Latest Updates
-
Ambedkar Jayanti Quotes 2026: ‘नारी को शिक्षित करो' भीमराव अंबेडर जयंती पर शेयर करें उनके ये 20 विचार -
Baisakhi 2026 Wishes in Punjabi: बैसाखी पर भंगड़ा और गिद्दा के साथ अपनों को भेजें पंजाबी शुभकामनाएं -
सपने में शादी देखना क्या देता है संकेत? शुभ खबरी या किसी बदलाव का इशारा, जानें इसका मतलब -
बैसाखी पर गुड़ के टुकड़े का यह अचूक उपाय आपको बना सकता है मालामाल, जानें करने की सही विधि -
क्या होती है पार्किंसंस की बीमारी? जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव के उपाय -
क्यों मनाई जाती है बैसाखी? जानें खालसा पंथ के '5 प्यारों' की कहानी, जिन्होंने हिलाई मुगलों की नींव -
Varuthini Ekadashi Vrat Katha: वरुथिनी एकादशी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा 10 हजार साल की तपस्या जितना फल -
Varuthini Ekadashi 2026 Wishes: श्रीहरि विष्णु है जिनका नाम...वरुथिनी एकादशी पर अपनों को भेजें ये शुभकामनाएं -
Varuthini Ekadashi 2026 Sanskrit Wishes: वरुथिनी एकादशी पर दिव्य संस्कृत श्लोकों सें दें अपनों को शुभकामनाएं -
Aaj Ka Rashifal 13 April 2026: वरूथिनी एकादशी पर सिंह-तुला की चमकेगी किस्मत, ये 3 राशियां रहें सावधान
कब मनाया जाएगा बंगाली नव वर्ष? जानें 'पोइला बैसाख' मुगल काल से क्या है कनेक्शन?
Poila Baisakh 2026: बंगाली लोगों के लिए पोइला बैसाख का दिन बहुत ही खास होता है। इसे 'पोहेला बोइशाख' भी कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है बैसाख महीने का पहला दिन। बंगाली समुदाय में न सिर्फ इसे नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है बल्कि ये नई उम्मीदों और नई शुरुआत और खुशियों का महापर्व भी है। साल 2026 में बंगाली नव वर्ष 15 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा। आइए जान लेते हैं इस खास दिन का महत्व, इतिहास और बंगाली समुदाय के लिए ये दिन क्यों है इतना खास...

कैसे मनाया जाता है बंगाली नववर्ष?
इस दिन पूरा बंगाल "शुभो नोबो बोरसो" नया साल मुबारक हो की गूंज से सराबोर रहता है। घरों में सुंदर 'अल्पना' (रंगोली) सजाई जाती है और पारंपरिक पकवानों की महक वातावरण को खुशनुमा बना देती है। व्यापारिक दृष्टिकोण से भी यह दिन ऐतिहासिक है, क्योंकि इसी दिन से व्यापारियों का नया बहीखाता यानी 'हाल खाता' शुरू होता है। यह दिन सौर कैलेंडर के आधार पर तय होता है और भारत के अन्य हिस्सों में मनाए जाने वाले बैसाखी, विशु और पुथंडु के साथ मेल खाता है।
पोइला बैसाख का इतिहास
पोइला बैसाख की शुरुआत के पीछे एक दिलचस्प ऐतिहासिक कहानी है। माना जाता है कि इसकी शुरुआत मुगल बादशाह अकबर के शासनकाल में हुई थी। उस समय इस्लामी हिजरी कैलेंडर का पालन होता था, जो खेती के चक्र से मेल नहीं खाता था। किसानों को टैक्स देने में आसानी हो, इसके लिए अकबर ने एक नया सौर कैलेंडर विकसित करवाया, जिसे 'बंगाल अब्द' कहा गया। तब से ही फसल कटाई के समय को बंगाली नव वर्ष के रूप में मनाया जाने लगा।
'हाल खाता' क्या है जब होती है व्यापारियों की नई शुरुआत
बंगाली समुदाय में पोइला बैसाख का सबसे महत्वपूर्ण पहलू 'हाल खाता' है। इस दिन दुकानदार और व्यापारी अपने पुराने हिसाब-किताब को बंद कर नए लाल रंग के बहीखाते (हाल खाता) की शुरुआत करते हैं। व्यापारी भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं और अपने पुराने ग्राहकों को आमंत्रित कर उन्हें मिठाई और उपहार भेंट करते हैं। यह व्यापारिक रिश्तों में मधुरता लाने की एक पुरानी रीत है।
इन दिन होता है सांस्कृतिक उत्सव
बंगाल के समुदाय के लोगों के लिए पोइला बैसाख का दिन बहुत ही खास होता है। इस दिन बंगाल में सुबह के समय प्रभात फेरी और मंगल शोभायात्रा निकाली जाती है। लोग पारंपरिक वेषभूषा में आते हैं। साथ ही दिन को खास बनाने के लिए इस दिन 'पांता भात' (Panta Ilish), 'रसगुल्ला', 'संदेश' और 'मछली' के विभिन्न व्यंजन खास तौर पर बनाए जाते हैं।



Click it and Unblock the Notifications











