"बदलूराम का बदन जमीन के नीचे है..." क्यों वायरल हुआ ये गाना? जानें असम रेजिमेंट के 'अमर' जवान' की कहानी

Assam Regiment Viral Song: भारतीय सेना की अपनी एक अलग दुनिया है, जहां परंपराएं और गौरव गाथाएं पीढ़ियों तक जीवित रहती हैं। सोशल मीडिया पर अक्सर आपने असम रेजिमेंट के जवानों को एक खास लय में झूमते और गाते देखा होगा- 'बदलूराम का बदन जमीन के नीचे है, तो हमें उसका राशन मिलता है'।

सुनने में यह बोल थोड़े मजाकिया लग सकते हैं, लेकिन इसके पीछे द्वितीय विश्व युद्ध का एक ऐसा भावुक और जांबाज किस्सा छिपा है, जो सेना के अनुशासन और एक शहीद के 'चमत्कार' की गवाही देता है। आखिर कौन थे बदलूराम और क्यों आज भी भारतीय सेना का हर जवान उन्हें अपनी जुबां पर रखता है? आइए जानते हैं इस वायरल गाने के पीछे का वो सच, जो हर भारतीय को गर्व से भर देगा।

शहादत और उस 'चमत्कार' की कहानी

यह कहानी साल 1944 की है, जब द्वितीय विश्व युद्ध अपने चरम पर था। जापानी सेना भारत के पूर्वोत्तर हिस्से से देश में घुसने की कोशिश कर रही थी। कोहिमा (नागालैंड) के मोर्चे पर असम रेजिमेंट तैनात थी। इसी रेजिमेंट में एक जांबाज सिपाही थे- बदलूराम। जापानी सेना ने कोहिमा को चारों तरफ से घेर लिया था। रसद (सप्लाई) पूरी तरह कट चुकी थी। इसी भीषण लड़ाई के दौरान सिपाही बदलूराम वीरगति को प्राप्त हुए। जंग इतनी भीषण थी कि अपनों को खोने का दुख मनाने का भी समय नहीं था।

क्वार्टर मास्टर की वो 'गलती' जो वरदान बन गई

सेना के नियमों के अनुसार, जब कोई जवान शहीद होता है, तो उसका नाम 'राशन लिस्ट' से तुरंत काट दिया जाता है ताकि अतिरिक्त राशन न आए। लेकिन बदलूराम की शहादत के बाद, रेजिमेंट के क्वार्टर मास्टर उनका नाम लिस्ट से हटाना भूल गए। नतीजा यह हुआ कि बदलूराम के हिस्से का राशन लगातार आता रहा और जमा होता रहा।

जब मौत के मुहाने पर खड़ी थी पूरी रेजिमेंट

जापानी सेना ने रेजिमेंट की घेराबंदी इतनी सख्त कर दी कि जवानों के पास खाने का सामान खत्म हो गया। कई दिनों तक रसद नहीं पहुंची। जवान भूख से बेहाल थे और हार निश्चित लग रही थी। तभी क्वार्टर मास्टर को अपनी उस 'गलती' का अहसास हुआ। जब सारा राशन खत्म हो गया, तब बदलूराम के नाम पर जमा हुआ महीनों का अतिरिक्त राशन निकाला गया। उसी राशन की बदौलत पूरी रेजिमेंट कई दिनों तक डटी रही और अंततः जापानी सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। अगर उस दिन बदलूराम का राशन न होता, तो शायद पूरी रेजिमेंट भूख से शहीद हो जाती।

तभी से अमर हो गया यह गाना

इस घटना के बाद रेजिमेंट के जवानों ने अपने उस साथी को सम्मान देने के लिए यह गाना बनाया। आज भी जब असम रेजिमेंट में नए जवान भर्ती होते हैं और अपनी 'कसम परेड' पूरी करते हैं, तो वे इसी गाने पर झूमते हैं। गाने के बोल हैं:

"एक जवान बदलूराम था, असम रेजिमेंट में भर्ती था, बदलूराम का बदन जमीन के नीचे है, पर हमें उसका राशन मिलता है, शाबाश! हलैल्हैया, शाबाश! हलैल्हैया।

Story first published: Monday, January 26, 2026, 12:02 [IST]
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