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जय जवान जय किसान का नारा देने वाले शास्त्री जी की पुण्यतिथि पर पढ़ें उनके प्रेरक विचार
जय जवान, जय किसान का नारा देने वाले लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को मुगलसराय में हुआ था। भारत के दूसरे प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री ने अपना पूरा जीवन गरीबों की सेवा में ही लगा दिया।

इतना बड़ा ओहदा संभालने के बावजूद वो एक सादगी भरा जीवन बिताते थे। शास्त्री जी गांधीवादी नेता थे। वो महात्मा गांधी के विचारों से इतने ज्यादा प्रभावित थे कि सन् 1920 में 16 साल की उम्र में ही वो गांधी जी के असहयोग आंदोलन से जुड़ गए। भारत की आजादी के जंग में शामिल हुए शास्त्री जी को जेल भी जाना पड़ा था।

बचपन में शास्त्री जी की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। वो स्कूल आने जाने के लिए सिर पर अपनी किताबें रखकर गंगा नदी तैर कर पार करते थे। उन्होंने जीवन में कमाए अपने ऐसे ही कई अनुभवों के आधार पर देश को मजबूत करने की राह दिखाई।
इस देश की खुशकिस्मती रही कि लाल बहादुर शास्त्री जैसी शख्सियत भारत में जन्मी। उनकी जनकल्याणकारी विचारधारा और सादगी ने देश के हर व्यक्ति को प्रभावित किया। लाल बहादुर शास्त्री जी के विचार आज भी देशवासियों के राष्ट्रप्रेम को जगाए हुए हैं।

1.
आज़ादी की रक्षा सिर्फ हमारे देश के सैनिकों का काम नहीं है, इसकी रक्षा के लिए पूरे देश को मज़बूत होना पड़ेगा। -लाल बहादुर शास्त्री

2.
जैसा मैं दिखता हूं उतना साधारण भी नहीं हूं। -लाल बहादुर शास्त्री

3.
जो शासन करते हैं उन्हें देखना चाहिए की लोग कैसी प्रतिक्रिया करते हैं क्योंकि लोकतंत्र में जनता ही मुखिया होती है। -लाल बहादुर शास्त्री

4.
देश के प्रति निष्ठा सभी निष्ठाओं से पहले आती है और यह एकदम पूर्ण निष्ठा है क्योंकि इसमें कोई प्रतीक्षा नहीं करता की इसके बदले उसे क्या मिलता है। -लाल बहादुर शास्त्री

5.
मेरी समझ से प्रशासन का मूल विचार यह होना चाहिए की समाज को एकजुट रखा जाए ताकि वह विकास कर सके और अपने लक्ष्यों को पूरा कर सके। -लाल बहादुर शास्त्री

6.
देश की तरक्की के लिए हमें आपस में लड़ने के बजाये गरीबी, बीमारी और अज्ञानता से लड़ना होगा। -लाल बहादुर शास्त्री



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