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Paris Olympic 2024: जानें इतने सालों में कितना बदल गया है ओलंपिक मेडल? यहां जानें इसका रोमांचक सफर
History Of Olympic Medals Designs :खेलों का महाकुंभ कहा जाने वाले ओलंपिक की शुरूआत में चंद घंटे ही बचे हैं। इस बार इस टूर्नामेंट का आयोजन फ्रांस की राजधानी पेरिस में हो रहा है, जहां दुनिया भर के 10000 से ज्यादा एथलीट अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने और स्वर्णिम पदक जीतने के लिए तैयार हैं। भारत के 117 खिलाड़ी भी इसमें भाग लेंगे।
इन ओलंपिक खेलों में दिए जाने वाले मेडल बहुत खास होते हैं, और खिलाड़ी का सपना होता है, इन्हें अपने गले में पहनने का। खिलाड़ी की मान और गरिमा से जुड़े ये मेडल बहुत खास होते हैं। वैसे आपको बता दें कि हर ओलंपिक में इनकी डिजाइन में कुछ बदलाव होते हैं। ये बदलाव ओलंपिक संस्था और आयोजक देश के मद्देनजर किए जाते हैं। आज हम आपको इन मेडल से जुड़ा इतिहास और इनके बदलावों के बारे में बताएंगे।

पेरिस ओलंपिक मेडल का इस बार डिजाइन
इस बार पेरिस ओलंपिक मेडल को हेक्सागॉन (षट्भुज) आकार में डिजाइन किया गया है, जो फ्रांस के मानचित्र के छह कोनों को रिप्रजेंट करते हैं। प्रत्येक मेडल में एफिल टॉवर में इस्तेमाल लोहे का एक टुकड़ा जड़ा गया है, जो फ्रांस के इतिहास और स्थायित्व का प्रतीक है। ये टुकड़े दशकों से एफिल टॉवर के नवीनीकरण और रखरखाव के दौरान हटाए गए लोहे के संग्रह से लिए गए हैं। प्रत्येक टुकड़े को उसके मूल रंग में बहाल किया गया है और यह मेडल के केंद्र में बखूबी जड़ा हुआ है।
पूरे सोने से नहीं बना होता है मेडल
आपको बता दें कि 1912 में स्टॉकहोम में आयोजित ओलंपिक खेलों में आखिरी बार ठोस सोने के पदक दिए गए थे। अब ओलंपिक का गोल्ड मेडल शुद्ध सोने से नहीं बनता है। यह 92.5% चांदी और 1.34% सोने का बना होता है। इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) के दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रत्येक स्वर्ण पदक में कम से कम 6 ग्राम सोना होना चाहिए। पेरिस में प्रत्येक स्वर्ण पदक का वजन 529 ग्राम होगा।

ऐसा रहा है ओलपिंक मेडल का सफर
- प्राचीन ओलंपिक खेलों में विजेता को 'कोटिनोस' या जैतून के फूलों का हार पहनाया जाता था, जिसे यूनान में पवित्र पु और यह सर्वोच्च सम्मान का प्रतीक माना जाता था।
- 1896 को ओलंपिक खेलों के पुनर्जन्म का साल माना जाता है। एथेंस में विजेताओं को सिल्वर, जबकि उपविजेता को कॉपर (तांबा) या ब्रॉन्ज (कांस्य) का पदक दिया जाता था। मेडल में देवताओं के पिता जीउस के साथ देवी नाइक की तस्वीर थी।
- 1904 में सेंट लुई खेलों में पहली बार विजेताओं को गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल वितरित किए गए थे। ये मेडल यूनानी पौराणिक कथाओं के शुरुआती तीन युगों का प्रतिनिधित्व करते थे। इसके बाद मेडल के आकार, आकृति और वजन में काफी बदलाव होता रहा।
- इसके बाद 1928 में इटली के कलाकार ज्युसेपी केसियोली ने ओलंपिक मेडल को डिजाइन किया था। 2004 ओलंपिक तक इन ही मेडल का इस्तेमाल होता रहा।
- 2004 एथेंस ओलंपिक में मेडल की डिजाइन में बदलाव हुए, इस बार इसके अगले भाग में देवी नाइक का एक नया डिजाइन था, जो 1896 पैनाथेनिक स्टेडियम में विजेता को जीत दिलाने के लिए उड़ान भरते हुए नजर आ रही थी।
- ओलंपिक खेलों में मेडल रीसाइकल दौर से भी गुजरे हैं, 2016 रियो खेलों में, पर्यावरण जागरूकता को देखते हुए, आयोजकों ने मेडल में 30% रीसाइकल्ड धातु का उपयोग किया था, बाद में 2020 में टोक्यो ओलंपिक ने भी यही कदम उठाया था।



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