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Ambedkar Controversy: राहुल गांधी नीले कपड़ों में पहुंचे संसद; क्यों इस रंग को दलितों से जोड़ा जाता है?
संसद के शीतकालीन सत्र का गुरुवार को 19वां दिन बाबा साहेब अंबेडकर के अपमान को लेकर जारी विवाद से गर्म रहा। जिसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने नीले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे। दरअसल नीला रंग अक्सर दलित आंदोलन और अंबेडकरवादी विचारधारा से जुड़ा माना जाता है। कांग्रेस ने अंबेडकर के मुद्दे पर इस रंग के माध्यम से बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की।
आपने भी देखा होगा कि जब भी देश में दलित वर्ग किसी वजह से प्रदर्शन करते हैं, तो वो नीले रंग के कपड़े और हाथों में नीले रंग का झंडा लिये नजर आते हैं, ऐसे में सवाल उठता हैं कि आखिर क्यों नीला रंग दलित आंदोलन का प्रतीक क्यों बन गया है और इसे क्यों भीमराव अंबेडकर के विचारों से जोड़कर देखा जाता है। आइए जानते हैं-

नीले रंग की अवधारणा
नीले रंग आसमान का प्रतीक है, जो भेदभावरहित और समानता पर आधारित दुनिया का प्रतिनिधित्व करता है। यह बताता है कि सभी लोग आसमान के नीचे समान हैं। हालांकि, इस अवधारणा के पुख्ता प्रमाण नहीं हैं।
कैसे इस रंग को बाबा साहेब ने चुना
बी.आर. अंबेडकर ने अपनी पार्टी इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी की स्थापना के समय नीला रंग अपनाया, जो महाराष्ट्र के दलित वर्ग "महार" के झंडे से प्रेरित था। 2017 में "अर्थ" जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, अंबेडकर ने इसे दलित चेतना और समानता का प्रतीक माना। यह रंग दलित आंदोलन के प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाता है।
दलित समाज ने क्यों अपनाया नीला रंग
नीले रंग को दलित समाज ने अपनी अस्मिता और प्रतीक के रूप में इसलिए अपनाया क्योंकि बी.आर. अंबेडकर अक्सर नीले रंग का थ्री-पीस सूट पहनते थे। अंबेडकर, जिन्हें दलित समाज नायक मानता है, ने समाज को संगठित किया और उनकी आवाज को बुलंद किया। उनकी मूर्तियां, जो देशभर में स्थापित हैं, उन्हें नीले रंग के सूट और हाथ में संविधान की प्रति के साथ दिखाती हैं। यह नीला रंग अंबेडकर के व्यक्तित्व और उनके संघर्ष का प्रतीक बन गया।
अंबेडकर के साथ इस रंग के जुड़ाव ने इसे दलित समाज द्वारा अंगीकृत कर लिया। दलित चिंतक भी मानते हैं कि अंबेडकर के नीले सूट का रंग दलित समाज के लिए प्रतिरोध और अस्मिता का प्रतीक बन गया। यह रंग समानता, न्याय, और अधिकारों के लिए उनकी लड़ाई को दर्शाता है और दलित समुदाय की पहचान का अभिन्न हिस्सा बन चुका है
अंबेडकर को नीला रंग क्यों पसंद था
अंबेडकर की नीले रंग की पसंद बौद्ध धर्म से जुड़ी हो सकती है, जहां इसे पवित्र माना जाता है। बौद्ध धम्म चक्र और अशोक चक्र भी नीले रंग के हैं। यह रंग उनके विचारों और उनके द्वारा दलित समाज के लिए प्रेरित संघर्ष का प्रतीक है, जो समानता और न्याय का संदेश देता है।



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