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Indonesia Floods : क्या है कोल्ड लावा, जिसने इंडोनेशिया के सुमात्रा में निगल ली कई जिंदगियां
What is cold lava: इंडोनेशिया के सुमात्रा आईलैंड में 11 मई से हो रही भारी बारिश के बीच आई बाढ़ और सक्रिय ज्वालामुखी से बहकर आने वाले कोल्ड लावा की वजह से इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप में प्रकृति अपना विनाशकारी रुप दिखा रही है।
बारिश और बाढ़ के बीच चट्टानों और पहाड़ों के पत्थर-मलबे के साथ ही ज्वालामुखी का ठंडा लावा रिहायशी इलाकों तक पहुंचकर तबाही मचा रहा है। ऑनलाइन और मीडिया में शेयर की गई तस्वीरों में पश्चिमी सुमात्रा में सक्रिय ज्वालामुखी माउंट मैरापी के तलहटी पर बसे गांव और सड़के मिट्टी और राख की मोटी परत से आंशिक रूप से ढकी हुई दिखाई दे रही है। अब तक इस वजह से 43 लोगों की मौत हो चुकी है और 17 से ज्यादा लोग लापता हैं।

यहां के कई शहरों में सड़कें टूट गईं और कई इमारते तबाह हो चुकी है। इंडोनेशिया के सुमात्रा आईलैंड में 11 मई से हो रही भारी बारिश के वजह से कई रास्ते टूट चुके हैं और उड़ाने रद्द हैं। आइए जानते हैं कि आखिर ये कोल्ड लावा क्या होता है जो इन दिनों सुमात्रा द्वीप की बर्बादी की वजह बना हुआ है।
क्या होता है कोल्ड लावा?
कोल्ड लावा यानी ठंडा लावा को लहार नाम से भी जाना जाता है। यह एक तरह का गाढ़ा कीचड़ होता है जिसमें राख, रेत और कंकड़ पाए जाते हैं। जो भारी बारिश की वजह से ज्वालामुखी से निकलकर ढलानों से नीचे आकर बहने लगते हैं। यह दिखने में गीले कंक्रीट के घूमते हुए गोले की तरह नजर आते हैं। कभी-कभी यह ज्वालामुखी से निकलने वाले नियमित लावा से भी विनाशकारी हो सकता है। कोल्ड लावा का तापमान 50°C से कम ही होता है।
US जियोलॉजिकल सर्वे का कहना है कि जब ज्वालामुखी में विस्फोट नहीं होता है तब भी ठंडा लावा बन सकता है। बारिश या बर्फवारी के जरिए एक जगह से दूसरी जगह लहार पहुंचाने का काम करता है। फिलहाल सुमात्रा द्धीप में बहते हुए ठंडे लावा से कई इलाकों में कीचड़ बुरी तरह फैला हुआ है जिसकी वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कतें आ रही हैं। से सड़क मार्ग और उड़ाने रद्द कर दी गई है।

'रिंग ऑफ फायर' के क्षेत्र में आता है इंडोनेशिया
इंडोनेशिया 'रिंग ऑफ फायर' के क्षेत्र में आता है। रिंग ऑफ फायर ऐसा इलाका है जहां कई महाद्वीपों के साथ ही महासागरीय टेक्टोनिक प्लेटें भी हैं। ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं तो भूकंप, सुनामी और ज्वालामुखी फटने जैसी प्राकृतिक आपदाओं जैसी घटनाएं घटती हैं। यह क्षेत्र 40 हजार किलोमीटर में फैला है। दुनिया में ज्यादात्तर सक्रिय ज्वालामुखी हैं इसी क्षेत्र में स्थित हैं। इंडोनेशिया में फिलहाल 121 सक्रिय ज्वालामुखी हैं। माउंट मेरापी इनमें से एक हैं।
15 देश जैसे जापान, रूस, फिलिपींस, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड, अंटार्कटिका, कनाडा, अमेरिका, मैक्सिको, ग्वाटेमाला, कोस्टा रिका, पेरू, इक्वाडोर, चिली, बोलिविया रिंग ऑफ फायर के अन्तर्गत आते हैं।



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