Makaravilakku Festival 2023 खुले अय्यप्पा मंदिर के पट,जानिए पहाड़ी की ज्वाला देखने के लिए क्यों उमड़ती है भीड़

केरल में मकर संक्रांति के दिन हजारों की संख्या में भक्त सबरीमाला मंदिर में आयोजित होने वाले वार्षिक उत्सव, मकरविलक्कू महोत्सव में शामिल होने के लिए इकट्ठे होते हैं। मकरविलक्कू उत्सव 14 जनवरी को मनाया जाता है। भगवान अय्यप्पा की वार्षिक तीर्थयात्रा के अंतर्गत मकरविलक्कू उत्सव का आयोजन होता है जिसका काफी बड़ा महत्व है। इस उत्सव में थिरुवभरणम (भगवान अय्यप्पन के पवित्र आभूषण) जुलूस निकाला जाता है। इस अनुष्ठान के दर्शन के लिए भक्त हर साल सबरीमाला आते हैं। मकरविलक्कू उत्सव में मंदिर के कपाट खोल दिए जाते हैं।

जानते हैं मकरविलक्कू उत्सव के बारें में-

जानते हैं मकरविलक्कू उत्सव के बारें में-

मकरविलक्कू उत्सव केरल के सबरीमला मंदिर में मकर संक्रांति के दिन पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाने वाला उत्सव है। इस उत्सव के लिए हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मकरविलाक्कू उत्सव के शुभ दिन पर भगवान अयप्पा की मूर्ति मंदिर में स्थापित होती है। मूर्ति को शाही आभूषणों से बड़ी ही खूबसूरती के साथ सजाया जाता है। इस उत्सव की शुरूआत थिरुवाभरणम जूलूस यानि कि आभूषणों का जूलूस से होती है। सात दिन लंबा चलने वाला ये उत्सव ‘गुरुथी' नामक रस्म के साथ संपन्न होता है। जो जंगल के देवी देवताओं को प्रसन्न करने के लिए होता है।

मकर ज्योति क्या है ?

मकर ज्योति क्या है ?

सबरीमाला के भगवान अयप्पा के मंदिर में शुरू होने वाला सात दिवसीय उत्सव, जो मकर संक्रांति के दिन से शुरू होता है। इस उत्सव की शुरूआत एक तारा साइरस स्टार के दिखाई देने के बाद होती है। मकरविलक्कू, धार्मिक समारोह का एक अग्रदूत है, लेकिन कोई अलौकिक तत्व नहीं, बल्कि हजारों वर्षों से मलाया अरया आदिवासी जनजातियों के द्वारा पोन्नम्बलमेडु मंदिर में होने वाला अनुष्ठान में जलने वाली आग है। यहां का मंदिर आम जनता के लिए खुला नहीं हैं। मलाया अरया आदिवासी मंदिर में मूर्ति के चारों तरफ ज्वालासे आरती करते हैं, ठीक वैसे ही अनुष्ठान सबरीमाला के मंदिर में किया जाता है। आदिवासी एक जार में कपूर और घी के साथ मूर्ति की तीन बार परिक्रमा करते हैं। पोन्नम्बलमेडु में हुए इस अनुष्ठान में जलने वाली ज्वाला ही मकरविलक्कू है।

मकरविलक्कू का महत्व

मकरविलक्कू का महत्व

मकरविलक्कू को देखने के लिए हजारों श्रद्धालु सबरीमाला के मंदिर में आते हैं। कहते हैं कि मकर ज्योति को देखने से श्रद्धालुओं को पुण्य की प्राप्ति होती है।

मकरविलक्कू की पूजा डेट और टाइम

मकरविलक्कू की पूजा डेट और टाइम

मंदिर अधिकारियों के अनुसार, श्रद्धालु यात्रा से पहले वर्चुअल बुकिंग कर रहे हैं। यहां आने वाले भक्तों को मकरविलक्कू के दिन के 12 बजे तक ही सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की अनुमति होगी। वहींपूजा मकर संक्रांतिके दिन रात 8.45 बजे होगी।

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