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Constitution Day 2022: भारत के संविधान के इस खास दिन के बारें में हर नागरिक को जानना जरूरी
भारत हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस या नेशनल लॉ डे सेलिब्रेट करता है। आज के दिन ही भारतीय संविधान को 1949 में संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था। साल 2015 मई में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने "निवासियों के बीच संवैधानिक मूल्यों" को आगे बढ़ाने के लिए 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया। ये दिन उस साल घोषित किया गया था जिसमें संविधान की मसौदा समिति के अध्यक्ष बीआर अंबेडकर की 125वीं जयंती मनाई जा रही थी। संविधान की मसौदा समिति के अन्य लोगों में जवाहरलाल नेहरू, वल्लभभाई पटेल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी व अन्य शामिल थे।
26 नवंबर स्वतंत्र भारत के लिए एक बहुत ही खास दिन है क्योंकि इसी दिन देश की संविधान सभा ने वर्तमान संविधान को विधिवत रूप से अपनाया था। संविधान में मौलिक अधिकार नागरिकों की ताकत के लिए बनाए गए हैं, जबकि मौलिक कर्तव्य देश के नागरिकों को उनके दायित्वों की याद दिलाते हैं। भारत का संविधान दिवस हर साल 26 नवंबर को मनाया जाता है। कुछ समय पहले तक, 26 नवंबर को राष्ट्रीय कानून दिवस के रूप में भी जाना जाता था।

भारतीय संविधान को 1949 में संविधान सभा ने अपनाया
भारत हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस या नेशनल लॉ डे सेलिब्रेट करता है। आज ही दिन भारतीय संविधान को 1949 में संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था। साल 2015 मई में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने "निवासियों के बीच संवैधानिक मूल्यों" को आगे बढ़ाने के लिए 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया। ये दिन उस साल घोषित किया गया था जिसमें संविधान की मसौदा समिति के अध्यक्ष बीआर अंबेडकर की 125वीं जयंती मनाई जा रही थी। संविधान की मसौदा समिति के अन्य लोगों में जवाहरलाल नेहरू, वल्लभभाई पटेल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी व अन्य शामिल थे।
26 नवंबर स्वतंत्र भारत के लिए एक बहुत ही खास दिन है क्योंकि इसी दिन देश की संविधान सभा ने वर्तमान संविधान को विधिवत रूप से अपनाया था। संविधान में मौलिक अधिकार नागरिकों की ताकत के लिए बनाए गए हैं जबकि मौलिक कर्तव्य देश के नागरिकों को उनके दायित्वों की याद दिलाते हैं। भारत का संविधान दिवस हर साल 26 नवंबर को मनाया जाता है। कुछ समय पहले तक, 26 नवंबर को राष्ट्रीय कानून दिवस के रूप में भी जाना जाता था।

डॉ बीआर अंबेडकर अध्यक्ष थे
भारत के एक स्वतंत्र देश बनने के बाद, संविधान सभा ने डॉ बीआर अंबेडकर की अध्यक्षता वाली एक समिति को संविधान का मसौदा तैयार करने का काम सौंपा। भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष थे, जिसे 1946 में स्थापित किया गया था।

भारत के संविधान की प्रस्तावना
उद्देशिका
"हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को:
सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय,
विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता,
प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा,
उन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढाने के लिए,
दृढसंकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई. (मिति मार्ग शीर्ष शुक्ल सप्तमी, संवत दो हज़ार छह विक्रमी) को एतद द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।"

जानते हैं संविधान दिवस का इतिहास और इसके फैक्ट्स
भारत के संविधान दिवस का मुख्य उद्देश्य देश के नागरिकों के बीच संविधान के बारे में जागरूकता पैदा करना और संवैधानिक मूल्यों का प्रचार करना है।
19 नवंबर 2015 को सामाजिक न्याय मंत्रालय ने 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाने का फैसला किया और तभी से इस दिन को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है।
स्वतंत्र भारत के लिए एक संविधान का मसौदा तैयार करने के महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कार्य को पूरा करने में संविधान सभा को लगभग तीन साल लग गए। भारतीय संविधान 1,17,360 शब्दों (English Version) के साथ दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है।
1948 की शुरुआत में, डॉ बीआर अम्बेडकर ने संविधान का मसौदा पूरा किया और इसे संविधान सभा में पेश किया। 26 नवंबर, 1949 को इस मसौदे को बहुत कम संशोधनों के साथ अपना लिया गया था। भारतीय संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ, जिसे रिपब्लिक डे के रूप में पूरा देश सेलिब्रेट करता है।



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