Kajari Teej Lokgeet Lyrics: कजरी तीज पर झूला झूलते हुए गाएं ये लोकगीत, पाएं अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद

Kajari Teej Ke Lok Geet : भारत में सावन का महीना न सिर्फ हरियाली, फुहारों और उमंग का प्रतीक है, बल्कि यह कई पारंपरिक त्योहारों की भी सौगात लाता है। इन्हीं में से एक है कजरी तीज, जो विशेष रूप से उत्तर भारत के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में धूमधाम से मनाई जाती है। यह पर्व खासकर महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

कजरी तीज की पहचान सिर्फ पूजा और व्रत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ लोकगीतों की भी एक अमूल्य परंपरा जुड़ी हुई है। इन गीतों में ग्रामीण जीवन की सहजता, सावन की सुंदरता, प्रेम और विरह की भावनाएं जीवंत हो उठती हैं।

महिलाएं समूह में इकट्ठा होकर या झूले पर बैठकर कजरी गाती हैं। इन गीतों में कभी प्रियजन की प्रतीक्षा होती है, तो कभी प्रेम का इज़हार तो कभी मौसम की रूमानी छटा का बखान। आइए यहां देख‍िएं कजरी तीज लोकगीत जो सिंजारा पर गाए जाते हैं।

Kajari Teej Ke Lok Geet

Kajari Teej Song Lyrics in Hindi (कजरी तीज गीत के लिरिक्‍स)

1 .देखो सावन में हिंडोला झूलैं
देखो सावन में हिंडोला झूलैं मन्दिर में गोपाल।
राधा जी तहाँ पास बिराजैं ठाड़ी बृज की बाल।।

सोना रूपा बना हिंडोला, पलना लाल निहार।
जंगाली रंग, सजा हिंडोला, हरियाली गुलज़ार।।

भीड़ भई है भारी, दौड़े आवैं, नर और नार।
सीस महल का अजब हिंडोला, शोभा का नहीं पार ।।

फूल काँच मेहराब जु लागी पत्तन बांधी डार।
रसिक किशोरी कहै सब दरसन करते ख़ूब बहार।।

2. हरी रामा सावन बीता जाय सजन नहीं आये रे हारी
हरी रामा सावन बीता जाय सजन नहीं आये रे हारी
सजन नहीं आये रे हारी सजन नहीं आये रे हारी

हरी रामा सासु हमारी अति समुझाबयं रामा
मोर बहुआ राखा धीरज मन माही ललन घर अइहइं रे हारी
ललन घर अइहइं रे हारी ललन घर अइहइं रे हारी
हरी रामा सावन बीता जाय...

हरी रामा जेठी हमारी अति समुझाबयं रामा
मोर लहुरी राखा करेजबा मा पीर देवर घर अइहइं रे हारी
देवर घर अइहइं रे हारी ललन घर अइहइं रे हारी
हरी रामा सावन बीता जाय......

हरी रामा ननदी हमारी अति समुझाबयं रामा
मोर भउजी राखा नयनबा मा नीर बीरन घर अइहइं रे हारी
बीरन घर अइहइं रे हारी ललन घर अइहइं रे हारी
हरी रामा सावन बीता जाय.....

3. हरि बिन जियरा मोरा तरसे
हरि बिन जियरा मोरा तरसे, सावन बरसै घना घोर।

रूम झूम नभ बादर आए, चहुँ दिसी बोले मोर।
रैन अंधेरी रिमझिम बरसै, डरपै जियरा मोर।।

बैठ रैन बिहाय सोच में, तड़प तड़प हो भोर।
पावस बीत्यौ जात, श्याम अब आओ भवन बहोर।।

आओ श्याम उर सोच मिटाऔ, लागौं पैयां तोर।
हरिजन हरिहिं मनाय 'हरिचन्द' विनय करत कर जोर।।

4. तरसत जियरा हमार नैहर में
तरसत जियरा हमार नैहर में ।
बाबा हठ कीनॊ, गवनवा न दीनो
बीत गइली बरखा बहार नैहर में ।

फट गई चुन्दरी, मसक गई अंगिया
टूट गइल मोतिया के हार, नैहर में ।

कहत छ्बीले पिया घर नाही
नाही भावत जिया सिंगार, नैहर में।

5. आई सावन की बहार
छाई घटा घनघोर बन में, बोलन लागे मोर।
रिमझिम पनियां बरसै जोर मोरे प्यारे बलमू।।

