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पिता की तपस्या का मान और खुद पर भरोसा करना सिखाता है शुभमन गिल का सफर
अंडर-19 वर्ल्ड कप 2018 खत्म होने के साथ ही एक ऐसे क्रिकेटर का नाम लोगों की जुबान पर था जिसे कोई भविष्य का कोहली कहने लगा तो कोई वीरेंद्र सहवाग। ये सच भी है कि उसके खेल और व्यक्तित्व में टीम इंडिया तक के सफर को पूरा करने का माद्दा दिखता है। आज हम ज़िक्र कर रहे हैं शुभमन गिल का।
शुभमन गिल क्रिकेट का एक ऐसा सितारा है जिसकी हर एक पारी में कुछ खास बात होती है। बल्लेबाज़ी करते हुए रन तो कई बल्लेबाज़ बनाते हैं, पर शुभमन की पारी को देखकर लोग उसके टेमरामेंट की चर्चा करने लगते हैं। पारी छोटी हो या बड़ी उसे खास बना देना शुभमन गिल की सबसे बड़ी पहचान है और यही क्षमता एक दिन उसे बड़े फलक पर लोगों के सामने लाकर खड़ा कर देगी।

घर से ही हुई इस खेल की शुरुआत
शुभमन गिल का जन्म खेत और ज़मीन से संपन्न एक परिवार में साल 1999 के सितंबर महीने में पंजाब के फाजिल्का में हुआ था। उनके पिता पहले से ही क्रिकेट के शौक़ीन थे और बच्चों को क्रिकेट सिखाने का काम भी करते थे। परिवार के लोग तो ये भी कहते हैं कि शुभमन के पहले कोच उसके पिता लखविंदर सिंह हैं। लखविंदर सिंह सचिन तेंदुलकर के बहुत बड़े प्रशंसक हैं। बाद में उन्हें अपने बेटे में ही क्रिकेट के गुण दिखने लगे। शुभमन ने भी तीन साल की उम्र में ही हाथों में बल्ला थाम लिया था। पहले ये सिर्फ एक शौक था जो धीरे-धीरे सपनों में बदलने लगा।
एक बार खेतों में खेलते हुए शुभमन कई सौ गेंद खेलने के बाद भी न तो थका और न ही आउट हुआ, उसी दिन परिवार के लोगों को एहसास हो गया था कि ये लड़का वाकई में एक दिन मैदान मार लेगा। लेकिन इसके लिए पहले अच्छी ट्रेनिंग की ज़रूरत थी।
शुभमन के साथ पिता ने भी की कड़ी मेहनत
लखविंदर सिंह को एहसास हो गया था कि शुभमन क्रिकेट के बल्ले से कमाल की कहानी लिख सकता है लेकिन इसके लिए पहली शर्त थी कि बच्चे को फाजिल्का से कहीं बाहर ले जाकर अच्छी ट्रेनिंग दिलवाई जाए। शुभमन को लेकर उनके पिता साल 2007 में मोहाली चले गए। शुभमन के जुनून को सही से सांचे में ढालने का काम मोहाली में शुरू हुआ। सात साल की उम्र में ये ट्रेनिंग शुभमन को बिल्कुल परफेक्ट बनाने का काम कर रही थी। शुभमन के पिता ने पीसीए क्रिकेट ग्राउंड के ठीक सामने किराए पर कमरा लिया। ये वो तपस्या थी जिसका फल सालों बाद मिलना था, खैर तब इस बात से अंजान उसके परिवार के लोग और पिता सिर्फ शुभमन की प्रतिभा को निखारने के काम में हर तरीके से लगे हुए थे। दूसरी तरफ लखविंदर सिंह को ये बात खटकने लगी थी कि कोचिंग में बच्चों की संख्या ज़्यादा होने के कारण शुभमन को उसके कोच बहुत कम वक्त देते हैं। इसे देखने के बाद लखविंदर सिंह ने शुभमन को ट्रेनिंग देने की ज़िम्मेदारी फिर से अपने हाथों में ले ली।
एक पिता अपने बेटे का पहला गुरू, पहला रक्षक होता है और जीवन भर उसे अपनी छाया में रखने का काम करता है। लखविंदर सिंह पर ये बातें पूरी तरीके से सही साबित होती है। शुभमन के लिए उसके पिता ने दिन-रात एक कर दिया। शुभमन के पिता उसे खेत में काम करते हुए क्रिकेट की बारीकियों को सिखाने में लग जाते।
मिलने लगे मौके
इस मेहनत और लगन के नतीजे दिखने लगे थे। शानदार बल्लेबाज़ी की बदौलत शुभमन अपनी प्रतिभा को दुनिया के सामने लाने में जुट गए। साल 2016-17 में शुभमन गिल ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में पंजाब के लिए खेलना शुरू कर दिया। फरवरी 2017 में विजय हजारे ट्राफी और नवम्बर 2017 में रणजी ट्राफी मैच से शुभमन के कदम प्रोफेशनल क्रिकेट की दुनिया में आ गए। शुभमन ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट की शुरूआत बंगाल के खिलाफ खेल कर की। इसके बाद दिल्ली के कोटला ग्राउंड पर हरभजन सिंह की कप्तानी में खेलते हुए शुभमन गिल पंजाब के एक मैच में सिर्फ 11 के स्कोर पर आउट हो गए। शुभमन को इस बात का बहुत अफसोस हुआ कि वो सस्ते में विकेट गंवा कर चले गए लेकिन इसके बाद की पारी में शुभमन ने स्थिरता और धैर्य का दामन थामा।
इसका प्रमाण उन्होंने 2013-14 और 2014-15 के लिए लगातार दो साल बेस्ट जूनियर खिलाड़ी के पुरस्कार से सम्मानित होकर दिया। बीसीसीआई के इस खास कार्यक्रम में शुभमन गिल को पहली बार विराट कोहली से मिलने का मौका मिला था।

