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CLOUD BURST: केदारनाथ में बादल फटने से 250 से ज्यादा लोग फंसे, जानें कब फटते हैं बादल, ऐसे में क्या करें?
What is cloud burst : अभी तक पूरा देश वायनाड के भूस्खलन वाली त्रासदी से उबर ही नहीं पाया था कि अब देशभर से अलग-अलग जगह से बादल फटने की घटना सुनने को मिल रही हैं। हिमाचल प्रदेश में बादल फटने की वजह से 5 लोग मारे जा चुके हैं और 50 लोग लापता हैं। वहीं उत्तराखंड में 14 लोग मर गए और केदारनाथ धाम में बादल फटने से 250 से ज्यादा लोग फंसे हुए हैं।
जिन्हें निकालने के लिए रेस्क्यू मिशन चलाया जा रहा है। उत्तराखंड के 7 जिलों के लिए मौसम विभाग ने भारी बारिश का अलर्ट जारी किया था। आइए जानते हैं आखिर बादल फटना क्या होता हैं? ये कब और कैसे होता है साथ इससे बचने का तरीका क्या है?

क्या है बादल फटना
मौसम विज्ञान के मुताबिक अगर कहीं अचानक से किसी एक जगह पर 20-30 वर्ग किलोमीटर दायरे में 1 घंटे में 100 मिलीमीटर (100 MM) बारिश (Rain) होती है, तो उसे बादल फटना कहते हैं। वैज्ञानिक टर्म में इसे क्लाउटबर्स्ट (cloud burst) या फ्लैशफ्लड भी कहते हैं। ये ठीक उसी तरह है जैसे पानी का गुब्बारा कहीं पर फोड़ दिया जाए तो अचानक से सारा पानी एक जगह गिर जाता है।
कैसे फटते हैं बादल?
पानी से लबालब बादल को प्रेग्नेंट क्लाउड भी कहा जाता है। जैसे ही एक बादल दूसरे बादलों से टकराता हैं, तो इसे प्रेग्नेंट क्लाउट भी कहा जाता है। जब पानी से भरे दो बादल आपस में टकराते हैं, तो तब ऐसी घटना होती हैं। बादल फटने की घटनाएं सामान्य तौर पर धरती की सतह से 12-15 किमी की ऊंचाई पर होती हैं।

बादल फटने के बाद सेफ्टी टिप्स
1. बादल फटने की स्थिति में सुरक्षित रहने के लिए सबसे पहले शांत रहें।
2. बादल फटने की ज्यादा घटना पहाडी इलाकों में ज्यादा होती है। नुकसान को टालने के लिए लोगों को ढलान वाली कच्ची जगह पर मकान बनाने से परहेज करें।
3. इसके अलावा नदी नालों से दूरी बनानी चाहिए।
4. बादल फटने के दौरान घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।
5. बारिश में खड़े न रहें, बाढ़ वाले इलाकों के पास न जाएं।
6. खुद को करंट लगने से बचाने के लिए बिजली के खंभों या तारों से दूर रहें!
7. मौसम की भविष्यवाणी जैसी महत्वपूर्ण जानकारी के लिए ताजा समाचारों पर अपडेट रहें।
8. आपको अपने बारे में समझदारी रखनी चाहिए और अपनी सुरक्षा और अपने आस-पास के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।



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