Teacher's Day 2026 Sanskrit Wishes: इन संस्‍कृत श्लोकोंं के जरिए गुरुजनों को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं

Happy Teacher's Day 2026 Sanskrit Wishes: हर साल 5 सितंबर को देशभर में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन उन सभी शिक्षकों और गुरुजनों को सम्मान देने का अवसर है, जो हमें किताबी ज्ञान के साथ-साथ जीवन में सही रास्ते पर चलना भी सिखाते हैं। शिक्षक हमारे भविष्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षक केवल पढ़ाते ही नहीं हैं, बल्कि वे अपने विद्यार्थियों को सही और गलत के बीच फर्क समझने, मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने और अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देते हैं। यही वजह है कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान बेहद ऊंचा माना गया है। अगर आप इस शिक्षक दिवस पर अपने शिक्षक या गुरुजनों के प्रति सम्मान व्यक्त करना चाहते हैं, तो संस्कृत में भी शुभकामाएं भेज सकते हैं।

Teacher s Day Sanskrit Wishes 2026

शिक्षक दिवस पर संस्कृत में शुभकामना संदेश (Teacher's Day 2026 Sanskrit Wishes)

1. गुरुरात्मवतां शास्ता शास्ता राजा दुरात्मनाम्।
अथा प्रच्छन्नपापानां शास्ता वैवस्वतो यमः॥

2. विना गुरुभ्यो गुणनीरधिभ्यो
जानाति तत्त्वं न विचक्षणोऽपि।
आकर्णदीर्घायित लोचनोऽपि
दीपं विना पश्यति नान्धकारे॥

3. एकमप्यक्षरं यस्तु गुरुः शिष्ये निवेदयेत्।
पृथिव्यां नास्ति तद् द्रव्यं यद्दत्वा ह्यनृणी भवेत्॥

4. किमत्र बहुनोक्तेन शास्त्रकोटि शतेन च।
दुर्लभा चित्त विश्रान्तिः विना गुरुकृपां परम्॥

शिक्षक दिवस संस्‍कृत श्लोक (Sanskrit Shalok For Teachers Day 2026)

5. गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥

6. त्वमेव माता च पिता त्वमेव,
त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव,
त्वमेव सर्वं मम देव देव॥

7. विद्वत्त्वं दक्षता शीलं सङ्कान्तिरनुशीलनम्।
शिक्षकस्य गुणाः सप्त सचेतस्त्वं प्रसन्नता॥

8. दुग्धेन धेनुः कुसुमेन वल्ली शीलेन भार्या कमलेन तोयम्।
गुरुं विना भाति न चैव शिष्यः शमेन विद्या नगरी जनेन॥

9. अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया।
चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

10. अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम्।
तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

11. ध्यानमूलं गुरोर्मूर्तिः पूजामूलं गुरोः पदम्।
मन्त्रमूलं गुरोर्वाक्यं मोक्षमूलं गुरोः कृपा॥

12. गुरवे सर्वलोकानां भिषजे भवरोगिणाम्।
निधये सर्वविद्यानां दक्षिणामूर्तये नमः॥

13. न गुरोरधिकं तत्त्वं न गुरोरधिकं तपः।
तत्त्वज्ञानात् परं नास्ति तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

14. माता पिता गुरुस्त्राता गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुर्विद्या गुरुर्वित्तं गुरुर्मे परमं सुखम्॥

15. गुरुर्बन्धुश्च मित्रं च गुरुर्देवो न संशयः।
गुरोः प्रसादमात्रेण सर्वसिद्धिर्न संशयः॥

Story first published: Saturday, September 5, 2026, 8:00 [IST]
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