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महज 2 दिन ही स्कूल गई थीं लता मंगेशकर, इन फैसलों ने बनाया उन्हें सुर सम्राज्ञी
सुरों की मल्लिका लता मंगेशकर अब हमारे बीच नहीं रहीं। स्वर कोकिला के लिए लोगों के दिलों में जो सम्मान और प्यार है वैसा प्यार आजतक किसी और सिंगर के लिए देखने को नहीं मिला । लता दीदी को अलविदा कहने के लिए उनके परिवार के साथ साथ कई बड़ी हस्तियां शामिल हुई।

बहुत से लोगों के लिए लता मंगेशकर गायिका नहीं मां सरस्वती थी। लता दीदी के गानें हमारे लिए विरासत से कम नहीं है। लता मंगेशकर 36 से ज्यादा भाषाओं में गानें गा चुकी हैं। हालांकि, असल जिंदगी में लता दीदी केवल दो दिन के लिए स्कूल गई थीं। क्या आप जानते हैं लता जी स्कूल क्यों नहीं गई? चलिए जानते हैं उनके जीवन की कुछ अनसुनी बातें।

केवल दो दिन स्कूल गईं थी लता दीदी
लता दीदी ने 7 दशक तक अपनी मीठी आवाज में 36 भाषा में गाने गाए हैं। क्या आप जानते हैं लता जी केवल दो दिन के लिए स्कूल गईं थी। उन्होंने अपनी शिक्षा घर पर ही ली थी। दीदी ने अपने संगीत की सारी शिक्षा अपने पिता से ली थी। भाषा का ज्ञान भी उन्हेंने घर पर लिया था। लता दीदी के स्कूल न जानें की वजह भी उनके निजी जीवन की कहानी से जुड़ी हुई है। दरअसल लता दीदी और आशा भोसले साथ में स्कूल गई थी। स्कूल में पढ़ने के लिए दोनों बच्चों की अलग अलग फीस देनी थी। घर की हालत ठीक नहीं थे जिसकी वजह से लता दीदी ने अपना नाम कटवा लिया।

लता मंगेशकर को सफेद रंग की साड़ी से था लगाव
लता दीदी को सफेद रंग से बहुत ही प्यार था। वह ज्यादातर सफेद साड़ी में नजर आती थीं। उनकी साड़ी सफेद होती है लेकिन बॉर्डर का कलर अलग अलग होता था। एक इंटरव्यू में लता मंगेशकर ने बताया था कि उन्हें बचपन से ही सफेद रंग बेहद पसंद है। लता जी सफेद रंग का घाघरा चोली और साड़ी पहनती थीं। सफेद रंग के कपड़े के साथ उन्हें हीरे के जेवर पसंद थे। सिल्क की सफेद साड़ी के साथ वह हीरे के जेवर में नजर आती थीं।

लता दीदी को था कार का शौक
लता दीदी की जीवनशैली बहुत ही सादगी से भरी थी। लता दीदी को कोई महंगे शौक नहीं थे लेकिन उन्हें कार बहुत पसंद थी। लता दीदी ने अपने करियर की शुरुआत में ही 8 हजार की कार खरीदी। लता दीदी के पास मर्सिडीज और क्रिसलर से लेकर कई मंहगी कार थी। यश चोपड़ा ने उन्हें फिल्म वीर जारा की सफलता के बाद मर्सिडीज कार गिफ्ट की थी।

स्वर कोलिका लता दीदी के उसूल
लता दीदी अपने उसूलों की पक्की थीं। लता जी कभी भी दो अर्थ वाले शब्दों के गानें में अपनी आवाज देना पसंद नहीं करती थी। उनके इस उसूल की वजह से कई बार म्यूजिक डायरेक्टर से बहस छिड़ जाती थी। एक बार गाने के शब्द को लेकर रफी साहब से उनकी बहस हो गई थी। जिसके बाद दोनों ने लगभग 4 साल तक साथ में काम नहीं किया था।

लता मंगेशकर को क्रिकेट से था बेहद लगाव
लता मंगेशकर को गाने के साथ साथ क्रिकेट का भी काफी लगाव था। लता दीदी ने क्रिकेट टीम के लिए ऐसा योगदान दिया है जिसे आज भी नहीं भूला जा सकता है। बीसीसीआई क्रिकेट बोर्ड के पास आज काफी पैसा है लेकिन एक समय था जब क्रिकेट बोर्ड के पास टीम इंडिया को इनाम देने के लिए पैसे नहीं थे। सन 1983 में विश्वकप जीतने के बाद क्रिकेट बोर्ड इंडियन टीम को इनाम देना चाहता था लेकिन पैसे की कमी से वह ऐसा नहीं कर पाए थे। ऐसे में लता मंगेशकर ने भारतीय क्रिकेट टीम के सभी सदस्यों को इनाम में एक-एक लाख रुपए दिए थे। लता मंगेशकर अक्सर क्रिकेट के बड़े मैच की जीत के बाद अपना रिएक्शन देती थीं। लता मंगेशकर का सचिन तेंदुलकर के साथ रिश्ता काफी अच्छा था। सचिन भी लता दीदी को अपनी मां की तरह मानते थे।



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