Latest Updates
-
Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में खीर बनाते समय न करें ये गलती, नहीं तो नाराज हो सकते हैं पितर, जानें सही विधि -
Koffee With Karan 9: करण जौहर का ‘कॉफी विद करण’ 22 साल बाद होगा खत्म, जानें कब और कहां स्ट्रीम होगा आखिरी सीजन -
Jitiya Vrat 2026: कब है जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत? जानें सही तारीख, और नहाय-खाय से लेकर पारण तक का समय -
लाखों में बिकती है दुनिया की सबसे महंगी कॉफी, लेकिन बनाने का प्रोसेस जानकर फ्री में भी पीने से करेंगे तौबा! -
पाम ऑयल क्या होता है और इसे खाने से क्या नुकसान होते हैं? जानिए इससे शरीर पर क्या असर होता है -
October 2026 Vrat Tyohar List: नवरात्रि, दशहरा से करवा चौथ तक, यहां देखें व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट -
जुबिन नौटियाल बने पापा, पत्नी ने दिया बेटे को जन्म, गणेश चतुर्थी पर घर आया नन्हा मेहमान -
'मन की बात' में PM मोदी ने बताया क्यों इतना खास है आंवला, जानिए इसके 5 जबरदस्त फायदे और सेवन का सही तरीका -
World Heart Day 2026: क्रॉनिक स्ट्रेस बन सकता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह, डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके -
Pitru Paksha 2026: गया जी के इस मंदिर में जिंदा लोग खुद करते हैं अपना पिंडदान, बेहद अनोखी है मान्यता
World Braille Day: कौन थे लुईस ब्रेल, खुद ब्लाइंड होकर भी नेत्रहीनों के लिए किया ब्रेल लिपि का अविष्कार
'ब्रेल' स्क्रिप्ट का नाम उसके बनाने वाले लुई ब्रेल के नाम पर रखा गया है। 4 जनवरी को हर साल उनके जन्मदिन पर इस दिन को सेलिब्रेट किया जाता है। लुईस ब्रेल एक फ्रांसीसी थे, लुईस ब्रेल का जन्म सन 1809, को पेरिस के नजदीक कूपव्रे में हुआ था। जब वे बच्चे थे तब उन्होंने अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी। अपने पिता की दुकान पर औजारों के साथ खेलते वक्त एक औजार उनकी आंखों पर गिर गया, जिसकी वजह से उनकी आंखों की रोशनी चली गई। इस घटना के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और 10 साल की उम्र से, फ्रांस में रॉयल इंस्टीट्यूट फॉर ब्लाइंड यूथ में एडमीशन लिया। जहां पर उन्होंने उभरे हुए डॉट्स की प्रणाली को बनाया और सिद्ध किया जो ब्रेल लिपि कहलाई।

लुई ब्रेल ने 6 डॉट्स आधारित एक कोड को डेवलप किया
लुई ब्रेल ने 6 डॉट्स आधारित एक कोड को डेवलप किया। इस कोड को बनाने के बाद धीरे-धीरे ये नेत्रहीन लोगों में फेमस होने लगी। लेकिन ये दुर्भाग्य रहा कि ब्रेल इस प्रसिद्धि को नहीं देख सके कि उनका ये अविष्कार पूरी दुनिया में नेत्रहीन लोगों के लिए वरदान बन चुका है। रॉयल इंस्टीट्यूट द्वारा ब्रेल पढ़ाना शुरू करने से दो साल पहले 1852 में उनका निधन हो गया।
लुई ब्रेल की इस मदद की वजह से नेत्रहीनों पढ़ने-लिखने के रास्ते खुल गये। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा इसको मान्यता दे दी गई। नवंबर 2018 में, 4 जनवरी को विश्व ब्रेल दिवस घोषित किया गया। जिसके बाद हर साल विश्व ब्रेल दिवस मनाया गया और इसे अंतर्राष्ट्रीय अवकाश के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है।

लुई ब्रेल की किताब को यूरोप के नेत्रहीनों के लिए स्कूलों में अपनाया
यूएनजीए द्वारा उद्घोषणा के माध्यम से चुनी गई घटना की तारीख, लुई ब्रेल के जन्मदिन का प्रतीक है।
1829 में, ब्रेल ने अपनी इस प्रणाली के बारें में एक पुस्तक प्रकाशित की, और ये जल्द ही पूरे यूरोप के नेत्रहीनों के लिए स्कूलों द्वारा अपनाया गया। इसके बाद ब्रेल प्रणाली को संशोधित किया गया है। इसमें म्यूजिक, गणित को शामिल करने के लिए और विस्तार किया गया। आज ब्रेल लैंग्वेज को दुनियाभर में नेत्रहीनों के द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। आज के टाइम में नेत्रहीन लोग स्क्रीन रीडर, और अन्य सॉफ़्टवेयर भी यूज कर सकते हैं, क्योंकि टेक्नोलॉजी की मदद से इस लिपि को और अधिक डेपलप किया गया है। लोग कंप्यूटर और इंटरनेट का उपयोग भी कर सकते है। अंधे और दृष्टिबाधित लोगों के लिए पढ़ने और लिखने की क्षमता, और समाज में पूरी तरह से भाग लेने की क्षमता और विश्वास को जगाता है।

संगीत में नेत्रहीन संगीतकार इस्तेमाल करते हैं ब्रेल एल्फाबेट
नेत्रहीन संगीतकारों को ब्रेल में संगीत पढ़ना सीखने से बहुत फायदा हुआ है। ब्रेल संगीत छह-डॉट सेल का यूज करते हैं। इसमें अपने सिंटैक्स और अनुवाद भी शामिल होते हैं।

ब्रेल कोई भाषा नहीं है
ब्रेल एक एल्फाबेट है जिसका यूज किसी भी भाषा में इस्तेमाल के लिए किया जाता है। ये अरबी, चीनी, हिब्रू, स्पेनिश और हिंदी, फ्रेंच में भी उपलब्ध हैं।

गणित और विज्ञान के लिए नेमेथ कोड
विशेष रूप से गणित और विज्ञान के लिए ब्रेल का एक विशेष संस्करण है, जिसे नेमेथ कोड कहते हैं।

ब्लाइंड बच्चों के लिए ब्रेल में खिलौनें
यूनो, मोनोपॉली व लेगो जैसे क्लासिक्स ब्रेल संस्करणों में उपलब्ध हैं।



Click it and Unblock the Notifications