मेहनत दिखाने लगी रंग
शुरूआती दिनों में अपने पिता के साथ शुभमन प्रैक्टिस करते हुए रोज़ाना 500 से 700 गेंदे खेलता था, कभी कभी विकेट को बैट बनाकर तो कभी चटाई को पिच बनाकर क्रिकेट के जुनून को परवान चढ़ाता। उसे इस बात का अंदाज़ा था कि ये अभ्यास एक दिन उसे मंझा हुए बल्लेबाज बना देगा। अंडर-16 के एक मैच में शुभमन ने नाबाद डबल सेंचुरी लगाई। अंडर-16 में लगातार शानदार क्रिकेट खेलने के बाद शुभमन को अंडर-19 में मौका मिला।
अंडर-19 वर्ल्ड कप क्रिकेट 2017-18 के लिए टीम न्यूज़ीलैंड पहुंची और शुभमन को उपकप्तान बनाया गया। उस वक्त से ही हर कोई अंदाज़ा लगा रहा था कि शुभमन इस वर्ल्ड कप में खुद को साबित करेगा और हुआ भी कुछ ऐसा ही।
शुभमन के बल्ले ने मैदान पर कहर बरपाया। दाहिने हाथ के इस खिलाड़ी ने सेमीफाइनल मुक़ाबले में पाकिस्तान के खिलाफ शानदार सेंचुरी बनाई। 102 रन की उम्दा पारी ने फाइनल में पहुंचने की ख़ुशी को दोगुना कर दिया। इस प्रदर्शन के लिए शुभमन को मैन ऑफ़ द मैच के अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस पारी ने भारतीय क्रिकेट को शुभमन गिल के रूप में नया सितारा दिया। पूरे वर्ल्ड कप में शानदार औसत के हिसाब से गिल ने महत्वपूर्ण 341 रन बनाए।
टोटकों पर है यक़ीन
शुभमन में बड़ी परियां खेलने का माद्दा नज़र आता है, यही कारण है कि वीवीएस लक्ष्मण से लेकर हरभजन सिंह और तो और राहुल द्रविड़ इसके टेम्परामेंट से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके। राहुल द्रविड़ तक़रीबन दो साल से शुभमन की बल्लेबाजी देख रहे हैं। इंग्लैंड दौरे पर यूथ वनडे में शुभमन के प्रदर्शन के बाद द्रविड़ ने उसकी जमकर तारीफ की। अंडर 19 टीम में आने के बाद शुभमन को लेकर द्रविड़ ने लंबी योजनाएं बनाईं और जिसका नतीजा भी लोगों से छिपा नहीं।
शुभमन ने वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में पाकिस्तान के साथ मैच के बाद बताया था कि बल्लेबाज़ी करते वक्त वो काफी पहले से सफेद रूमाल रखता था लेकिन पाकिस्तान के साथ मैच में उसने पहली बार लाल रूमाल रखा और संयोग से मैच में शानदार सेंचुरी भी बनी। शुभमन ने इंटरव्यू में कहा था कि अब हमेशा वो बल्लेबाज़ी करते वक़्त लाल रूमाल ही रखेगा।
कई खिलाड़ी इस तरह के टोटके मानने में यक़ीन रखते हैं लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है की कवर और एक्स्ट्रा कवर शॉट खेलने में महारत रखने वाले शुभमन को स्थिरता और संयम सीखाने का काम द्रविड़ ने किया है और इस खिलाड़ी ने भी चयनकर्ताओं के भरोसे को सही साबित किया। उसके इसी प्रदर्शन ने जनवरी 2018 में हुई आईपीएल नीलामी में टीम मालिकों का ध्यान अपनी तरफ खींचा और कोलकाता नाईट राइडर्स ने उसे एक करोड़ 80 लाख में ख़रीदा था।



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