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8 की उम्र में खोई रोशनी, अब माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली भारत की पहली नेत्रहीन महिला बनीं छोंजिन अंगमो
India's First Blind Woman on Everest : हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले की रहने वाली छोंज़िन आंग्मो ने वह इतिहास रच दिया है जो लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है। वह माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाली भारत की पहली और दुनिया की पांचवीं नेत्रहीन महिला बन गई हैं। इस अद्वितीय उपलब्धि के साथ उन्होंने साबित किया कि सच्ची लगन और मेहनत से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है।
आठ साल की उम्र में अपनी आंखों की रोशनी खोने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। आज उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराया है। आंग्मो का जन्म भारत-तिब्बत सीमा के पास चांगो गांव में हुआ था। दृष्टिहीन होने के बावजूद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस से स्नातक और परास्नातक की डिग्री प्राप्त की।

वर्तमान में वह यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में दिल्ली स्थित ब्रांच में ग्राहक सेवा सहयोगी के रूप में कार्यरत हैं। वह हमेशा से पर्वतारोहण को लेकर उत्साहित थीं, लेकिन आर्थिक चुनौतियों ने उनके सपने को कठिन बना दिया। बावजूद इसके, उन्होंने कभी हार नहीं मानी। वह हेलेन केलर को अपनी प्रेरणा मानती हैं और 'दृष्टिहीन होना जीवन की विफलता नहीं है, बल्कि दृष्टिकोण का अभाव असली कमी है' इस विचार में गहरी आस्था रखती हैं।
2016 में किया माउंटेनियरिंग कोर्स
पर्वतारोहण के लिए उन्होंने 2016 में अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग से बेसिक कोर्स किया और उन्हें सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु घोषित किया गया। उन्होंने अक्टूबर 2024 में एवरेस्ट बेस कैंप (5,364 मीटर) तक ट्रेकिंग कर भारत की पहली नेत्रहीन महिला ट्रेकर होने का कीर्तिमान भी हासिल किया था। इसके अलावा, उन्होंने लद्दाख की माउंट कांग यात्से 2 (6,250 मीटर) चोटी और एक अज्ञात शिखर पर भी चढ़ाई की है। वह दिव्यांगों के अभियान दल का हिस्सा रही हैं और दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर पर चढ़ने वाली पहली और एकमात्र महिला दिव्यांग पर्वतारोही हैं। इस अभियान ने विश्व रिकॉर्ड भी बनाया था।
खेलों के क्षेत्र में भी आंग्मो पीछे नहीं रहीं। उन्होंने राज्य स्तर पर तैराकी में स्वर्ण पदक जीता है, राष्ट्रीय जूडो प्रतियोगिता में भाग लिया और राष्ट्रीय स्तर की मैराथन में दो कांस्य पदक भी प्राप्त किए हैं। दिल्ली मैराथन, पिंक मैराथन और वेदांता मैराथन में उन्होंने तीन बार भाग लिया। वह फुटबॉल में भी ज़ोनल और राष्ट्रीय स्तर पर हिस्सा ले चुकी हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी की तारीफ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में उनकी सराहना की थी। उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से 'सर्वश्रेष्ठ दिव्यांगजन राष्ट्रीय पुरस्कार' मिला है। इसके अलावा, वह एनएबी मधु शर्मा यंग अचीवर अवार्ड, अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पुरस्कार और कैविनकेयर एबिलिटी मास्टरी अवार्ड से भी सम्मानित हो चुकी हैं।
आंग्मो का मानना है कि यह तो सिर्फ शुरुआत है। वह अन्य चोटियों को भी फतह करना चाहती हैं और दुनिया को यह दिखाना चाहती हैं कि अंधकार चाहे जितना गहरा हो, सपनों की रौशनी सब कुछ पार कर सकती है।



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