दीपावली पर कैसे करें लक्ष्‍मी-गणेश पूजन

दीवाली आने में ज्‍यादा दिन नहीं बचे हैं। हमारा मानना है कि अब तक हर किसी ने दीवाली को धूम-धाम से मनाने की पूरी तैयारी भी कर ली होगी। तो अब बस बची है तो लक्ष्‍मी-गणेश जी की पूजा, जो कि दीवाली की रात को ही करनी होगी। पूरे भारवतर्ष में हम पूरी परम्परा व श्रद्धा के साथ दीपावली का पूजन करते हैं। दीपावली पर माँ लक्ष्मी व गणेश के साथ सरस्वती माता की भी पूजा की जाती है। माना जाता है कि धन और रिद्धी-सिद्धी के साथ ज्ञान भी पूजनीय है, इसलिये सरस्‍वती भी पूजी जाती हैं।

माना जाता है कि दीवाली की रात को मां लक्ष्‍मी हर घर में आती हैं और परिवार वालों को धन व सिद्धि का आर्शिवाद दे कर जाती हैं। तो अगर आप भी मां लक्ष्‍मी और भगवान गणेश को पूरी तरह से खुश करना चाहते हैं, तो चलिये हम आपकी मदद करते हैं पूजा करने में। आइये देखते हैं पूजा करने के लिये आपको किन-किन सामग्रियों की आवश्‍यकता पडे़गी और पूजा को ठीक विधि से कैसे किया जाएगा।

पूजा करने के लिये आवश्‍यक सामग्री

पूजा करने के लिये आवश्‍यक सामग्री

रोली, चावल, पान, सुपारी, फल, फूल, दूध, खील, बताशे, सिंदूर, सूखे, मेवे, मिठाई, दही, गंगाजल, धूप, अगरबत्ती, दीपक, रूई तथा कलावा नारियल और तांबे का कलश, लक्ष्‍मी-गणेश मूर्ती आद‍ि चाहिये।

पूजा करने की व‍िधि-

पूजा करने की व‍िधि-

सबसे पहले पूजा घर को अच्‍छी प्रकार से साफ करें क्‍योंकि मां लक्ष्‍मी केवल साफ-सुथरे घर में ही पधारती हैं। फिर पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें।

पूजा करने की व‍िधि-

पूजा करने की व‍िधि-

घर में एक जगह पसंद कर लें , जहां पर पूजा की जानी है। उसके बाद वहां पर चौखट लगा कर उस पर लाल रंग का साफ कपड़ा बिछा दें। अब उस पर कलश रखें। इसके साथ ही तांबे के कलश में गंगाजल, दूध, दही, शहद, सुपारी, सिक्के और लौंग आदि डालकर उसे लाल कपड़े से ढककर एक कच्चा नारियल कलावे से बांध कर रख दें। जहां पर नवग्रह यंत्र बनाया है वहां पर रुपया, सोना या चांदी का सिक्का आदि रखें। अब लक्ष्मी-गणेश और सरस्वती जी की मूर्तियां सजाएं। गणेश जी की मूर्ती को दाईं ओर और लक्ष्‍मी जी की मूर्ती को बाईं ओर रखें।

पूजा करने की व‍िधि-

पूजा करने की व‍िधि-

अब पूजा शुरु कीजिये, मूर्तियों को हल्‍दी और कुमकुम लगाइये। फिर एक दीपक जलाइये और लक्ष्‍मी-गणेश की मूर्ती के किनारे अपने जरुरी बही-खाते तथा किताबे आदि रख दीजिये।

पूजा करने की व‍िधि-

पूजा करने की व‍िधि-

एक प्‍लेट में हल्‍दी, कुमकुम, लाई और चावल को रखें। कलशर पर हल्‍दी, कुमकुम और चावल लगाइये। फिर मूर्तियों को फूल चढ़ाइये। इसके बाद हाथ में फूल और चावल ले कर यह मंत्र बोलिये:

वक्रतुंड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ |

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ||

नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।

शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्षि्म नमोस्तु ते ॥

पूजा करने की व‍िधि-

पूजा करने की व‍िधि-

मंत्र बोलने के बाद थोड़ी देर के लिये ध्‍यान करें और फिर मूर्तियों पर फूल तथा चावल चढ़ाएं। लक्ष्‍मी-गणेश की मूर्ती को एक साफ प्‍लेट पर रखें, उन्‍हें पानी से नहलाएं। दूसरी ओर शहद, दही, दूध और घी का मिश्रण तैयार करें। इस मिश्रण से मूर्तियों को नहलाएं और फिर दुबारा मूर्तियों को साफ पानी से धोएं। कपडे़ से पोछ कर उन्‍हें दुबारा उसी जगह पर रखें।

पूजा करने की व‍िधि-

पूजा करने की व‍िधि-

अब मूर्तियों पर माला चढाएं। हल्‍दी और कुमकुम लगाएं। मिठाई चढाएं और आर्ती करें। आरती करके शीतलीकरण हेतु जल छोड़ें एवं स्वयं आरती लें, पूजा में सम्मिलित सभी लोगों को आरती दें फिर हाथ धो लें।

Story first published: Thursday, October 31, 2013, 12:38 [IST]
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