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Savitribai Phule Jayanti: हौसलों का दूसरा नाम थी सावित्री बाई फुले, यहां पढ़ें उनके प्रेरक विचार
Savitribai Phule Jayanti 2024: सावित्री बाई फुले (Savitribai Phule) भारतीय समाज के सुधारक और शिक्षा-नेता थीं, जो मुख्यतः 19वीं सदी में कार्यरत थीं। उन्होंने जातिवाद, नारी समाज, और शिक्षा के क्षेत्र में अपने समर्पण के लिए पहचान बनाई। इसके लिए उन्हें "भारतीय स्त्रीत्व की पहली शिक्षिका" कहा जाता है।
सावित्री बाई फुले ने अपने पति ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर दलितों और वर्णवाद से प्रभावित होने वाले लोगों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में काम किया। उन्होंने महिलाओं और दलितों के लिए स्कूल खोले और उन्हें शिक्षित बनाने का कार्य किया। सावित्री बाई फुले ने समाज में उन्नति और सामाजिक समानता के लिए समर्थन किया। उन्होंने जातिवाद, अंधविश्वास, और मूर्खता के खिलाफ उठने में साहस दिखाया।

सावित्री बाई फुले और ज्योतिराव फुले ने मिलकर 1848 में पुणे में "फुले शिक्षण महाविद्यालय" की स्थापना की, जो भारत का पहला स्कूल था जो महिलाओं और दलितों को शिक्षित करने का प्रयास कर रहा था। सावित्री बाई फुले ने अपने जीवन को समर्पित कर दिया था सामाजिक सुधार के लिए। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक समानता के लिए लड़ा और उनकी सेवा में बीता।
सावित्री बाई फुले को उनके समाजसेवा और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें "भारतीय स्त्रीत्व की पहली शिक्षिका" के रूप में सम्मानित किया गया है। हर साल 3 जनवरी को सावित्री बाई फुले की जयंती मनाई जाती है। आइये इस मौके पर उनके विचारों से प्रेरणा लें और दूसरों को भी प्रेरित करें।
1. शिक्षा स्वर्ग का द्वार खोलती है, खुद को जानने का अवसर देती है। -सावित्रीबाई फुले
2. स्वाभिमान से जीने के लिए पढ़ाई करो, शिक्षा ही इंसानों का सच्चा आभूषण है। - सावित्रीबाई फुले
3. कोई तुम्हें कमजोर समझे, इससे पहले तुम्हे शिक्षा के महत्व को समझना होगा। - सावित्रीबाई फुले
4. स्त्रियां सिर्फ रसोई और खेत पर काम करने के लिए नहीं बनी है, वह पुरुषों से बेहतर कार्य कर सकती है। - सावित्रीबाई फुले
5. तुम गाय,बकरी को सहलाते हो, नाग पंचमी पर नाग को दूध पिलाते हो, लेकिन दलितों को तुम इंसान नहीं, अछूत मानते हो। - सावित्रीबाई फुले
6. देश में महिला साक्षरता की भारी कमी है क्योंकि यहां की महिलाओं को कभी बंधन मुक्त होने ही नहीं दिया गया। - सावित्रीबाई फुले
7. अपनी बेटी के विवाह से पहले उसे शिक्षित बनाओ, ताकि वह आसानी से अच्छे-बुरे का फर्क कर सके। - सावित्रीबाई फुले
8. आखिर कब तक तुम अपने ऊपर हो रहे अत्याचार को सहन करोगी। देश बदल रहा है, इस बदलाव में हमें भी बदलना होगा। शिक्षा का द्वार जो पितृसत्तात्मक विचार ने बंद किया है, उसे खोलना होगा। - सावित्रीबाई फुले
9. जाओ जाकर पढ़ो-लिखो, मेहनती बनो, आत्मनिर्भर होकर काम करो, ज्ञान और धन एकत्रित करो। ज्ञान के बिना सब खो जाता है। ज्ञान के बिना हम जानवर बन जाते है, इसलिए खाली मत बैठो, जाओ जाकर शिक्षा ग्रहण करो। - सावित्रीबाई फुले
10. एक सशक्त और शिक्षित स्त्री सभ्य समाज का निर्माण कर सकती है। इसलिए तुम्हारा भी शिक्षा का अधिकार होना चहिए। कब तक तुम गुलामी की बेड़ियों में जकड़ी रहोगी। उठो और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करो। - सावित्रीबाई फुले
11. ब्राह्मणवाद केवल मानसिकता नहीं, एक पूरी व्यवस्था है। जिससे धर्म के पोषक तत्व देवी-देवता, रीति-रिवाज, पूजा-पाठ आदि गरीब दलित जनता को अपने में काबू में रखकर उनकी उन्नति के सारे रास्ते बंद करते हैं और उन्हें बदहाली भरे जीवन में धकेलते आए हैं। - सावित्रीबाई फुले
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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