Latest Updates
-
पार्टी में जल्दी बिगड़ जाता है मेकअप? केकी और पैची लुक से बचने के लिए अपनाएं ये 5 टिप्स -
दशहरा के बाद दिल्ली की हवा हुई जहरीली, 200 के पार पहुंचा AQI, प्रदूषण से बचाव के लिए फॉलो करें ये टिप्स -
कुल्लू दशहरा में नहीं जलता रावण का पुतला, देवलोक से आते हैं देवी-देवता, जानिए क्या है सदियों पुरानी परंपरा -
Papankusha Ekadashi 2026: कब है पापांकुशा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
Navratri Ke Baad Jau Ka Kya Kare: नवरात्रि समाप्त होने के बाद उगे हुए जौ का क्या करें? जानें सही नियम और उपाय -
दीपिका पादुकोण-रणवीर सिंह ने किया दूसरी बेटी के नाम का खुलासा, दशहरे पर दिखाई पहली झलक -
Shardiya Navratri 2026 Day 8: नवरात्रि के आठवें दिन करें मां महागौरी की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग और आरती -
Durga Ashtami 2026 Wishes: महागौरी की कृपा...इन संदेशों के साथ अपनों को दें दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं -
सिर्फ गांठ ही नहीं, ये 5 संकेत भी हो सकते हैं ब्रेस्ट कैंसर का लक्षण, साधारण समझकर इग्नोर करने की न करें भूल -
Maha Navami 2026: 19 या 20 अक्तूबर, महानवमी कब है? जानें तिथि, हवन और कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
पिछले 14 सालों से भारत के इन गांवों में दीवाली में अनोखी वजह से नहीं जलाते है पटाखें
भारत सरकार ने भले ही दीवाली के अवसर पर पटाखे जलाने पर बैन लगा दिया हो लेकिन अभी इस सपने को पूरा होने में समय लग सकता है। दीवाली के दिन हम सभी अंधाधुंध पटाखे जलाते हैं जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है और प्रदूषण कई गुना बढ़ जाता है। इससे जानवरों को भी परेशानी होती है। दिल्ली के प्रदूषण के आंकड़े देखने के बाद आपको समझ आएगा कि दीवाली से पर्यावरण को कितना नुकसान होता है।
लेकिन ऐसा भारत के सभी हिस्सों में नहीं होता है।

तमिलनाडु के आठ गांवों में नहीं जलाते पटाखे
तमिलनाडु में आठ ऐसे गांव हैं जहां दीवाली पर पटाखे नहीं जलाए जाते हैं। पक्षी अभ्यारण्य की सुरक्षा के लिए इन गांवों में पिछले 14 सालों से दीवाली के अवसर पर पटाखे नहीं जलाए गए हैं। ईरोड़ जिले के वेल्लोड़ पक्षी अभ्यारण्य में अक्टूबर से जनवरी तक कई प्रजातियों के पक्षी प्रवास करते हैं। पटाखों की आवाज़ से पक्षी डर जाते हैं और उन्हें इस डर से बचाने के लिए आसपास के गांवों में दीवाली पर पटाखे नहीं जलाए जाते हैं।

नहीं जलाते पटाखे
200 एकड़ की जमीन में फैले वेल्लोड़ अभ्यारण्य में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक से पक्षी आते हैं। इस अभ्यारण्य में उनके अंडे भी पाए जाते हैं। इन्हीं पक्षियों की सुरक्षा हेतु ग्रामीण वासी सालों से पटाखे नहीं जला रहे हैं। पिछले दो सालों से बच्चे दीवाली पर फुलझड़ी जलाते हैं।

वन्य जीवों के लिए
पटाखों से निकलने वाली आवाज़ों से पक्षी डर जाते हैं। कुत्तों को भी इन आवाज़ों से डर लगता है और वो इससे बचने के लिए इधर-उधर भागने लगते हैं। बिल्लियों को भी तेज आवाज़ से बेचैनी होती है और इंसानों को भी पटाखों से पैदा होने वाले प्रदूषण में सांस लेने में दिक्कत आती है।

प्रेरणा ले
इन जानवरों के बारे में सोचकर आपको भी ईरोड़ के ग्रामीणवासियों की तरह दीवाली के अवसर पर पटाखों से दूर ही रहना चाहिए। ये आपके और सभी के लिए अच्छा है।



Click it and Unblock the Notifications
