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World Hindi Day 2023: वर्ल्ड की टॉप यूनिवर्सिटीज से लेकर कई देशों की ऑफिशियल लैंगवेज हैं हिंदी
'निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।'
-भारतेंदु हरिश्चंद्र
जब तक हर हिंदी भाषी इस लाइन का मतलब नहीं समझता वो अपनी भाषा के प्रति लगाव महसूस नहीं कर सकता है। ये लाइन हिंदी भाषा के महान लेखक भारतेंदु हरिश्चंद्र के द्वारा लिखी गई है जो उनकी कविता से ली गई है।
हिंदी दुनियाभर में 26 करोड़ से अधिक लोगों द्वारा बोली जाने वाली एक इंडो -आर्यन भाषा है। ये दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली लैंग्वेज है। हिंदी भारत सरकार की राजकीय भाषा है और अंग्रेजी के साथ भारत की दो आधिकारिक भाषाओं में से एक है।
आज 9 जनवरी को पूरे वर्ल्ड में विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। हिंदी एक ऐसी भाषा है जो विश्व के लगभग 600 मिलियन से अधिक लोगों के द्वारा बोली जाती है। अंग्रेजी और चाइनीज लैंग्वेज के बाद बोली जाने वाली भाषा हिंदी है। हिंदी भारत सरकार की आधिकारिक भाषा भी है। ये बात विशेष रूप से उल्लेख कर दें कि संविधान ने हिंदी को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा नहीं दिया गया है।

अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में हिंदी को गौरव मिला
आज दुनियाभर में एक अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में हिंदी को गौरव मिला हुआ है। हिंदी के महत्व और अधिक बताने के लिए इस दिन विशेष रूप से विदेशों में भारतीय दूतावासों द्वारा सेलिब्रेट किया जाता है।
वर्ल्ड की टॉप यूनिवर्सिटीज में हिंदी भाषा पर होती है रिसर्च-
आज के वक्त में हिंदी के महत्व को इस बात से जान सकते हैं कि वर्ल्ड की टॉप मोस्ट यूनिवर्सिटीज में हिंदी भाषा पढ़ाई जाती है, इसके साथ ही उस पर रिसर्च भी होती है। यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन. यूनिवर्सिटी और शिकागो, यूनिवर्सिटी ऑफ वांशिंगटन में हिंदी भाषा को विदेशी छात्र पढ़ते हैं और उस पर पीएचडी भी करते हैं।

आइये जानते हैं वर्ल्ड हिंदी डे की शुरूआत कैसे हुई-
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने साल 1975 में सबसे पहला विश्व हिंदी सम्मेलन का उद्घाटन किया था। इस सम्मेलन के बाद ही भारत के साथ ही अमेरिका, यूनाइटे किंगडम, मॉरीशस, त्रिनिदाद व टोबैगो कई अन्य देशों ने भी विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया। इसके बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के द्वारा साल 10 जनवरी 2006 को विश्व हिंदी दिवस पहली बार सेलिब्रेट किया गया। इस दिन के बाद से हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में आधिकारिक कामकाज के लिए हिंदी भाषा
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने भारत के हिंदी भाषा के प्रस्ताव को मंजूरी मिली हुई है। जिसके तहत यूनाइटेड नेशन में भी सभी आधिकारिक कामकाज और जरूरी संदेश हिंदी भाषा में जारी हो रहे हैं। भारत ने इसके लिए काफी प्रयास किये थे। साल 2018 में हिंदी @ UN' को प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। जिसका लक्ष्य हिंदी भाषा को यूनाइटेड नेशन की सार्वजनिक पहुंच तक ले जाना है। इसके साथ ही दुनिया भर में हिंदीभाषी लोगों को ज्यादा से ज्यादा सामाग्री (Content) देना था।
लेकिन यूनाइटेड नेशन में अभी भी अरबी, चीनी, अंग्रेजी, फ्रेंच, रूसी और स्पेनिश ये 6 आधिकारिक भाषाएं हैं, जिसमें अंग्रेजी और फ्रेंच मुख्य भाषाएं हैं, भारत इस प्रयास में काफी सालों से है कि 600 मिलियन से अधिक लोगों के द्वारा बोली जानी भाषा संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा में शामिल नहीं है।

अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को हिंदी में किया था संबोधित
4 अक्टूबर 1977 को विदेशमंत्री के रूप में संयुक्त राष्ट्र महासभा अटल बिहारी वाजपेयी ने हिंदी में संबोंधित करके सबसे चौंका दिया था। उनका ये भाषण पहले अंग्रेजी में लिखा गया था, लेकिन, उन्होंने उसका हिंदी अनुवाद संयुक्त राष्ट्र में पढ़ा। हिंदी में पढ़ा गया उनका ये भाषण इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरो में दर्ज किया गया। अटल बिहारी वाजपेयी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यूनाइटेड नेशन में अपना अभिभाषण हिंदी भाषा में ही देना पसंद करते हैं और देश को गौरवनित महसूस कराते हैं।

विश्व प्रवासी दिवस 2023 में हिंदी भाषी देशों के राष्ट्रध्यक्षों का स्वागत
विश्व प्रवासी दिवस 2023 इंदौर में हो रहा है। यहां पर सूरीनाम के राष्ट्रपति चंद्रिकाप्रसाद संतोखी प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आए हैं। सूरिनाम देश जो दक्षिण अमेरिका का उत्तरपूर्वी अटलांटिक तट पर बसा है, एक डच कंट्री है, लेकिन यहां पर हिदी का बोलबाला है। यहां पर हिंदी दूसरे नंबर पर बोली जाने वाली भाषा है। यहां के राष्ट्रपति चंद्रिकाप्रसाद संतोखी एक प्रवासी भारतीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वहीं डॉ. मोहम्मद इरफ़ान अली जो कोऑपरेटिव गणराज्य गुयाना के राष्ट्रपति हैं, इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। ये भी

भारत के अलावा एक देश जिसकी आधिकारिक भाषा है हिंंदी
फ़िजी देश जो एक साउथ पेसेफिक ओशन के मेलोनेशिया का द्वीप देश है। यहां की आधिकारिक भाषा हिंदी है। फिजी देश भी भारत की तरह ही अंग्रेजों का गुलाम देश रहा है। उपनिवेश के वक्त ब्रिटिश सरकार के द्वारा यहां पर भारतीय मजदूरों को ठेके पर गन्ने की खेती पर काम के लिए मजदूरी करवाई जाती थी। फ़िजी में अवधी बोली का काफी प्रभाव है।



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