महिला दिवस विशेष: जब शादी की पहली रात ही उस‍के साथ बलात्‍कार हुआ

हां, हम आपको एक असल कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं जहां एक लड़की के पति ने ही शादी की पहली रात उसका बलात्‍कार कर दिया। जब उसके मासिक धर्म चल रहे थे, पढि़ए इस बारे में -

By Aditi Pathak

बलात्‍कार एक ऐसा कृत्‍य है जो किसी भी महिला के साथ होने पर उसके जीवन को तबाह करके रख देता है और उम्र भर के लिए उसके ऊपर निशान छोड़ जाता है जिसके बाद उस महिला का जीवन और दुनिया के प्रति नज़रिया ही बदल जाता है।

यहां हम आपको एक असल कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके पति ने ही शादी की पहली रात उसका बलात्‍कार कर दिया। यह कृत्‍य उसके साथ तब हुआ, जब उसके मासिक धर्म चल रहे थे।

जहां एक लड़की हजारों सपने लेकर अपने सुसराल पहुंची लेकिन एक खौफनाक रात ने उसके सारे सपने ही चूर चूर कर दिए।

हम उस समाज में रहते हैं जहां दुनिया सोचती है कि विवाहित महिला को अपने पति की हर जरूरत का ध्‍यान रखना होगा भले ही उसकी मर्जी हो या नहीं। चाहें वो सम्‍बंध बनाने के लिए तैयार हो या नहीं।

अगर ऐसे में महिला कोई कदम उठाती है या आपत्ति जताती है तो लोग उसका साथ देने की बजाय उसे ही गलत ठहराते हैं। आइए पढ़ते हैं इस महिला के दर्द भरी काहानी के बारे में, जब उसे अपने पति से ही यातना मिली:

जब मना करने पर उसके साथ जबरदस्‍ती की

जब मना करने पर उसके साथ जबरदस्‍ती की

उस रात उस महिला की सुहागरात थी, लेकिन उसे मासिक धर्म चल रहे थे, ऐसे में उसने सम्‍बंध बनाने से इंकार कर दिया। लेकिन उसके पति ने जबरन ही उसके साथ सम्‍बंध बनाया और उसका रेप कर डाला। इस दौरान उसने इतनी क्रूरता दिखाई कि उस महिला का कॉलर बोन ही तोड़ डाला और बहुत मारा।

उसके भाई ने दिया साथ -

उसके भाई ने दिया साथ -

एक लड़की तब बहुत सुरक्षित महसूस करती है, जब उसका भाई उसके साथ हो। लेकिन इस घटना के बाद उस लड़की का भाई उसके साथ तो था लेकिन जब वह रो रही थी तो वो भी उसे सांत्‍वना देने की जगह उस पर चिल्‍ला रहा था।

भाई गुस्‍से में था-

भाई गुस्‍से में था-

इस घटना के बाद, लड़की का भाई भयानक गुस्‍से में था। उसे गुस्‍सा भी आ रहा था कि उसकी बहन ने मासिक धर्म के दौरान उसने अपने पति को संबंध बनाने के लिए हामी क्‍यूं नहीं भरी। वो मानता था कि उसके पति ने कुछ गलत नहीं किया।

कहां रह रहे हैं हम -

कहां रह रहे हैं हम -

सोचने वाली बात है कि हम कैसे माहौल में रह रहे हैं जहां किसी महिला की इच्‍छा का कोई मायने नहीं है। अगर उसके साथ कुछ भी गलत हो जाता है तो उसे भी ब्‍लेम किया जाता है।

छोड़ दिया गया उसके अकेले ही -

छोड़ दिया गया उसके अकेले ही -

इस घटना के बाद, जहां वो महिला इस कृत्‍य के खिलाफ लड़ना चाहती थी, वहां किसी ने उसका साथ नहीं दिया। उस महिला को अकेले छोड़ दिया गया। उसकी किसी ने मदद नहीं की। यहां तक की उसके भाई ने सलाह दी कि वो समझौता कर लें।

समाज का वास्‍तविक चेहरा -

समाज का वास्‍तविक चेहरा -

दरअसल यहीं भारतीय समाज का असल चेहरा है जहां देवी की पूजा तो की जाती है, लेकिन महिलाओं को सम्‍मान नहीं दिया जाता है, उन्‍हें बोलने का अधिकार है लेकिन उनकी बात को कोई सुनता नहीं और न ही तवज्‍जों देता है। हर चरण पर उनसे समझौता करने की उम्‍मीद की जाती है।

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