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भारतीय महिलायें क्यों पहनती हैं बिछिया ?
ज्यादातर विवाहित भारतीय महिलायें बिछिया पहनती हैं। यह केवल इस बात का प्रतीक नहीं है कि वे विवाहित हैं बल्कि इसके पीछे विज्ञान छिपा है। भारतीय वेदों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि इन्हें दोनों पैरों में पहनने से महिलाओं का मासिक चक्र नियमित होता है। इससे विवाहित महिलाओं में गर्भधारण में भी आसानी होती है।
ऐसा कहा जाता है कि पैर की दूसरी अंगुली की तन्त्रिका का सम्बन्ध गर्भाशय से होता है और यह हृदय से होकर गुजरती है। अगर आप ध्यान दें तो पायेंगें कि बिछिया हमेशा दाहिने तथा बायें पैर की दूसरी अंगुली में ही पहनी जाती है। यह गर्भाशय को नियन्त्रित करेगी और गर्भाशय में सन्तुलित रक्तचाप द्वारा उसे स्वस्थ रखेगी।

चूँकि चाँदी एक अच्छी सुचालक है अतः यह पृथ्वी की ध्रुवीय ऊर्जा को अवशोषित करके शरीर तक पहुँचाती है जिससे पूरा शरीर तरो-ताजा हो जाता है। भारतीय महाकाव्य रामायण में बिछिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। जब रावण ने सीता का अपहरण कर लिया था तो उन्होंने अपनी बिछिया (कनियाझी) को भगवान राम की पहचान के लिये फेंक दिया था।
यह दर्शाता है कि बिछिया का उपयोग प्राचीन काल से ही होता रहा है। भारत से लौटने के बाद मारजोरी बोरेल ने अमरीका में बिछिया की शुरुआत की और 1973 में उन्होंने ही इसका उत्पादन और बिक्री शुरू की। उनकी पहली खुदरा दुकान न्यूयार्क में 59वीं सड़क पर स्थित फियोरुकी नामक फैशन की दुकान थी।



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