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दहेज के 87% मामलों के साथ बेंगलुरु बना नंबर-1; जानें Dowry Case में कितनी सजा और जुर्माने का है प्रावधान
Dowry cases in Bangalore 2026: भारत की 'सिलिकॉन वैली' और आईटी हब के रूप में पहचाना जाने वाला बेंगलुरु आज एक डरावने सामाजिक सच का केंद्र बन गया है। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (NCRB) की 'क्राइम इन इंडिया' रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं, जिसके अनुसार दहेज संबंधी अपराधों के मामले में बेंगलुरु देश के सभी महानगरों की सूची में शीर्ष पर पहुंच गया है। हैरानी की बात यह है कि देश के कुल महानगरीय दहेज मामलों का 87% हिस्सा अकेले बेंगलुरु से सामने आया है। यह डेटा न केवल शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि आधुनिक और शिक्षित समाज के भीतर गहरी दबी हुई दहेज की कुप्रथा को भी उजागर करता है। आइए जानते हैं क्या कहते हैं एनसीआरबी के आंकड़े और भारत में दहेज के खिलाफ क्या हैं सख्त कानूनी प्रावधान।

एनसीआरबी रिपोर्ट: बेंगलुरु बनाम अन्य महानगर
NCRB की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, महानगरों में दर्ज दहेज निषेध अधिनियम के कुल 1,008 मामलों में से 878 मामले अकेले बेंगलुरु में दर्ज किए गए। दूसरे स्थान पर रहे लखनऊ में केवल 48 मामले आए, जो बेंगलुरु की तुलना में बेहद कम हैं। बेंगलुरु में 2024 के दौरान दहेज के कारण 25 महिलाओं की मौत दर्ज की गई। हालांकि यह संख्या दिल्ली (109) से कम है, लेकिन दक्षिण भारत के अन्य प्रमुख शहरों जैसे चेन्नई और कोच्चि के मुकाबले काफी चिंताजनक है।
दहेज निषेध अधिनियम 1961: क्या कहता है कानून?
भारत में दहेज लेना, देना या इसके लिए उकसाना एक गंभीर अपराध है। इसके लिए 'दहेज निषेध अधिनियम, 1961' के तहत कड़े प्रावधान किए गए हैं जिनके बारे में नीचे बताया गया है।
दहेज लेना या देना: यदि कोई व्यक्ति दहेज लेता या देता है, तो उसे न्यूनतम 5 वर्ष के कारावास और कम से कम ₹15,000 या दहेज की राशि (जो भी अधिक हो) के जुर्माने की सजा हो सकती है।
दहेज की मांग करना: प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दहेज की मांग करने पर 6 महीने से 2 साल तक की जेल और ₹10,000 तक का जुर्माना हो सकता है।
दहेज मृत्यु (IPC Section 304B): यदि शादी के 7 साल के भीतर किसी महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में जलने या चोट के कारण मृत्यु होती है और यह सिद्ध हो जाता है कि उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया था, तो आरोपी को 7 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।
प्रताड़ित करने पर है सजा का प्रावधान: भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A के तहत, यदि पति या उसके रिश्तेदार महिला के साथ दहेज के लिए शारीरिक या मानसिक क्रूरता करते हैं, तो उन्हें 3 साल तक की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है। यह कानून महिलाओं को घर के भीतर होने वाले उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करता है।
पीड़ित महिलाएं कहां और कैसे करें शिकायत?
बेंगलुरु जैसे शहरों में बढ़ते अपराधों के बीच, महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना जरूरी है:
महिला हेल्पलाइन: किसी भी आपात स्थिति में 1091 या 100/112 नंबर पर कॉल करें।
स्थानीय पुलिस: नजदीकी थाने में जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराएं या 'वीमेन प्रोटेक्शन सेल' की मदद लें।
ऑनलाइन पोर्टल: राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की वेबसाइट पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।



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