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गूगल ने किया जोहरा सहगल को याद, बनाया खूबसूरत डूडल
आज गूगल का डूडल आपको बदला हुआ नजर आएगा। गूगल ने आज का अपना डूडल देश और दुनिया की मशहूर अदाकारा जोहरा सहगल को समर्पित किया है। जोहरा मुमताज सहगल एक अदाकारा, डांसर और कोरियोग्राफर थीं।

गूगल ने अपने डूडल में जोहरा के क्लासिकल डांस वाले पोज में तस्वीर बनाई है और इसे चारों तरफ से रंग-बिरंगे फूलों से सजाया है। जोहरा सहगल पर बनाए गए आज के इस स्पेशल डूडल को आर्टिस्ट पार्वती पिल्लई ने डिजाइन किया है।
गूगल द्वारा डूडल के बारे में लिखा गया, "आइकोनिक भारतीय एक्ट्रेस और डांसर जोहरा सहगल पर आज का डूडल आर्टिस्ट पार्वती पिल्लई ने बनाया है। वह देश की पहली महिला एक्ट्रेस हैं जिन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली। जोहरा ने फिल्म 'नीचा नगर' में बहुत यादगार रोल किया था। यह फिल्म साल 1946 में कान्स फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई थी। इसे भारतीय सिनेमा की पहली इंटरनेशन क्रिटिकल सक्सेस मिली। 'नीचा नगर' को फेस्टिवल का सर्वोच्च सम्मान द पाल्मे डी ओर प्राइज मिला।"

जोहरा सहगल की अलग पहचान
जोहरा मुमताज सहगल सिनेमा जगत की लाडली के नाम से मशहूर थी। रियासत उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में 27 अप्रैल 1912 में पठान परिवार में जन्म लेने वाली जोहरा का आज भी कोई मुक़ाबला नहीं है।

जिंदगी में देखें कई पड़ाव
सिनेमा की दुनिया की तरह इनकी जिंदगी में भी कई रंग रहे। खेलने-कूदने की उम्र में अपनी अम्मी को खो देने का सदमा लगा। इससे अपने आप को उबारा और नृत्य के प्रति क़ाफ़ी उत्साह दिखाया।

नृत्य के प्रति अनोखा जज्बा
1935 में उदय शंकर से मुलाक़ात नृत्य के कारण ही हो पाया। उदय शंकर के ट्रूप के साथ उन्होंने जापान, मिस्र, यूरोप और अमेरिका सहित कई मुल्कों में अपनी प्रस्तुति पेश की।

बॉलीवुड में शानदार पारी
अपने बाॅलीवुड सफ़र में ‘धरती के लाल', ‘हम दिल दे चुके सनम', ‘दिल से', ‘वीर-ज़ारा', ‘साया', ‘चीनी कम', ‘कभी खु़शी कभी ग़म' जैसी फ़िल्मों में उन्होंने अपनी दमदार मौजूदगी का अहसास दिलाया। जोहरा सहगल ने ब्रिटेन में रहकर कई अंग्रेज़ी फ़िल्मों में भी काम किया। थियेटर को अपना पहला प्यार मानने वाली जोहरा ने पृथ्वी थियेटर में 14 साल काम किया।

मिले कई सम्मान
जोहरा का आज भी कोई मुक़ाबला नहीं है। उनका जीवन, ज्ञान, अनुभव और उत्साह लगातार नई पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। असाधारण जीवन जीने वाली जोहरा 1998 में पद्मश्री, 2001 में कालीदास सम्मान, 2004 में संगीत नाटक अकादमी, 2010 में पद्म विभूषण के अवार्ड से सम्मानित हो चुकी हैं।

अंतिम यात्रा
10 जुलाई, 2014 में उन्हें दिल का दौरा पड़ा और 102 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।



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