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Women’s Day: करोड़ों महिलाओं को प्रेरणा देने वाली सानिया मिर्ज़ा का विवादों से रहा है गहरा नाता
भारत की स्टार टेनिस खिलाड़ी और ग्रैंडस्लैम विजेता सानिया मिर्ज़ा ने अपने लंबे और उपलब्धियों से भरे करियर को अलविदा कहा। करोड़ों लोगों की पसंदीदा और कई युवाओं की प्रेरणा रहीं सानिया मिर्ज़ा ने अपने खेल जीवन में कई नामी ख़िताब हासिल किए। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय जगत में भारत का नाम और तिरंगे को सर्वोच्च सम्मान दिलाया। इस महिला दिवस पर जानते हैं सानिया मिर्ज़ा के दो दशक लम्बे चले कामयाब करियर, प्रेरणादायी उपलब्धियों और विवादों के बारे में -

कम उम्र में की करियर की शुरुआत
सानिया का जन्म हैदराबाद में 1986 में हुआ। सानिया ने 6 साल की उम्र से ही टेनिस के खेल में दिलचस्पी दिखाना शुरू कर दिया था, तब आम लोगों के लिए टेनिस के अच्छे कोर्ट उपलब्ध नहीं हुआ करते थे। कम उम्र से ही सानिया ने लगातार मेहनत करके खुद को एक सहज टेनिस खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया। 2003 में उन्होंने विंबलडन चैंपियनशिप के गर्ल्स डबल्स का ख़िताब जीतने के साथ जूनियर टेनिस प्लेयर के तौर पर अपनी पहचान बना ली थी। सानिया मिर्ज़ा के पहले कोच कृष्णा भूपति थे, जो भारतीय दिग्गज महेश भूपति के पिता हैं। आगे चलकर सनिया ने टेनिस के गुर कोच रोजर एंडरसन से सीखे।

घर घर में बनी सानिया की पहचान
सानिया सुर्ख़ियों का हिस्सा तब बनीं जब 2005 में वे ऑस्ट्रलियन ओपन के तीसरे राउंड में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं और उनका सामना दिग्गज खिलाड़ी सेरेना विलियम्स से हुआ। उस प्रतिष्ठित मैच में भले ही सानिया हार गयी, पर सानिया मिर्ज़ा का नाम अब घर-घर में जाना जाने लगा था।

खेल करियर में जीते कई खिताब
22 साल के अंतर्राष्ट्रीय करियर में उन्होंने 6 ग्रैंड स्लैम जीते, और कुल 44 WTA ख़िताब अपने नाम किये। उन्होंने एकल मैचों के अलावा महिला युगल और मिश्रित युगल में अपना सिक्का जमाया। हैदराबाद में खेले अपने आखिरी मैच में परिवार के सदस्यों, पूर्व साथी खिलाडियों और करीबी दोस्तों ने उनका हौसला बढ़ाया और उनके प्रभावशाली करियर के अंत में उनका साथ दिया।

विवादों से रहा चोली-दामन का साथ
सानिया मिर्ज़ा हर प्रतियोगिता में भारत का गौरवशाली प्रतिनिधित्व करती आयीं, लेकिन विवादों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। कभी उनके पहनावे, कभी शादी तो कभी मज़हब को लेकर वे कंट्रोवर्सी में घिरी नज़र आयीं। कई बार मुस्लिम धार्मिक नेताओं, मौलानाओं ने फतवे जारी किये, क्योंकि उन्हें सानिया की खेल यूनिफार्म से दिक्कत थी। इन फतवों में उन्होंने सानिया की स्कर्ट को "गैर इस्लामिक" और "अशोभनीय" करार दिया था। सानिया ने भी इन फतवों का करार जवाब दिया और कहा कि जब तक वह अपने देश के लिए मैडल जीत रहीं हैं, तब तक किसी को भी उनकी स्कर्ट की लम्बाई से परेशानी नहीं होनी चाहिए।

शादी को लेकर भी बटोरीं सुर्खियां
2010 में जब सानिया मिर्ज़ा ने पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक से शादी की तब उनको कई तीखी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। उस समय उनकी देश के प्रति निष्ठा तक पर सवाल उठाए गए, जिनका जवाब वे खेल के मैदान पर अपने प्रदर्शन से ही देती रहीं। हालांकि इन विवादों के बावजूद उन्होंने अपने देश का नाम रौशन करना नहीं छोड़ा।

महिला अधिकारों के लिए रहीं मुखर
सानिया अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में महिला अधिकारों को लेकर काफी स्पष्ट और मुखर रहीं। उन्होंने घरेलू हिंसा, यौन शोषण समेत तमाम मुद्दों के खिलाफ़ खुलकर अपने विचार रखें। अपने खेल को अलविदा कहने से एक दिन पहले एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि "मैं चाहूंगी लोग मुझे ऐसी लड़की के रूप में याद रखें, जिसने सही चीजों के लिए लड़ाई लड़ी। उसने खुद में इतना यकीन किया, जितना किसी दूसरे ने नहीं किया।"

खेल क्षेत्र में अब भी देंगी अपना योगदान
सक्रिय खेल को अलविदा कहने के बाद अब सानिया दुबई और हैदराबाद में अपनी टेनिस एकेडमी चलाने के साथ साथ महिला आईपीएल की रायल चैलेंजर्स बेंगलुरु की महिला क्रिकेट टीम का मार्गदर्शन करेंगी। टेनिस कोर्ट में सानिया का अंदाज़ अनुभवी लेकिन आक्रामक रहता था, वहीं कोर्ट के बाहर भी उन्होंने हमेशा अपने अनुसार जीवन जीया। सानिया मिर्ज़ा बनना आसान नहीं है। आज उनकी शख्सियत सैकड़ों लड़कियों को अपने शर्तों पर जीवन जीने व रूढ़ियों से लड़ने की प्रेरणा देती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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