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90 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले इस मुल्क में है रामभक्त, हर शहर में होती है रामलीला
इंडोनेशिया एक ऐसा देश है जहां पर ज्यादा मुस्लिम आबादी होते हुए भी वहां हिंदू रीति-रिवाज व हिंदू संस्कृति मौजूद हैं। 90 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया पर रामायण की गहरी छाप है। आज भले ही इंडोनेशिया मुस्लिम बहुल देश हैं लेकिन एक जमाने में इंडोनेशिया हिंदू देश था। वहां खूब मंदिर थे। भगवान राम की पूजा होती थी। रामायण पढ़ी जाती थी।
अब भी इस देश में हर जगह हिंदू संस्कृति के दर्शन होते हैं। यहां अब 90 फीसदी आबादी मुस्लिम जरूर है लेकिन वो रामायण पढ़ते हैं। इसी वजह से यहां हर शहर में रामलीला का मंचन जरूर होता है, जिसमें मुस्लिम हिस्सा भी लेते हैं और बड़े चाव से इसे देखते भी हैं।

70 के दशक से रामायण का हो रहा है मंचन
इस देश में 70 के दशक से रामायण पर आधारित नृत्य नाटक चल रहा है, जो और कहीं नहीं होता। साल 1973 में यहां सरकार ने अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मलेन का आयोजन भी किया था। ये अपने आप में काफी अनूठा आयोजन था, क्योंकि घोषित रूप से कोई मुस्लिम राष्ट्र पहली बार किसी अन्य धर्म के धर्मग्रन्थ के सम्मान में इस तरह का कोई आयोजन कर रहा था। इंडोनेशिया में आज भी रामायण का इतना गहरा प्रभाव है कि देश के कई इलाकों में रामायण के अवशेष और पत्थरों तक की नक्काशी पर रामकथा के चित्र आसानी से मिल जाते हैं।
भारत और इंडोनेशिया की रामायण में अंतर है
भारत में राम की नगरी जहां अयोध्या है, वहीं इंडोनेशिया में यह योग्या के नाम से स्थित है। यहां राम कथा को ककनिन, या 'काकावीन रामायण' नाम से जाना जाता है। भारतीय प्राचीन सांस्कृतिक रामायण के रचियता आदिकवि ऋषि वाल्मिकी हैं, तो वहीं इंडोनेशिया में इसके रचयिता कवि योगेश्वर हैं। इंडोनेशिया की रामायण 26 अध्यायों का एक विशाल ग्रंथ है। इंडोनेशिया की रामायण में नौसेना के अध्यक्ष को लक्ष्मण कहा जाता है, जबकि सीता को सिंता कहते हैं।
इस रामायण में प्राचीन लोकप्रिय चरित्र दशरथ को विश्वरंजन कहा गया है और उन्हें शैव भी है, यानी की वे शिव के आराधक हैं। इंडोनेशिया की रामायण का आरंभ भगवान राम के जन्म से होता है, जबकि विश्वामित्र के साथ राम और लक्ष्मण के प्रस्थान में समस्त ॠषिगणों की ओर से मंगलाचरण किया जाता है और दशरथ के घर इस ज्येष्ठ पुत्र के जन्म के साथ ही हिंदेशिया का वाद्य यंत्र गामलान बजने लगता है।

सबसे लोकप्रिय पात्र है हनुमान
हनुमान तो इंडोनेशिया के सर्वाधिक लोकप्रिय पात्र हैं। हनुमान की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज भी हर साल इस मुस्लिम आबादी वाले देश के आजादी के जश्न के दिन यानी की 27 दिसंबर को बड़ी तादाद में राजधानी जकार्ता की सड़कों पर युवा हनुमान का वेश धारण कर सरकारी परेड में शामिल होते हैं। बता दें कि हनुमान को इंडोनेशिया में 'अनोमान' कहा जाता है।
अयोध्या से प्रेरित है इंडोनेशिया के शहर का नाम
इंडोनेशिया के एक बड़े शहर योग्यकर्ता का नाम अयोध्या के नाम पर पड़ा है। आदिपुराण में कहा गया है कि अयोध्या अपनी समृद्धि और कौशल के कारण प्रसिद्ध रहा है। इंडोनेशिया के शहर योग्यकर्ता का नाम भी अयोध्या से प्रेरित है। योग्य का मतलब होता है उपयुक्त यानी योग्य और कर्ता का मतलब समृद्धि बरसाने वाला। इस तरह योग्यकर्ता का नाम प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि के नाम पर रखा गया।
इंडोनेशिया में हिंदू आबादी कितनी
ये दुनिया का तीसरा सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है। इसके बाद भी यहां हिंदू धर्म के मानने वाले भी हैं। 2018 की जनगणना के मुताबिक देश में साढ़े 46 लाख से ज्यादा हिंदू रहते हैं, जबकि 2010 में ये करीब 40 लाख ही थे।
कितने हिंदू मंदिर है इस देश में
इंडोनेशिया की हिंदू आबादी पर दक्षिण का असर दिखता है। खासकर यहां के मंदिर उसी तर्ज पर बने हुए हैं। माना जाता है कि छोटे-बडे़ सब मिलाकर हजार से लेकर डेढ हजार तक टेंपल्स यहां बने हुए हैं। इनमें बाली और सुमात्रा में सबसे ज्यादा मंदिर हैं। बाली में लगभग हर बड़ी हिंदू कॉलोनी में एक छोटा मंदिर है, जिसे संगाह कहते हैं।



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