Republic Day 2026: पीएम मोदी ने पहनी मरून रंग की पगड़ी, जानें 'राजसी साफे' का किस राज्य से नाता और खूबी

Republic Day 2026 PM Modi Look: गणतंत्र दिवस की परेड में जहां एक ओर भारत की सैन्य शक्ति और झांकियों का जलवा रहता है, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'पगड़ी' पर भी पूरे देश की नजर टिकी होती है। 77वें गणतंत्र दिवस पर जब पीएम मोदी नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचे, तो उनके मरून रंग के साफे ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

यह केवल एक परिधान नहीं, बल्कि भारत की 'विविधता में एकता' का प्रतीक है। आखिर इस मरून साफे का किस राज्य से नाता है और क्यों पीएम मोदी हर साल अपनी पगड़ी के जरिए राज्यों की कला का मान बढ़ाते हैं? आइए जानते हैं इस खास साफे के पीछे की दिलचस्प कहानी।

पीएम मोदी का 2026 लुक: मरून साफे की खासियत

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बार मरून (गहरा लाल) रंग की पगड़ी पहनी है, जिस पर पीले और सुनहरे रंग की धारियां (Stripe patterns) हैं। ये कोई आम पगड़ी नहीं थी बल्कि इसके पीछे की एक राज्य की भावना जुड़ी थीं। जीं हां, यह साफा मुख्य रूप से राजस्थान की पारंपरिक 'बांधनी' या 'लहरिया' कला से प्रेरित है। राजस्थान में मरून और लाल रंग को शौर्य, विजय और मांगलिक कार्यों का प्रतीक माना जाता है। इसमें एक लंबी पूंछ (Tail) है, जो पीछे की ओर लटकती है, जो कि राजस्थानी और गुजराती शाही साफे की एक पहचान है।

खास था पीएम का पहनावा

पीएम मोदी ने इस मरून साफे को नेवी गहरे नीले रंग के कुर्ते और हल्के नीले नेहरू जैकेट के साथ पेयर किया है। यह रंगों का संयोजन 'शक्ति' और 'शांति' के तालमेल को दर्शाता है। मोदी का ये लुक बहुत ही अलग लग रहा था जो सभी को आकर्षित कर रहा था।

पगड़ी में छिपा 'सांस्कृतिक कूटनीति कारण'

पीएम मोदी का साफा पहनना महज एक फैशन चॉइस नहीं है। इसके पीछे कई रणनीतिक और सांस्कृतिक कारण होते हैं। दरअसल, हर साल पीएम मोदी अलग-अलग राज्यों जैसे गुजरात, राजस्थान, उत्तराखंड, महाराष्ट्र की पारंपरिक टोपियां या साफे पहनकर उस क्षेत्र की जनता और उनकी कला का सम्मान करते हैं।

वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा

हाथ से बुनी गई और पारंपरिक डाइंग (Tie-dye) वाली पगड़ियां पहनकर वे भारतीय बुनकरों और कारीगरों के काम को वैश्विक मंच पर प्रमोट करते हैं। ये उदाहरण है वोकल फॉर लोकल का जो भारतीय कारीगरों की कारीगरी को दर्शाते हैं। बता दें कि मरून रंग को अक्सर सेना और बलिदान से जोड़कर देखा जाता है, जो गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय पर्व के अनुरूप है।

Story first published: Monday, January 26, 2026, 14:00 [IST]
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