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Makar Sankranti 2023: मकर संक्रांति पर क्यों खाते हैं दही चूड़ा? जानें धार्मिक महत्व के साथ हेल्थ बेनिफिट्स
नया साल पधार चुका और अब लोग नये साल में होने वाले त्योहारों को लेकर उत्सुक होने लगे हैं। इसमें सबसे पहला त्योहार जो आ रहा है वो काफी एक्साइटमेंट से भरा होता है और लोग इसका काफी मन से आने का इंतजार करते हैं। बच्चे और यंगस्टर्स के लिए तो ये पंतगबाजी करने का मौका होता है, पेंच लड़ाने और फुल मस्ती के साथ इस दिन बनने वाले व्यंजनों को खाने का मौका होता है। जी हां..आप समझ गये हैं यहां बात मकर संक्रान्ति की हो रही है, जिसे देश के हर हिस्से में अलग अलग तरीको से और अलग अलग नाम के साथ मनाया जाता है। हिंदी पट्टी के राज्यों जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड में इसे मकर संक्राति कहा जाता है। इस दिन दही-चूड़ा खाने का विशेष महत्व होता है। इसके बिना त्योहार ही अधूरा लगता है। दही-चूड़ा का धार्मिक महत्व होने के साथ ही ये एक हेल्दी ब्रेकफास्ट भी है, जिसे आप अपने डेली रूटीन में भी खा सकते हैं। दही-चूड़ा के कई सारे हेल्थ बेनिफिट्स है। आइये जानते हैं दही-चूड़ा आपके स्वास्थ्य के लिए किन किन तरीको से लाभ देता है-

पहले जानते हैं मकर संक्रांति के बारें में
सूर्य जब पौष महीने में मकर राशि में प्रवेश करता है तब संक्रांति मनाई जाती है। इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। भारत के कई हिस्सों में इसे अलग अलग नामों के साथ सेलिब्रेट किया जाता है। तमिलनाडु में इसे पोंगल उत्सव के रूप में मनाया जाता है। कर्नाटक, केरल में इसे केवल संक्रांति ही कहा जाता है। मकर संक्रांति पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायण भी बोलते हैं। उत्तर प्रदेश में इसे खिचड़ी भी कहा जाता है।

दही-जूड़ा का मकर संक्रांति में क्या महत्व है ?
दही और चूड़ा साथ में तिलकुट को मकर संक्रांति पर बनाया जाता है। ताजा ताजा धान कटाई के बाद किसान चावल को खाते हैं। इस दिन लोगों के द्वारा दान किया जाता है। इसके साथ ही भगवान सूर्य को खिचड़ी का भोग लगाकर खाने की परंपरा है। उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों में इस दिन दही-चूड़ा का भोग लगाया जाता है। साथ ही साथ ये रिश्तों की मजबूती के लिए माना जाता है। लोग दही-चूड़ा को अपने दोस्तों, रिश्तेदारों के घर जाकर आदान प्रदान भी करते हैं। इससे रिश्तों में गर्माहट बनी रहती है।

दही-चूड़ा के हेल्थ बेनिफिट्स
दही-चूड़ा एक ऐसा स्नैक है जो प्री और प्रोबायोटिक दोनों फैक्टर्स का कॉम्बिनेशन है। इसे हेल्दी नाश्ते की तरह आप खा सकते हैं। ये दही के साथ होता है तो पचाने में आसान होता है। आप जब इसे मॉर्निंग में खाते है तो ये न केवल आपको ज्यादा वक्त तक भरे होने का अहसास कराता है। साथ ही पाचन तंत्र को भी आसान करता है। इन्सटंट एनर्जी देता है।
दही-चिरवा के के साथ, भीगी हुई काली किशमिश या मुनक्का भी आप ले सकते हैं। इसे आप चाय या कॉफी से पहले ले तो ज्यादा उपयोगी साबित होगा।
दही-चूड़ा कम कैलोरी युक्त होता है। जो आपके हेल्दी ऑप्शन में फिट होगा। दही के साथ एक कटोरी चपटे चावल में आवश्यक पोषक तत्वों के साथ सिर्फ 300 कैलोरी होती है।

दही-चूड़ा के हेल्थ बेनिफिट्स
दही चूड़ा जो ग्लूटेन फ्री व्यंजन है। दही जो कि शरीर में कैल्शियम की कमी नहीं होने देता, जो आपकी हड्डियों को मजबूतीं देता है।
आप दही और चूड़े का सेवल रोज कर सकते हैं, दही कैल्शियम की कमी और चूड़ा आयरन की कमी दूर करता है।



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