Latest Updates
-
Mother Day 2026: सलाम है इस मां के जज्बे को! पार्किंसंस के बावजूद रोज 100 लोगों को कराती हैं भोजन -
Aaj Ka Rashifal 08 May 2026: शुक्रवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा, जानें अपना भाग्यशाली अंक और रंग -
Mother’s Day 2026: इस मदर्स डे मां को दें स्टाइल और खूबसूरती का तोहफा, ये ट्रेंडी साड़ियां जीत लेंगी उनका दिल -
World Ovarian Cancer Day 2026: ओवेरियन कैंसर से बचने के लिए महिलाएं करें ये काम, डॉक्टर ने बताए बचाव के तरीके -
World Ovarian Cancer Day 2026: ओवेरियन कैंसर होने पर शरीर में दिखाई देते हैं ये 5 लक्षण, तुरंत करवाएं जांच -
World Thalassemia Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व थैलेसीमिया दिवस? जानें इसका महत्व और इस साल की थीम -
Mother's Day 2026: डिलीवरी के बाद हर महिला को करने चाहिए ये योगासन, जल्दी रिकवरी में मिलेगी मदद -
Mother's Day 2026: मदर्स डे पर मां को दें सेहत का तोहफा, 50 के बाद जरूर करवाएं उनके ये 5 जरूरी टेस्ट -
Mother’s Day Special: बेटे की जिद्द ने 70 साल की उम्र में मां को दी हिम्मत, वायरल हैं Weightlifter Mummy -
कौन हैं अरुणाचलम मुरुगनाथम? जिन्हें नोबेल शांति पुरस्कार 2026 के लिए किया गया नॉमिनेट
OMG: बांग्लादेश के इस गांव में ये कैसा रिवाज! बाप अपनी बेटी से ही कर लेता है विवाह
Unique Marriage Tradition of Bangladesh: दुनियाभर में विभिन्न जनजातियां अपनी अनोखी और प्राचीन परंपराओं के लिए जानी जाती हैं। इनमें से कुछ परंपराएं बेहद अजीब और हैरान करने वाली होती हैं। ऐसी ही एक परंपरा बांग्लादेश की मंडी जनजाति में प्रचलित है, जो दुनिया से कटे हुए माधोपुर जंगलों में रहती है।
मंडी जनजाति की यह प्रथा सुनने में चौंकाने वाली और कुप्रथा जैसी लगती है, लेकिन इसे यहां लंबे समय से निभाया जा रहा है। इस परंपरा के अनुसार, यदि कोई महिला कम उम्र में विधवा हो जाती है और उसकी पहली शादी से एक बेटी है, तो वह पुरुष जो उससे दोबारा शादी करता है, बाद में उसी महिला की बेटी से भी विवाह करता है।

कैसे होती है इस परंपरा की शुरुआत?
यहां की प्रथा के अनुसार, जब एक विधवा महिला दोबारा विवाह करती है, तो शादी से पहले यह तय किया जाता है कि उस महिला की पहली शादी से हुई बेटी बड़े होकर उस व्यक्ति की पत्नी बनेगी। यह परंपरा "बेटी का बलिदान" नाम से जानी जाती है।
हालांकि, इसमें सगा पिता शामिल नहीं होता; केवल सौतेला पिता ही इस प्रथा का हिस्सा बनता है। इस रिवाज को निभाने का तर्क यह दिया जाता है कि इससे महिला और उसकी बेटी दोनों की "सुरक्षा" सुनिश्चित होती है।
महिला सशक्तिकरण या प्रथा का विरोध?
आश्चर्यजनक रूप से, इस जनजाति में महिलाओं का महत्वपूर्ण स्थान है, और कई बार वे खुद इस परंपरा को बढ़ावा देती हैं। वे अपने दूसरे पति से अपनी बेटी के साथ विवाह करवाने के लिए सहमति देती हैं।
प्रथा के ख़िलाफ़ बदलता दौर
हालांकि, मॉर्डन समय में इस परंपरा को लेकर बदलाव हो रहा है।
- नई पीढ़ी का विरोध: नई पीढ़ी की लड़कियां इस प्रथा को अस्वीकार कर रही हैं।
- शहरों की ओर रुख: कई लड़कियां इस परंपरा से बचने के लिए ढाका जैसे बड़े शहरों में पलायन कर रही हैं, जहां वे मेड, ब्यूटीशियन या अन्य काम करके अपना जीवन संवारने की कोशिश कर रही हैं।
प्रथा के दुष्प्रभाव
यह प्रथा कई लड़कियों का जीवन बर्बाद कर चुकी है। कम उम्र में शादी, शोषण, और शिक्षा से वंचित होना इनके जीवन में बड़ी समस्याएं पैदा करता है। हालांकि, यह जनजाति धीरे-धीरे इस प्रथा को खत्म करने की ओर बढ़ रही है।
मंडी जनजाति की यह प्रथा एक ओर अजीब और चौंकाने वाली है, तो दूसरी ओर इसमें बदलाव की उम्मीद भी नजर आती है। नई पीढ़ी की लड़कियां इस परंपरा को चुनौती दे रही हैं और अपने लिए नई राहें तलाश रही हैं। शायद, समय के साथ यह परंपरा पूरी तरह समाप्त हो जाए और इस जनजाति की लड़कियां एक बेहतर और स्वतंत्र जीवन जी सकें।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications