कर रही हैं।

गोल्डन ब्यूटी
यह मूर्ती आंखों को तुरंत खींचती हैं। कोलकाता के एक पंडाल में मां दर्गा को गोल्डन पेन्ट से रंगा गया है इसलिये यह धातु की लग रही हैं।

सोला साज में मां
मां की मूर्ती को चांदी के आभूषणों से सजाया गया है।

योद्धा के रूप में मां दुर्गा
इस मूर्ती में मां को एक शक्ती के रूप में दर्शाया गया है जो कि महिशासुर का वध करने के बाद खडी़ हुई हैं।



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