Latest Updates
-
गणेश चतुर्थी के दिन कश्मीरी पंडित मानते हैं Pann Poshte, कुल देवी की पूजा से जुड़ी है परंपरा -
जयपुर का मोती डूंगरी गणेश मंदिर: जहां मेहंदी का प्रसाद जोड़ता है शादी की डोर, उमड़ी सिंगल लड़कों की भीड़ -
हरतालिका तीज व्रत कथा: जब नारद मुनि विष्णु विवाह का प्रस्ताव लेकर पहुंचे, मां पार्वती हुईं हैरान -
हरतालिका तीज 2026: क्या गर्भवती महिलाएं रख सकती हैं निर्जला व्रत, जान लें सावधानियां -
Ganesh Chaturthi 2026: ‘गणपति बप्पा मोरया’ से ‘देवा श्री गणेशा’ तक, गणेशोत्सव पर हिट रहे बॉलीवुड के ये गाने -
हरतालिका तीज: शिव-पार्वती के अटूट प्रेम का पावन पर्व, जानें पूजा के नियम और विधि -
Ganesh Chaturthi Decoration Ideas: गणेश चतुर्थी पर ऐसे सजाएं बप्पा का दरबार, कम खर्च में ये आइडियाज आएंगे काम -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर हाथों में लगी मेहंदी का चाहती हैं डार्क कलर, तो आजमाएं ये 4 आसान टिप्स -
Modak Recipe: गणेश चतुर्थी पर बप्पा के लिए घर पर बनाएं उनके प्रिय उकडिचे मोदक, जानें इसकी आसान रेसिपी -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज का व्रत कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
मानवीय संकट : जोशीमठ संकट से बजी खतरे की घंटी, तो ग्राउंड वॉटर क्राइसेस से लोग बेहाल

जोशीमठ में जो कुछ हो रहा है वो आपके सामने और दिल को दहलाने वाला है। यहां की जमीन खिसक रही है, घरों और जमीन पर दरारें पड़ रही है। ये यहां के रहने वालों के लिए एक दुख की घड़ी होने के साथ ही देश के लिए बहुत बड़ा मानवीय संकट और चिंता का विषय है। आप इस बात को तो जानते ही हैं और अक्सर न्यूज में भी देखते ही होंगे की हिमालयी क्षेत्र में भूस्खलन हो रहा है, जो एक नई बात नहीं है, लेकिन जोशीमठ में जो हो रहा है वो नई बात ही है, क्योंकि हिमालय क्षेत्र में आने के कारण यहां पर निर्माण कार्य जोखिमों से भरे हुए हैं। लेकिन विकास के नाम पर धड़ल्ले से यहां पर काम किया गया। जमीन पर दरारे , जमीन का खिसकना यहां पर तभी हुआ है जब कोई भूकंप या विनाशकारी बाढ़ ना आई हो।
क्यों उभरा मानवीय संकट-
उत्तराखंड जिसे देवभूमि के नाम ले पुकारा जाता है, यहां पर जोशीम एक धार्मिक श्रद्धा का केंद्र हैं। ये चारधामों में से एक बदरीनाथ का शीतकालीन विराज स्थल है। लेकिन यहां पर मनवीय लापवाही और अनदेखी के कारण पूरा शहर तेजी से धंस रहा हैं। जिसकी वजह से यहां रहने वाले लोगों की जिंदगी मौत के मुंह पर आकर खड़ी हो गई है।

मिश्रा रिपोर्ट की अनदेखी क्यों की गई ?
साल 1976 के मिश्रा आयोग की रिपोर्ट को लेकर साल वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी की 2006 की रिपोर्ट में जोशीमठ के बारें में भविष्यवाणी की गई थी। अग यहां पर किसी भी तरह के निर्माणकार्य या अन्य किसी प्रकार की गतिविधियां होती हैं तो परिणाम अच्छे नहीं होंगे, लेकिन इस रिपोर्ट के दर किनार कर यहां पर निर्माण कार्य होते गये। जिसका नताजा आज सबके सामने हैं।

देश के कई राज्य ग्राउंट वॉटर क्राइसिस से जूझ रहे-
वहीं दूसरी तरफ मिथिला, उत्तराखंड और राजस्थान के कई क्षेत्र भूजल की कमी से जूझ रहे हैं। मीठे पानी के स्रोत भूजल का का इस्तेमाल होता है। आंकड़ो के अनुसार, दुनिया की करीब बीस प्रतिशत आबादी भूजल से सींचने वाली फसलों पर निर्भर है।
नीति आयोग ने भूजल की कमी पर चिंता व्यक्त की
नीति आयोग की एक रिपोर्ट में इस बारें में चिंता व्यक्त की गई है कि भूजल में गिरावट बनी हुई है। साल 2030 तक भारत में बड़ा जल संकट सामने आ खड़ा हो सकता है। भारत के प्रमुख शहरों, दिल्ली, बंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद करीब 21 शहरों में भूजल खत्म होने के कगार पर है।
आने वाले वक्त में ये मानवीय संकट और होगा खतरनाक
ये गहराता हुआ मानवीय संकट आने वाले वक्त के लिए काफी खतरनाक साबित होने वाला है, क्योंकि जिस तरह से आज लोगों को इन सारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो आने वाले वक्त में अगर इसका हल ना खोजा गया, वहीं प्रकृति से साथ और अधिक छेड़छाड़ की गई तो विनाश ही आएगा, क्योंकि प्रकृति ने लोगों के साथ बदला लेना शुरू कर दिया है, जो जोशीमठ में साफ दिखाई पड़ रहा है।



Click it and Unblock the Notifications
