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क्या आप तो नहीं मानते इन अंधविश्वास की बातो को?
बचपन से ही हमें कुछ ऐसी मान्यताओं के बारे में बताया जाता रहा है, जिन्हे हम अंधविश्वासों की तरह मानते चले आ रहे हैं। मजे की बात तो यह है कि हम खुद भी यह जानते हैं कि यह सिर्फ अंधविश्वास हैं, लेकिन फिर भी हम इन्हें मानते हैं।
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अंधविश्वास ज्यादा कुछ नहीं बस वह डर है जिसके चलते हम कुछ रस्मों को करने लगते हैं। ज्यादातर अंधविश्वास निराधार होते हैं जिन पर हम आँख बंद कर के विश्वास कर लेते हैं। जिनका वास्तिविकता से दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं होता है।
भारत एक ऐसा देश है जहाँ आज के तकनीकी युग में भी लोगों द्वारा कई अन्धविश्वास की बातें मानी जाती हैं। हम भारतीय खुद को कई बार अंधविश्वासों और तकनीकी युग के बीच खड़े हुए पाते हैं।
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इन अंधविश्वासों पर सवाल उठाना हमारे लिए बहुत ही जरूरी बनता जा रहा है। तो क्या आप अंधविश्वासी हैं? इसका पता लगाना बहुत आसान है। अगर आप नीचे दी हुई किसी भी चीज़ को मानते या मरते हैं, तो आप सच मुच अंधविश्वास को बढ़ावा दे रहे हैं।

मंगलवार को बाल नहीं काटते
पहले सोमवार छुट्टी होती थी तो सब लोग उसी दिन बाल कटा लेते थे, इसलिए मंगलवार को कोई भी ग्राहक नहीं होते थे जिसके चलते सैलून बंद रहते हैं। यह परम्परा आज भी है। जब की अब छुट्टी संडे को होती है लेकिन आज भी लोग मंगलवार को बाल नहीं काटते हैं।

घर के अंदर छाता नहीं खोलते
छाता खोलने के लिए ज्यादा जगह की जरुरत होती है और घर के अंदर खोलने से सामान टूट सकता है। यही कारण था कि छाता घर के अंदर नहीं खोला जाता है। लेकिन लोग आज भी इसे वैसे ही मानते हैं।

नींबू और मिर्च
इस अंधविश्वास को "नींबू टोटका" भी कहते हैं। आपने देखा होगा कि इसे लोग अपने वाहनों और घर के दरवाज़े पर बांधते हैं। एक अध्यन से यह साबित हुआ है कि जिस धागे से नींबू और मिर्च बाधें जाते हैं वह उनकी तीखी गंध ऐब्सॉर्ब कर लेता है जिससे वह मच्छरों और कीड़ों को दूर रखने में मदद करता है। इसलिए यह कोई बुरी आत्मा को दूर नहीं करता है यह सिर्फ एक मिथक है।

शीशा टूटना बुरा होता है
पुराने दिनों में शीशे काफी महंगे होते थे, साथ उनकी गुणवत्ता भी कम होती थी। शीशे को टूटने से बचाने के लिए उन्होंने लोगों को बेवकूफ बनाना शुरू कर दिया कि शीशा टूटने से उन्हें सात साल के लिए दुर्भाग्य झेलना पड़ेगा।

सूर्यास्त के बाद नाखून नहीं काटने चाहिए
पहले सूर्यास्त के बाद नाखून या बाल काटना बहुत बड़ी बात होती थी, क्योंकि अँधेरे में यह कार्य करते वक़्त घाव हो सकते थे। यही कारण था जिसकी वजह से सूर्यास्त के बाद नाखून और बाल नहीं काटे जाते थे।

ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को बहार नहीं जाना चाहिए
गर्भवती महिलाओं के ऊपर वैसे तो काफी सारे प्रतिबंध होते हैं जिसमें से एक है ग्रहण के दौरान बाहर नहीं जाना। यही नहीं इस समय उन्हें सब्ज़ी भी नहीं काटनी चाहिए। लेकिन इसका वास्तविक कारण यह है वे यूवी किरणे जो भ्रूण को नुक्सान पंहुचा सकती हैं।

शाम को झाडू लगाना
पहले के जमाने में ज्यादा बिजली आदि ना होने के कारण घरों में रौशनी नहीं होती थी। जिसके चलते अगर कोई गहना और आभूषण अनजाने में नीचे गिर जाए तो वह शाम को झाडू लगाने की वजह से खो जाया करते थे।



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