धानी चद्दर सिंआव, सारी सबज रंगाव।
वामें गोटवा टकाव, मोरे बारे बलमू।।

मैं तो जइहों कुंजधाम, सुनो कजरी ललाम।
जहाँ झूले राधे-श्याम, मोरे बारे बलमू।।

बलदेव क्यों उदास पुनि अइहौ तोरे पास।
मानो मोरा विसवास, मोरे बारे बलमू।।

6. छैला छाय रहे मधुबन में
छैला छाय रहे मधुबन में सावन सुरत बिसारे मोर।
मोर शोर बरजोर मचावै, देखि घटा घनघोर।।

कोकिल शुक सारिका पपीहा, दादुर धुनि चहुंओर।
झूलत ललिता लता तरु पर, पवन चलत झकझोर।।

ताखि निकुंज सुनो सुधि आवै श्याम संवलिया तोर।
विरह विकल बलदेव रैन दिन बिनु चितये चितचोर।।

7. सात सखीअन मिली तीज पूजे चलली है,
सोने के चबुतरा बनावले गे माई|
सेही रे चबुतरा चढी बैठेलन तीज माता
संगवा में भोले बाबा साथ गे माई ।
काहे लागी अजी माता मुखवा मलिन भइले,
काहे लागी छोड़ल नगरिया गे माई ।
नहीयों में अजी सबरे मुखवा मलिन भइले ,
नहीं हम छोड़ली नगरिया गे माई।
दिनरात घुमइत रहली भक्त के देखइत रहली,
दुखवा हम हरइत रहली, सुखवा हम देइत रहली ।
देइत देइत अइली एही नगरिया गे माई ।
तोहरों के देवो सांवरो सिर के सेन्दुरवा जी
चमकत दुनियो इंजोर गे माई |
स्वामी के देवो को संवरो रोजी रोजगरवा
जी बालका के देवो सुमति बुद्धिया गे माई |
तोहरो के देवो सांवरो कंचन देहिया जी
होइहे न मुखवा मलिन गे माई |
युग युग जिओ सांवरो गोदी के बलकवा जी
जनम युग बदय अहियात गे माई।

8. हरि संग डारि-डारि गलबहियाँ
हरि संग डारि-डारि गल बहियाँ झूलत बरसाने की नारि।
प्रेमानन्द मगन मतवारी सुधि बुधि सकल बिसारि।।

करि आलिंग प्रेमरस भीजत अंचल अलक उघारि।
टूटे बोल हिंडोल उठावति रुकि-रुकि अंग संवारि।।

श्रीधर ललित जुगल छबि ऊपर डारत तन-मन वारि।
हरि संग डाल-डाल गलबहियाँ, झूलत बरसाने की नारि।।

Kajari Teej Ke Lok Geet

Satudi Teej Ke Marwari lokgeet

1. बीरो लायो म्हारो मिठो मिठो पान,
उखानो लेवू रखकर थाको मानं,
चंद्रमा जी ने दियो आरग,
करी पूजा पतवार,
झूले संग आया सावनरी फुआर,
चिरम्या खेला, गीत गावां, पिंडा पासा मिलकर सारा परिवार,
दीज्यो-दीज्यो आखंड सवाग
मिले बिंद को प्रेम आपार,
यह विनंती लिंबड़ी मातासु करा बारंबार,
चूंदड़ी पहनी, मुठयो पहेन्यो,
गले में चमके नवलख मोत्यारो हार,
बोरपाथ,बिंदी सोहे,
बालों में गजरा लगाया खुशबूदार..!

Kajri Teej Ke Bhojpuri Geet

1. तीज के बरतिया,

ओह, तीज के बरतिया,
सावन की ऋतु,
हरियाली तीज,
खुशियां अपार।
नींदिया टूटे, दर्शन होखे,
साथ में पिया जी के,
बनन रहे गम,
विश्वास बना रहे।
ओह, तीज के बरतिया,
खुशियां मनाएं,
सुख-समृद्धि,
हमेशा साथ रहे।
सावन की फुहारें,
धरती हरी-भरी,
वैवाहिक जीवन,
खुशियों से भरा।
ओह, तीज के बरतिया,
खुशियां मनाएं,
सुख-समृद्धि,
हमेशा साथ रहे।

Story first published: Monday, August 11, 2025, 10:00 [IST]
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