Latest Updates
-
Ganesh Chaturthi Decoration Ideas: गणेश चतुर्थी पर ऐसे सजाएं बप्पा का दरबार, कम खर्च में ये आइडियाज आएंगे काम -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर हाथों में लगी मेहंदी का चाहती हैं डार्क कलर, तो आजमाएं ये 4 आसान टिप्स -
Modak Recipe: गणेश चतुर्थी पर बप्पा के लिए घर पर बनाएं उनके प्रिय उकडिचे मोदक, जानें इसकी आसान रेसिपी -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज का व्रत कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व -
ना मूर्ति, ना पुजारी, सूर्यास्त के बाद एंट्री भी मना, जानिए फिल्म 'The Vvaan' वाले वन देवी मंदिर का रहस्य -
नेपाल में बाढ़ के बाद भूकंप, इंडोनेशिया में फटा ज्वालामुखी, क्या बाबा वेंगा की भविष्यवाणी हुई सच? -
Pithori Amavasya 2026: आज या कल, पिठोरी अमावस्या कब है? जानें सही तारीख, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और महत्व -
World Suicide Prevention Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
तांबे के बर्तन में पानी पीने से मिलेंगे ये 5 फायदे, डायजेशन के साथ इम्यूनिटी भी होगी मजबूत -
Ganesh Chaturthi 2026: कब है गणेश चतुर्थी? जानें तिथि, गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और विसर्जन की तारीख
फ्रांस में पीएम मोदी ने बताया 'दुनिया की सबसे पुरानी भाषा है तमिल', जानें इस प्राचीन भाषा का इतिहास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 जुलाई 2023 को अपने दो दिवसीय फ्रांस की यात्रा पर हैं। इस दौरान पीएम मोदी फ्रांस की सरकार के साथ कई सौदे करने वाली है। प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस की राजधानी पेरिस के ला सीन म्यूजिकल में भारतीय समुदाय के एक कार्यक्रम को संबोधित किया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत को लेकर कई तरह की बातें दुनिया के सामने पेश की, जिसमें सबसे खास रही तमिल भाषा की अहमियत और उसकी प्राचीनता के बारें में दुनिया को बताना।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में कई लिपियां हैं, जो देश के लिए गर्व हैं। आज भी भारत अपनी इस महान परंपराओं को जिंदा रखे हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने तमिल भाषा के बारें में बताया कि ये दुनिया की सबसे पुरानी भाषा है। उन्होंने बताया कि तमिल भाषा भारत की लैंग्वेज हैं और हम भारतीयों की भाषा है।

आइये जानते है कि तमिल भाषा कितनी पुरानी है ?
तमिल भाषा सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विश्व की सबसे प्राचीन भाषा है। कई इतिहासकर मानते हैं कि तमिल दुनिया की सबसे पुरानी लैंग्वेज हैं। जिसकी उत्पत्ति 5000 साल पहले हुई थी। वैसे आपको बता दें कि संस्कृत भाषा को दुनिया की सबसे पुरानी भाषा होने का गौरव हासिल हैं। कुछ भारतीय विद्वान तमिल भाषा की की उत्पत्ति को संस्कृत से जोड़ते हैं।
तमिल की चार प्रमुख द्रविड़ भाषाओं जिसमें तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम शामिल है, सबसे लंबी साहित्यिक परंपरा मौजूद है।
आपको बता दें कि भारत सरकार के द्वारा साल 2004 में तमिल भाषा को शास्त्रीय भाषा घोषित किया जा चुका है।
तमिल की वर्णमाला कैसी है ?
तमिल भाषा के वर्णमाला की बात करें तो ये दूसरी भारतीय भाषाओं की वर्णमाला से काफी छोटी है। तमिल भाषा में सिर्फ 12 स्वर और 18 व्यंजन हैं। वहीं विशेष पात्र, एइथा एज़ुथु भी शामिल हैं।
केरल राज्य के मूल भाषा मलयालम तमिल की सबसे करीबी मानी जाती है। 9वीं शताब्दी तक, मलयालम प्राचीन तमिल की एक बोली थी, जिसे प्रोटो-तमिल कहा जाता है।
भारत में तमिल भाषा का स्थान?
तमिल भाषा भारत के तमिलनाडु समेत केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की आधिकारिक भाषा है। तमिल को भारत की पांचवी सबसे बड़ी भाषा होने का गौरव प्राप्त है। तमिल भाषा भारत के संविधान में 22 अनुसूचित भाषाओं में शामिल है।
भारत के बाहर कहां-कहां बोली जाती है तमिल ?
तमिल भाषा भारत समेत सिंगापुर व श्रीलंका की आधिकारिक भाषा भी है। मलेशिया, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, मॉरिशस, म्यांमार, साउथ अफ्रीका, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका समेत दुनिया के 65 से ज्यादा प्रवासी देशों में तमिल एक महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक लोगों के द्वारा बोली जाती है। वहीं जहां जहां तमिलवासी रहते हैं ये बोली जाती है।
पीएम मोदी ने क्यों की तमिल की तारीफ
आपको बता दें कि पीएम मोदी फ्रांस में संत तिरुवल्लुवर की प्रतिमा का अनावरण भी करेंगे। इससे पहवे भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 अप्रैल 2023 को तमिल नव वर्ष पुत्तांडु के मौके पर तमिल भाषा को दुनिया की सबसे पुरानी भाषा बताया था।
कौन हैं संत तिरुवल्लुवर?
संत तिरुवल्लुवर दक्षिण भारत के महान संतों में से एक रहे हैं। संत तिरुवल्लुवर को दक्षिण भारत का कबीर भी कहते हैं। संत तिरुवल्लुवर ने आम लोगों को जीवन जीने की राह दिखाई, इसके लिए उन्होंने अपनी कविताओं का सहारा लिया, जो तिरुक्कुलर ग्रंथ में लिखी हैं।
आपको बताते चले कि कन्याकुमारी के विवेकानंद स्मारक के पास संत तिरुवल्लुवर की 133 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित है। साल 1979 में इनकी प्रतिमा के स्मारक की आधारशिला तत्कालानी प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने रखी थी। साल 2000 में इस स्मारक आम लोगों के लिए खोला गया।



Click it and Unblock the Notifications
