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6 देश जहां है सरकार देती है अपनी इच्छा से मरने का अधिकार, क्या भारत में भी है इच्छा मृत्यु की परमीशन
Right To Die Law: इच्छा मृत्यु यानी यूथेनेसिया (Euthanasia) को लेकर दुनिया भर में बहस होती रही है। हाल ही में सुप्रीमकोर्ट ने ब्रेनडेथ से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई की, जिसमें दावा किया गया है कि किसी व्यक्ति को उसके अंग प्राप्त करने के लिए ब्रेन डेड घोषित कर दिया जाता है, जबकि वह मरा नहीं होता है। ऐसे में एक बार फिर से इच्छा मृत्यु का मामला चर्चा का विषय बन गया है। क्या आपको पता है कि कई देशों में इसे मानव का मौलिक अधिकार माना गया है? जबकि कुछ देशों में अभी भी इसे अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
आज इसी विषय पर बात करते हैं कि आखिर क्या होती है इच्छा मृत्यु और ये किसे क्यों दी जाती है? साथ ही ये भी कि वो कौन से देश हैं जहां इच्छा मृत्यु की परमीशन है जिसमें एक भारत का राज्य भी शामिल है।
क्या होती है इच्छा मृत्यु?
क्या आपने कभी इच्छा मृत्यु (Euthanasia) के बारे में सुना है? इसका मतलब है जब कोई व्यक्ति असाध्य बीमारी, असहनीय दर्द या जीवन की कठिन परिस्थितियों से जूझ रहा हो और स्वेच्छा से अपने जीवन का अंत करने का अधिकार मांगता है। इसे अंग्रेजी में Euthanasia कहा जाता है। दुनिया के कई देशों में इसे मानव का मौलिक अधिकार माना गया है, जबकि कुछ देशों में अभी भी यह गैरकानूनी है। भारत में भी इस पर लंबे समय से बहस चल रही है और सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में Passive Euthanasia को सशर्त मंजूरी दी थी।

इच्छा मृत्यु के कितने प्रकार होते हैं
अब ये भी जान लेते हैं कि इच्छा मृत्यु के कितने प्रकार होते हैं। दरअसल, इसके दो प्रकार होते हैं एक एक्टिव इच्छा मृत्यु (Active Euthanasia) और दूसरा पैसिव इच्छा मृत्यु (Passive Euthanasia)।
एक्टिव इच्छा मृत्यु (Active Euthanasia)
इसमें डॉक्टर या कोई तीसरा व्यक्ति मरीज के जीवन को खत्म करने के लिए सीधे कदम उठाता है, जैसे दवा का ज्यादा डोज देना या इंजेक्शन देना। इसे कई देशों में अनुमति मिली है, लेकिन भारत में यह अभी भी गैरकानूनी है।
पैसिव इच्छा मृत्यु (Passive Euthanasia)
इसमें मरीज को कृत्रिम जीवन-रक्षक साधनों (जैसे वेंटिलेटर, फीडिंग ट्यूब आदि) से हटाया जाता है ताकि प्राकृतिक रूप से उसकी मृत्यु हो सके। भारत में 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे सशर्त मंजूरी दी है।
किन देशों में है इच्छा मृत्यु का अधिकार
1. नीदरलैंड (Netherlands)
नीदरलैंड दुनिया का पहला देश है जिसने 2002 में Euthanasia को कानूनी मान्यता दी। यहां डॉक्टर मरीज की सहमति से उसकी पीड़ा खत्म करने के लिए इच्छा मृत्यु दे सकते हैं।
2. बेल्जियम (Belgium)
बेल्जियम ने भी 2002 में कानून पास किया। यहां तक कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे नाबालिग बच्चों को भी, सख्त शर्तों के साथ, इच्छा मृत्यु का अधिकार दिया गया है।
3. कनाडा (Canada)
कनाडा में 2016 से Medical Assistance in Dying (MAiD) कानून लागू है। इसमें मरीज को असहनीय दर्द से मुक्ति पाने के लिए डॉक्टर की मदद से इच्छा मृत्यु की अनुमति मिलती है।
4. न्यूजीलैंड (New Zealand)
2019 में हुए जनमत संग्रह के बाद न्यूजीलैंड में Euthanasia कानून पास हुआ। असहनीय और लाइलाज बीमारी से जूझ रहे मरीज को कानूनी रूप से अपनी इच्छा से जीवन समाप्त करने का अधिकार है।
5. कोलंबिया (Colombia)
कोलंबिया पहला ऐसा लैटिन अमेरिका देश है जहां सुसाइड को अपराध के दायरे से मुक्त किया गया। इस कानून के तहत गंभीर बीमारी से लड़ रहे लोग जिनका इलाज संभव नहीं है वो इच्छा मृत्यु का अधिकार रखते हैं।
6. स्विट्जरलैंड (Switzerland)
बता दे कि स्विट्जरलैंड में भी इच्छा मृत्यु का अधिकार है। यहां लाइलाज बीमारी के शिकार लोगों को जहरीला इंजेक्शन दिया जाता है। सरकारन की ओर से इसकी अनुमति है।



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