Latest Updates
-
आपकी जीभ देगी Fatty Liver के संकेत? एक्सपर्ट से जानें पहली स्टेज के 5 शुरुआती लक्षण -
Brinjal Benefits: छोटे, लंबे या सफेद बैंगन; जानें आपकी सेहत के लिए कौन सा है सबसे बेस्ट? -
Babu Jagjivan Ram Jayanti: राजनीति के 'चाणक्य' थे बाबू जगजीवन राम, जयंती पर पढ़ें उनके अनमोल विचार और संदेश -
Happy Easter Wishes Jesus: प्रभु यीशु के पुनर्जन्म की मनाएं खुशियां, अपनों को भेजें ईस्टर संडे के संदेश -
Aaj Ka Rashifal 5 April 2026: मकर और कुंभ राशि वालों को मिलेगा सरप्राइज, सिंह राशि वाले रहें सावधान -
Samudrik Shastra: दांतों के बीच का गैप शुभ होता है या अशुभ? जानें क्या कहता है सामुद्रिक शास्त्र -
रास्ते में अर्थी दिखना शुभ होता है या अशुभ? जानें शवयात्रा दिखने पर क्या करना चाहिए -
Sweet vs Bitter Cucumber: काटने से पहले ऐसे पहचानें खीरा कड़वा है या मीठा? अपनाएं ये 4 जादुई ट्रिक्स -
काले होठों से हैं परेशान? इन 5 देसी नुस्खों से घर बैठे लिप्स को बनाएं गुलाबी -
Varuthini Ekadashi 2026: 13 या 14 अप्रैल कब है वैशाख की पहली एकादशी? जानें भगवान विष्णु की पूजा विधि
जानिये मोमोज़ की कहानी: नॉर्थ ईस्ट की यह डिश कैसे बन गई इतनी पॉपुलर
मोमोज़ एक ऐसी डिश है जिसे एक बार खाने पर दिल बार बार उसी को चाहता है। यह ना केवल दिल्ली और लखनऊ में ही फेमस है बल्कि साउथ में भी लोग इसे बड़ी अच्छी तरह से पहचानने लगे हैं। आप इन्हें सड़कों पर भी बिकता हुआ देख सकते हैं और बडे़-बडे़ रेस्ट्रॉन्ट्स में भी।
बिना तेल-मसाले की यह डिश स्टीम में पकाई जाती है इसलिये शायद यह सभी के दिल पर राज करती है। पर क्या आपने सोंचा है कि पूरे भारत में बिकने वाला मोमोज़ भला यहां तक पहुंचा कैसे? लोग मानते हैं कि मोमोज़, नॉर्थ ईस्ट का खाना है, जहां से यह आया है।
मोमोज़ तिब्बत और नेपाल की पारंपरिक डिश है जहां से यह आई। लेकिन नॉर्थ ईस्ट में शिलांग एक ऐसी जगह है जहाँ अन्य राज्यों की तुलना में सबसे स्वादिष्ट मोमो बिकते हैं। यहां पर मीट से तैयार किये मोमो ज्यादा खाए जाते हैं।
शिलांग में मोमोज़ एक चीनी समुदाय दृारा लाया गया था, जो चीन से आ कर शिलांग में बस गया था। और फिर उसी समुदाय ने चाइनीज़ फूड, जिसमें खास तौर पर मोमोज़ (पारंपरिक तिब्बती) की शुरुआत की।

मोमो का मतलब
मोमो एक चाइनीज़ शब्द है जिसका मतलब है भाप में पकी हुई रोटी

इन लोगों का अहम आहार है मोमोज़
वहीं दूसरी ओर मोमोज़, अरुणाचल प्रदेश के मोनपा और शेरदुकपेन जनजाति, जिसका बॉर्डर पूरी तरह से तिब्बत से जुड़ा हुआ है, उनके आहार का भी एक अहम हिस्सा है। इन जगहों पर मोमोज़ की फिलिंग में पोर्क और सरसों की पत्तियां तथा अन्य हरी सब्जियां भर कर डाली जाती हैं और फिर इसे तीखी मिर्च के पेस्ट के साथ सर्व किया जाता है।

सिक्किम तक कैसे पहुंचा मोमोज़
अब आइये बात करते हैं कि मोमोज़ सिक्किम तक कैसे पहुंचा? यहां पर मोमोज़, भूटिया, लेपचा और नेपाली समुदायों की वजह से पहुंचा, जिनके आहार का हिस्सा मोमोज़ रहा करता था। सिक्किम में जो मोमोज़ बनाए जाते हैं, वह तिब्बती मोमोज़ जैसा ही होता है। 1960 के दशक में बहुत भारी संख्या में तिब्बतियों ने अपने देश से पलायन किया, जिसकी वजह से उनकी कुज़ीन भारत के सिक्किम, मेघालय, पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग और कलिमपोंग के पहाड़ी शहरों और दिल्ली तक पहुंच गई।

किस चीज़ की होती है फिलिंग
सिक्किम में बीफ और पोर्क मोमोज़ में भरने के लिये एक पारंपरिक चीज़ मानी जाती है। लेकिन यहां का क्राउड तो चिकन, वेजिटेबल और चीज़ से भरे मोमोज़ का खासा दीवाना है।

मोमो या डिमसम ?
जहां मोमो नेपाल, तिब्बत और भूटान में मोमोज़ के नाम से जाना जाता है वहीं मोमोज़ चाइना में अलग नाम "डिमसम" के नाम से जाना जाता है। चाइनीज़ डिमसम में सूअर का मांस,बीफ, झींगा, सब्जियां और टोफू आदि भरे जाते हैं।

कैसा होता है तिब्बत का मोमो
तिब्बत में तिब्बत को स्टीम और फ्राई, दोनों प्रकार से बनाया जाता है और फिर इन्हें गरम तेल में टमाटर, अदरक, लहसुन और सूखी लाल मिर्च डाल कर फ्राई कर के पेस्ट बना कर गरमा गरम सॉस के रूप में सर्व किया जाता है। तो अगर तिब्बती इसी चीज़ को मोमोज़ कहते हैं, तो वहीं चाइनीज़ इसे डिम सम कह कर पुकारते हैं।

भूटान में मोमोज़ कहां से आए?
भूटान में मोमोज़ तिब्बती समुदायों द्वारा लोकप्रिय बना। जब मोमोज़ यहां आया तो यहां के लोगों ने उसे अपना ही आकार और टेस्ट दे दिया। यहां पर मोमोज़ में ज्यादातर याक का मांस या बीफ का उपयोग भरावन के लिये किया जाता है। शाकाहारियों के लिये प्याज, पनीर, चीज़ बंद गोभी, मशरूम, आलू और पालक आदि का उपयोग होता है।

मोमोज़ कैसे बनते हैं इतने टेस्टी?
मोमोज़ को जो चीज़ सबसे ज्यादा टेस्टी बनाती है वह है, इसे बनाने का तरीका और इसमें पड़ने वाली सामग्री। अगर आटा ताजा और अच्छी क्वालिटी का है तो आपके मोमोज अच्छे ही बनेंगे। कई लोग आटा गूथने के लिये हल्के गरम पानी का प्रयोग करते हैं। इसमें भरने वाली सामग्री को बारीकट काट कर अदरक और लहसुन के साथ मिलाना चाहिये।



Click it and Unblock the Notifications











