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Menstrual Hygiene Day 2025: ‘सच्ची सहेली’ बनकर समाज की चुप्पी तोड़ रहीं डॉ. सुरभि सिंह
Menstrual Hygiene Day 2025 : हर साल 28 मई को Menstrual Hygiene Day मनाया जाता है ताकि पीरियड्स से जुड़ी मिथकों, गलत धारणाओं और चुप्पियों को तोड़कर सही जानकारी समाज के हर वर्ग तक पहुंचाई जा सके। इस दिशा में दिल्ली की डॉक्टर सुरभि सिंह एक प्रेरणादायी नाम बन चुकी हैं।
गायनोकोलॉजिस्ट के तौर पर 16 साल की सफल प्रैक्टिस के बावजूद, डॉ. सुरभि ने समाज में गहराई से जमी पीरियड्स से जुड़ी चुप्पी और शर्म को खत्म करने के लिए अपने कंफर्ट ज़ोन से बाहर निकलकर जमीनी स्तर पर काम करने का फैसला किया।

'सच्ची सहेली' से बदली हजारों ज़िंदगियां
डॉ. सुरभि द्वारा स्थापित संस्था 'सच्ची सहेली' सालों से स्कूलों, कॉलेजों और बस्तियों में जाकर माहवारी, यौन स्वास्थ्य और प्रजनन से जुड़ी शिक्षा को लेकर जागरूकता फैला रही है। उनका मानना है, "पीरियड्स के समय बाल धोने, दही खाने, रसोई में जाने या मंदिर प्रवेश करने से रोकना केवल मिथक हैं, जिन्हें अब तोड़ना ज़रूरी है।"
लड़कियों और लड़कों-दोनों की सोच में बदलाव
'सच्ची सहेली' की कार्यशालाएं न केवल लड़कियों बल्कि लड़कों को भी पीरियड्स की सही जानकारी देती हैं। उनका फोकस सिर्फ सैनिटरी पैड या ब्लीडिंग पर नहीं, बल्कि पूरे मासिक चक्र की समझ विकसित करने पर है-जैसे साइकल गिनना, सामान्य व असामान्य रक्तस्राव को पहचानना और शरीर में होने वाले बदलावों को जानना।
डॉ. सुरभि का स्पष्ट मानना है, "चुप्पी सबसे बड़ा अपराध है। सही उम्र पर सही जानकारी देना ही बच्चों को भ्रम और ग़लत जानकारी से बचा सकता है।"
स्कूलों में पहुंची पीरियड एजुकेशन
दिल्ली के शिक्षा विभाग और नगर निकायों के सहयोग से, उन्होंने स्कूलों में वर्कशॉप्स शुरू कीं जहाँ पैड-किट्स वितरित की जाती हैं। इसमें अंडरवियर, सैनिटरी पैड्स, डिस्पोज़ेबल बैग्स और जानकारी से भरी पर्चियां शामिल होती हैं। इन सत्रों ने कई बच्चों के लिए पीरियड्स को समझने और स्वीकारने की दिशा में बड़ा बदलाव लाया है।
'Pad-Yatra': जब सड़कों पर उतरी आवाज़
डॉ. सुरभि द्वारा शुरू की गई 'Pad-Yatra' एक क्रांतिकारी पहल रही है। यह शब्द 'पदयात्रा' और 'Pad' का क्रिएटिव मेल है, जहां लोग सड़कों पर उतरकर पीरियड्स पर चुप्पी के खिलाफ मार्च करते हैं। इस आंदोलन में समाज के हर वर्ग के लोग शामिल होते हैं और यह मंच बन जाता है अनुभव साझा करने, मिथक तोड़ने और जागरूकता फैलाने का।
कला और संस्कृति के ज़रिए बदलाव
'सच्ची सहेली' नुक्कड़ नाटक, संगीत, डांस और थियेटर जैसे रचनात्मक माध्यमों से भी समाज की सोच में बदलाव ला रही है। मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर जैसी हस्तियां भी इस पहल का हिस्सा बन चुकी हैं, जिससे इसकी पहुंच और प्रभाव और भी बढ़ा है।
एक नारी, एक मिशन
डॉ. सुरभि सिंह का संकल्प और समर्पण इस बात का प्रमाण है कि एक व्यक्ति भी बदलाव की बड़ी लहर ला सकता है। माहवारी से जुड़ी वर्जनाओं को खत्म करने और बच्चों, किशोरों व महिलाओं को सशक्त बनाने का उनका प्रयास आज लाखों लोगों के लिए आशा की रोशनी बन चुका है।



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