Latest Updates
-
Putrada Ekadashi 2026: 23 या 24 अगस्त, कब है पुत्रदा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
कौन हैं क्रिकेटर मेधावी बिधूड़ी? ‘6-7’ सेलिब्रेशन के बाद इंटरनेट पर हुईं वायरल, खूबसूरती के दीवाने हुए फैंस -
दिल्ली में तेजी से बढ़ रहे स्वाइन फ्लू के मामले, जानें बच्चों में H1N1 के लक्षण और बचाव के उपाय -
53 की उम्र में दूल्हा बने अर्जुन रामपाल, गोवा में 14 साल छोटी गर्लफ्रेंड गैब्रिएला संग रचाई शादी -
IND vs SL 2nd Test: कोलंबो में सीरीज जीत की दहलीज पर भारत, बारिश और पिच का क्या है हाल? -
Varalakshmi Vrat Katha: वरलक्ष्मी व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, धन से जुड़ी बाधाएं होंगी दूर -
Varalakshmi Vrat 2026 Wishes: मां लक्ष्मी का आशीर्वाद...वरलक्ष्मी व्रत पर प्रियजनों को भेजें ये शुभकामना संदेश -
Rakhi Gift Ideas For Sister: इस रक्षाबंधन बहन को दें ये 7 प्यार भरे तोहफे, देखते ही खुशी से झूम उठेगी -
World Mosquito Day 2026: मच्छरों के काटने से हो सकती हैं ये खतरनाक बीमारियां, बचाव के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय -
पुरूषों को स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए खानी चाहिए ये 7 चीजें, फर्टिलिटी में होगा सुधार
Yoga Wishes in Sanskrit : सत्यं योगस्य मूर्तिः... इन संस्कृत विशेज से दें योगा डे पर अपनों को बधाई
Short yoga quotes in sanskrit : 21 जून को पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। योग केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी हमें मजबूत बनाता है। इसे जीवन में अपनाकर हम कई बीमारियों से छुटकारा पा सकते हैं। इसी उद्देश्य से हर साल योग दिवस मनाया जाता है ताकि अधिक से अधिक लोग इस चमत्कारी विद्या के प्रति जागरूक हों।
इस खास अवसर पर आप अपने प्रियजनों को योग से जुड़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं और उन्हें शुभकामनाएं भेज सकते हैं। अगर आप योग दिवस की शुभकामनाएं संस्कृत में देना चाहते हैं, तो हम यहां कुछ सुंदर और प्रेरणादायक संदेश (Yoga Quotes in Sanskrit) साझा कर रहे हैं। इन संदेशों के माध्यम से आप अपने परिवार व मित्रों को योग के महत्व का भावपूर्ण अनुभव करा सकते हैं।

International Yoga Day Quotes In Sanskrit (योग दिवस पर संस्कृत में श्लोक )
1. ध्यानयोगेन तपसा परमात्मा सधृश्यते
भावार्थ: इस श्लोक का अर्थ है ध्यान और अनुशासन से, परम आत्मा का साक्षात्कार होता है। सरल शब्दों में समझें तो स्वयं के वास्तविक स्वरूप को समझने के लिए ध्यान और आत्म-अनुशासन आवश्यक है।
2. कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन । मा कर्मफलहेतुर्भुर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि
भावार्थ: भगवद गीता में कहा गया है कि तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल में नहीं। कर्म के फल का कारण मत बनो, और अकर्म में भी आसक्ति मत रखो।
3. सत्त्वं चित्तस्य प्रसादकम्
भावार्थ: भगवद गीता में कहा गया है कि मन की शुद्धता स्पष्टता और प्रसन्नता लाती है। सरल शब्दों में समझें तो इसमें ये कहा गया है कि शुद्ध मन सच्ची खुशी और मानसिक स्पष्टता की ओर ले जाता है, जो संतुलित जीवन के लिए आवश्यक है। ऐसा योग के माध्यम से ही प्राप्त हो सकता है।
4. सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।
भावार्थ: योग वह अवस्था है जहाँ सुख-दुख, लाभ-हानि, और जीत-हार को समान दृष्टि से देखा जाए। यह मानसिक शांति और स्थिरता की स्थिति है।
5. योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः ।
भावार्थ: योग का अर्थ है चित्त की अशांत वृत्तियों को शांत करना। जब चित्त शांत होता है, तो हम आत्मा का अनुभव कर सकते हैं।
6. यदा हि नेन्द्रियार्थेषु न कर्मस्वनुषज्जते ।
भावार्थ: जब तक इंद्रियों का विषय में रुचि नहीं होती, तब तक कर्मों में राग नहीं होता।
7. समत्वं योग उच्यते।
भावार्थ: समता को ही योग कहा जाता है
8. कायेन्न वाचा मनसेंद्रियैर्वा।
भावार्थ: शरीर, वाणी और मन को संयमित करना योग है।
9. आसने स्थितः सुखं योगः।
भावार्थ: सही आसन में बैठकर शरीर और मन को स्थिर करना ही योग है।
10. सत्यं योगस्य मूर्तिः।
भावार्थ: सत्य योग की आत्मा है।
11. योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय।
सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते।।
भावार्थ: हे धनंजय आसक्ति को त्याग कर तथा सिद्धि और असिद्धि में समभाव होकर योग में स्थित हुये तुम कर्म करो। यह समभाव ही योग कहलाता है।
12. कर्मण्यकर्म य: पश्येदकर्मणि च कर्म य: |
स बुद्धिमान्मनुष्येषु स युक्त: कृत्स्नकर्मकृत् |
भावार्थ: जो पुरुष कर्म में अकर्म और अकर्म में कर्म देखता है वह मनुष्यों में बुद्धिमान है वह योगी सम्पूर्ण कर्मों को करने वाला है।



Click it and Unblock the Notifications