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मां एक शब्द या महज़ एक रिश्ता भर नहीं बल्कि भावनाओं, त्याग, प्रेम और समर्पण का वह रूप होती है जिनका अहसान हम जीवन भर नहीं चुका पाते। मां अपनी सारी जिंदगी हम बच्चों पर न्योछावर कर देती है और कभी भी बदले में कुछ नहीं मांगती।
मदर्स डे कैलेन्डर का एक विशेष दिन होता है जो माओं को समर्पित होता है। इस वर्ष मदर्स डे 14 मई, रविवार को होगा। इस दिन आप भी अपनी मां को कुछ ख़ास उपहार, कुछ ख़ास सरप्राइज और विशेज़ दे सकते हैं। मां के प्यार का धन्यवाद करती हुई पेश हैं कुछ ऐसी ही शायरी जो मदर्स डे को बना देंगी और भी ख़ास-

दुःख थे पर्वत, राई अम्मा
हारी नहीं लड़ाई अम्मा।
-प्रो.योगेश छिब्बर

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है
माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है।
- मुनव्वर राना

अभी जिन्दा है माँ मेरी, मुझे कुछ भी नहीं होगा,
में घर से जब निकलता हु, दुआ भी साथ चलती है।
- मुनव्वर राना

हजारों लफ्ज़, हजारों किताब दे देंगे
में तुझको लिखू तो कागज जवाब दे देंगे।
- राहत इन्दौरी

पर क्या लगे के घोसलों से उड़ गए सभी,
वो फिर अकेली रह गई बच्चों को पाल कर।
- उमर कामरान

किताबों से निकल कर तितलियाँ ग़ज़लें सुनाती हैं,
टिफ़िन रखती है मेरी माँ तो बस्ता मुस्कुराता है।
- सिराज फ़ैसल ख़ान

इस लिए चल न सका कोई भी ख़ंजर मुझ पर
मेरी शह-रग पे मिरी माँ की दुआ रखी थी।
- नज़ीर बाक़री

मैं इस से क़ीमती शय कोई खो नहीं सकता
'अदील' माँ की जगह कोई हो नहीं सकता।
- अदील ज़ैदी

मुझे मालूम है मां की दुआएं साथ चलती हैं,
सफ़र की मुश्किलों को हाथ मलते मैंने देखा है।
-आलोक श्रीवास्तव

इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है,
माँ बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है।
-मुनव्वर राना

भारी बोझ पहाड़ सा कुछ हल्का हो जाए
जब मेरी चिंता बढ़े माँ सपने में आए।
-अख़्तर नज़्मी
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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