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इच्छामृत्यु पाने वाले हरीश राणा का निधन, दिल्ली के एम्स में 10 दिन भर्ती रहने के बाद ली आखिरी सांस
Harish Rana Death News: गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन निवासी हरीश राणा का दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। वे वही व्यक्ति थे जिन्हें सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु की अनुमति मिली थी। करीब 13 साल तक कोमा में रहने के बाद हरीश राणा ने मंगलवार, 24 मार्च 2026 को आखिरी सांस ली। लंबे समय से बिस्तर पर पड़े रहने के कारण उनकी स्थिति बेहद गंभीर थी और वे जैसे जिंदा लाश की तरह जिंदगी गुजार रहे थे। अब उनकी दर्दभरी जिंदगी का अंत हो गया है और उन्हें इस पीड़ा से मुक्ति मिल गई है।

कौन थे हरीश राणा?
हरीश राणा, भारत में इच्छामृत्यु की अनुमति पाने वाले पहले व्यक्ति हैं। यह दर्दनाक घटना उस समय हुई थी, जब वे पंजाब यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। बताया जाता है कि चंडीगढ़ में अपने पीजी में रहते हुए हरीश फोन पर अपनी बहन से बात कर रहे थे, तभी अचानक चौथी मंजिल से गिर गए। इस हादसे में उनके सिर और कमर में गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद वे कोमा में चले गए। परिवार ने उनका लंबे समय तक इलाज करवाया और हर संभव कोशिश की, लेकिन हरीश दोबारा सामान्य जीवन में लौट नहीं पाए।
सबसे माफी मांगते हुए, सबको माफ करते हुए गए हरीश
हरीश राणा के पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी। कोर्ट ने अपने आदेश में एम्स को निर्देश दिया कि हरीश के लाइफ सपोर्ट सिस्टम को एक तय प्रक्रिया के तहत हटाया जाए, ताकि उन्हें गरिमापूर्ण मृत्यु मिल सके। बताया जाता है कि एम्स में शिफ्ट किए जाने से पहले ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़ी कोमल नाम की महिला ने उनका तिलक किया और उन्हें संदेश दिया कि वे सबको माफ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुए शांति से विदा लें।
सुप्रीम कोर्ट ने दी जीवन रक्षक उपकरण हटाने की अनुमति
गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा एक हादसे के बाद ऐसी स्थिति में पहुंच गए थे कि वे न बोल सकते थे और न ही चल-फिर सकते थे। करीब 13 साल तक वे मशीनों और मेडिकल सपोर्ट के सहारे जिंदगी जीते रहे। उनकी हालत को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी जीवन रक्षक उपकरण हटाने की अनुमति दी थी। यह फैसला भारत में जीवन के अंतिम चरण से जुड़े कानूनों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल माना गया। अदालत ने यह निर्णय कई मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और परिवार की सहमति के आधार पर लिया था। साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया था कि हरीश को एम्स के पेलिएटिव केयर विभाग में भर्ती किया जाए, जहां उनके अंतिम समय की देखभाल के लिए एक व्यवस्थित योजना तैयार की गई। डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी स्थिति पर लगातार नजर रख रही थी। पिछले लगभग 10 दिनों से बिना भोजन और पानी के रहने के बाद आज उनका निधन हो गया।



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